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विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ढीमरखेड़ा प्रखंड के उपाध्यक्ष बनाए गए राकेश त्रिपाठी

 विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ढीमरखेड़ा प्रखंड के उपाध्यक्ष बनाए गए राकेश त्रिपाठी ढीमरखेड़ा ।  विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल की ढीमरखेड़ा प्रखंड इकाई में संगठनात्मक विस्तार करते हुए राकेश त्रिपाठी को प्रखंड उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन द्वारा उन्हें यह दायित्व सौंपे जाने पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दीं। नव नियुक्त प्रखंड उपाध्यक्ष राकेश त्रिपाठी ने संगठन द्वारा जताए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह सौंपे गए दायित्व का पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने तथा कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने की बात कही। इस नियुक्ति के बाद क्षेत्र के कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने राकेश त्रिपाठी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व और सक्रिय सहभागिता से ढीमरखेड़ा प्रखंड में संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी।

अभावों से तपकर बने अभिनेता, आत्मसम्मान से बनाई पहचान और किसानों-सैनिकों से जुड़ी सामाजिक संवेदनशीलता ने बनाया अलग मुकाम, अभिनेता नाना पाटेकर, पर्दे के नायक से जन-जन के 'अपने' बनने तक का सफर

 अभावों से तपकर बने अभिनेता, आत्मसम्मान से बनाई पहचान और किसानों-सैनिकों से जुड़ी सामाजिक संवेदनशीलता ने बनाया अलग मुकाम, अभिनेता नाना पाटेकर, पर्दे के नायक से जन-जन के 'अपने' बनने तक का सफर कटनी |  भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार अपनी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपने यादगार किरदारों के लिए। लेकिन अभिनेता नाना पाटेकर उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कला के साथ-साथ अपने मानवीय सरोकारों से लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। उनका जीवन केवल एक सफल अभिनय यात्रा भर नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, आत्मसम्मान, संवेदनशीलता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की मिसाल है। *अभावों में तपकर निखरा व्यक्तित्व* नाना पाटेकर का बचपन बेहद गरीबी और संघर्षों के बीच बीता। कम उम्र में पेट भरने की चिंता और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने जीवन की सबसे बड़ी सीख पाई। नाना खुद मानते हैं कि बचपन में महसूस की गई 'भूख और अपमान' ने ही उन्हें अभिनय का असली पाठ पढ़ाया। यही कड़वे अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय में यथार्थ और गहराई बनकर उभरे। *आत्मसम्मान से समझौता किए बिना बनाई पहचा...

खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपनी दम पर बनाना पड़ता है, आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत से ही मिलती है असली सफलता, युवाओं के लिए प्रेरणा बना नया मूलमंत्र

 खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपनी दम पर बनाना पड़ता है, आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत से ही मिलती है असली सफलता, युवाओं के लिए प्रेरणा बना नया मूलमंत्र कटनी  |  आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी दौर में जहाँ हर कोई सफलता के शॉर्टकट की तलाश में रहता है, वहीं जीवन में स्थाई और वास्तविक पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और जुनून ही एकमात्र रास्ता है।हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रेरणादायक विचारों और संदेशों की एक नई लहर देखी जा रही है, जो युवाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी क्रम में एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली संदेश लोगों के दिलों को छू रहा है "खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपने दम पर बनाना पड़ता है।" यह विचार केवल कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की जीवन-यात्रा का सार हैं जो शून्य से शुरुआत करके सफलता के शिखर तक पहुँचते हैं।   *विरासत बनाम स्व-निर्मित सफलता* प्राचीन काल से ही यह ...

तिजोरी धरी रह गई,हाथ का मैल बना पैसा और श्मशान में बेटे की दी 'अग्नि' बनी अंतिम सत्य

 तिजोरी धरी रह गई,हाथ का मैल बना पैसा और श्मशान में बेटे की दी 'अग्नि' बनी अंतिम सत्य कटनी  |  कहते हैं इंसान अपनी पूरी जिंदगी जिस धन-दौलत को कमाने और संजोने में लगा देता है, वह मौत की चौखट पर आकर महज एक 'हाथ का मैल' साबित होती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और भौतिकवादी समाज में यह कड़वा सच एक बार फिर हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है। श्रीमद्भगवद्गीता और भारतीय दर्शन में निहित यह बात आज के समाज का सबसे बड़ा आईना बन चुकी है कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। *पैसा जो किसी एक का होकर नहीं रहा* आर्थिक विश्लेषकों और समाजशास्त्रियों का भी मानना है कि पैसा पानी की तरह है, जो आज एक हाथ में है तो कल दूसरे हाथ में। इंसान जीवन भर इस भ्रम में जीता है कि जो संपत्ति उसने जुटाई है, वह उसकी अपनी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि तिजोरियों में बंद नोट और बैंकों के आंकड़े केवल एक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जो किसी एक व्यक्ति के पास कभी स्थिर नहीं रहते। पुत्र की दी 'अग्नि' ही जीवन का अंतिम पड़ाव सनातन परंपरा में मुखाग्नि (अंतिम संस्कार के समय अग्नि देना) का एक बहुत ग...

