ज़िंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं और मुर्दों से बदतर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं... कहते हैं सच बोलो तो प्राण गंवाने पड़ते हैं, मैं भी सच्चाई गा-गा कर शीश कटाने आया हूँ, घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने आया हूँ
ज़िंदा हैं वो लोग जो मौत से टकराते हैं और मुर्दों से बदतर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं... कहते हैं सच बोलो तो प्राण गंवाने पड़ते हैं, मैं भी सच्चाई गा-गा कर शीश कटाने आया हूँ, घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने आया हूँ कटनी | जो देश के सजग नागरिकों, निडर पत्रकारों और सीमा पर डटे वीरों के सीने में जलती है। आज का दौर जहाँ चाटुकारिता और झूठे दिलासों का बोलबाला बनता जा रहा है, वहीं कुछ ऐसे साहसी मन भी हैं जो सच का आइना दिखाने से पीछे नहीं हटते, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। *सत्य की राह और बलिदान की परंपरा* भारतीय इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि जब-जब समाज में असत्य, अन्याय और चाटुकारिता का प्रभाव बढ़ा है, तब-तब किसी न किसी क्रांतिकारी ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर सच्चाई का अलख जगाया है।भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु से लेकर पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में निडरता से कलम चलाने वाले मनीषियों तक सभी ने इस बात को सिद्ध किया है कि जीवन केवल सांसें लेने का नाम नहीं है, बल्कि सिद्धांतों के साथ जीने का नाम है। जो लोग संकट और अन्याय के सामने घुटने ट...