क्या राजनीति अब सेवा नहीं, केवल स्वार्थ का माध्यम बन गई है, सफेद कुर्ते के पीछे छिपा भ्रष्टाचार, नेतागिरी या स्वार्थ की राजनीति, राजनीति में सेवा का भाव या सत्ता का लालच, क्या राजनीति अब ईमानदार लोगों के लिए नहीं रही, क्या राजनीति भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मंच बन गई है राजनीति में बढ़ता स्वार्थ और धुंधलाती जनसेवा क्या सादगी के पहरावे के पीछे छिपा है निजी हित?
क्या राजनीति अब सेवा नहीं, केवल स्वार्थ का माध्यम बन गई है, सफेद कुर्ते के पीछे छिपा भ्रष्टाचार, नेतागिरी या स्वार्थ की राजनीति, राजनीति में सेवा का भाव या सत्ता का लालच, क्या राजनीति अब ईमानदार लोगों के लिए नहीं रही, क्या राजनीति भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मंच बन गई है राजनीति में बढ़ता स्वार्थ और धुंधलाती जनसेवा क्या सादगी के पहरावे के पीछे छिपा है निजी हित? कटनी । आज के आधुनिक दौर में भारतीय लोकतंत्र एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। एक तरफ जहां संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत राजनीति को जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण का सबसे पवित्र और सशक्त माध्यम माना गया है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के बीच राजनीति और राजनेताओं की छवि को लेकर असंतोष व अविश्वास का भाव तेजी से गहराता जा रहा है। कटनी जिले सहित पूरे देश के आम जनमानस में आज यह चर्चा और धारणा तेजी से मजबूत होती जा रही है कि राजनीति का मूल उद्देश्य अब 'जनसेवा' न रहकर मुख्य रूप से 'व्यक्तिगत लाभ', 'सत्ता की लोलुपता' और 'स्वार्थ पूर्ति' का जरिया बनता जा रहा है।अक्सर यह देखा जाता है कि चु...