जिंदगी किराए का मकान है, एक दिन चाबी लौटानी ही पड़ेगी, इसलिए मोह कम, इंसानियत ज्यादा रखिए कटनी | मानव जीवन प्रकृति का सबसे अनमोल और अद्भुत उपहार है। परंतु इस जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि यह अत्यंत क्षणभंगुर है। जो आज है, वह कल नहीं होगा, जो जन्म लेता है, उसका अंत भी निश्चित है।हम इस संसार में एक यात्री की तरह आते हैं, कुछ समय ठहरते हैं और फिर अपनी यात्रा पूरी करके चले जाते हैं।यदि गहराई से विचार किया जाए, तो यह संपूर्ण संसार एक सराय की तरह है और हमारा यह शरीर तथा जीवन एक किराए के मकान के समान है। जिस प्रकार किराए के मकान में रहने वाला व्यक्ति जानता है कि वह उस घर का स्थायी मालिक नहीं है और एक न एक दिन उसे वह मकान खाली करके उसकी चाबी मकान मालिक को लौटानी ही होगी, ठीक उसी प्रकार इस धरा पर हमारा प्रवास भी सीमित है। कालचक्र का बुलावा आते ही हमें यह सांसारिक शरीर और इसके तमाम साजो-सामान यहीं छोड़कर जाना पड़ता है। *भौतिकता की अंधी दौड़ में भटकता मानव* आज का आधुनिक समाज भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-संपत्ति के संचय की अंधी दौड़ में इतनी तेज़ी से भाग रहा है कि वह जीवन के मूलभू...