तिजोरी धरी रह गई,हाथ का मैल बना पैसा और श्मशान में बेटे की दी 'अग्नि' बनी अंतिम सत्य कटनी | कहते हैं इंसान अपनी पूरी जिंदगी जिस धन-दौलत को कमाने और संजोने में लगा देता है, वह मौत की चौखट पर आकर महज एक 'हाथ का मैल' साबित होती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और भौतिकवादी समाज में यह कड़वा सच एक बार फिर हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है। श्रीमद्भगवद्गीता और भारतीय दर्शन में निहित यह बात आज के समाज का सबसे बड़ा आईना बन चुकी है कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। *पैसा जो किसी एक का होकर नहीं रहा* आर्थिक विश्लेषकों और समाजशास्त्रियों का भी मानना है कि पैसा पानी की तरह है, जो आज एक हाथ में है तो कल दूसरे हाथ में। इंसान जीवन भर इस भ्रम में जीता है कि जो संपत्ति उसने जुटाई है, वह उसकी अपनी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि तिजोरियों में बंद नोट और बैंकों के आंकड़े केवल एक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जो किसी एक व्यक्ति के पास कभी स्थिर नहीं रहते। पुत्र की दी 'अग्नि' ही जीवन का अंतिम पड़ाव सनातन परंपरा में मुखाग्नि (अंतिम संस्कार के समय अग्नि देना) का एक बहुत ग...