सुख के समय विदा कह गईं साहस, संस्कार और संवेदनशीलता की प्रतीक शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी के निधन से क्षेत्र शोकाकुल, जब सुख का समय आया तो कह गई कि अब हम चलते हैं सुखी रहना घर के लोगो अब हम तो अंतिम सफ़र करते हैं,साहस, संस्कार और संवेदनशीलता की मिसाल, शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर
सुख के समय विदा कह गईं साहस, संस्कार और संवेदनशीलता की प्रतीक शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी के निधन से क्षेत्र शोकाकुल, जब सुख का समय आया तो कह गई कि अब हम चलते हैं सुखी रहना घर के लोगो अब हम तो अंतिम सफ़र करते हैं,साहस, संस्कार और संवेदनशीलता की मिसाल, शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर कटनी । जब जीवन में सुख का समय आता है, तो हर कोई उसे जीने की चाह रखता है। लेकिन कभी-कभी नियति ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां खुशियों के बीच ही एक गहरी उदासी छा जाती है। ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां शिक्षिका विजय लक्ष्मी ज्योतिषी ने जीवन के उस पड़ाव पर इस संसार को अलविदा कह दिया, जब उनके परिवार और अपनों के लिए उनका साथ सबसे ज्यादा जरूरी था। उनके आकस्मिक निधन ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। विजय लक्ष्मी ज्योतिषी सिर्फ एक शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि एक मजबूत व्यक्तित्व, एक प्रेरणादायक महिला और एक संवेदनशील इंसान थीं। उन्होंने अपने जीवन में जो मूल्यों की नींव रखी, वह आज उनके बच्चों और परिवार के माध्यम से समाज में स्पष्...