पहले पैसा, फिर इलाज' की जिद पर सख्त कानून, इमरजेंसी में मना करने पर डॉक्टर को हो सकती है जेल

 पहले पैसा, फिर इलाज' की जिद पर सख्त कानून, इमरजेंसी में मना करने पर डॉक्टर को हो सकती है जेल कटनी  |  अक्सर देखने में आता है कि अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड में मरीजों से पहले पैसे जमा करने या एडवांस फॉर्म भरने को कहा जाता है। कई बार पैसे न होने के कारण गरीब मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता और वे दम तोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय कानून के तहत ऐसा करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है? सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने इस संबंध में बेहद कड़े और स्पष्ट नियम बनाए हैं।  *सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 'जान बचाना पहला धर्म'* सर्वोच्च न्यायालय ने पंडित परमानंद कटारा बनाम भारत संघ और हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2026) मामलों की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रॉमा (गंभीर चोट) और आपातकालीन चिकित्सा देखभाल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जो अनुच्छेद 21 के तहत आता है। कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल किसी भी गंभीर मरीज (जैसे- सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, या गंभीर बीमारी) को सिर्फ इसलिए लौटा नहीं सकता कि उसके पास उस वक्त पैसे नहीं हैं। अस्पताल का...

खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपनी दम पर बनाना पड़ता है, आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत से ही मिलती है असली सफलता, युवाओं के लिए प्रेरणा बना नया मूलमंत्र

 खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपनी दम पर बनाना पड़ता है, आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत से ही मिलती है असली सफलता, युवाओं के लिए प्रेरणा बना नया मूलमंत्र कटनी  |  आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी दौर में जहाँ हर कोई सफलता के शॉर्टकट की तलाश में रहता है, वहीं जीवन में स्थाई और वास्तविक पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और जुनून ही एकमात्र रास्ता है।हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रेरणादायक विचारों और संदेशों की एक नई लहर देखी जा रही है, जो युवाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी क्रम में एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली संदेश लोगों के दिलों को छू रहा है "खून में जुनून रखो, क्योंकि हौसला और घोंसला किसी को विरासत में नहीं मिलते, उसे अपने दम पर बनाना पड़ता है।" यह विचार केवल कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की जीवन-यात्रा का सार हैं जो शून्य से शुरुआत करके सफलता के शिखर तक पहुँचते हैं।   *विरासत बनाम स्व-निर्मित सफलता* प्राचीन काल से ही यह ...

सचिव की पेंट का बेल्ट बना पुत्र अधिकारी के जैसे कर रहा कार्य, ग्राम पंचायत घुघरी,विकास की राह में गुटबाजी का रोड़ा, 4 साल गंवाकर भी बदहाली की मार झेल रही जनता 15 लाख रुपये के फर्जी आहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया सरपंच ने लगाया गंभीर आरोप, बिना जानकारी और फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई सरकारी राशि नियमों को ताक पर रखकर सचिव का पुत्र संभाल रहा पंचायत का कामकाज,ग्रामीणों में भारी रोष, एफआईआर (FIR) की उठी मांग

 सचिव की पेंट का बेल्ट बना पुत्र अधिकारी के जैसे कर रहा कार्य, ग्राम पंचायत घुघरी,विकास की राह में गुटबाजी का रोड़ा, 4 साल गंवाकर भी बदहाली की मार झेल रही जनता 15 लाख रुपये के फर्जी आहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया सरपंच ने लगाया गंभीर आरोप, बिना जानकारी और फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई सरकारी राशि नियमों को ताक पर रखकर सचिव का पुत्र संभाल रहा पंचायत का कामकाज,ग्रामीणों में भारी रोष, एफआईआर (FIR) की उठी मांग ढीमरखेड़ा | ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और लोकतंत्र की बुनियादी इकाई को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई पंचायती राज व्यवस्था ग्राम पंचायत घुघरी में दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थानीय पंचायती राजनीति में जारी गुटबाजी, प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार के मकड़जाल ने गांव के विकास को पूरी तरह से थाम दिया है। बीते 4 वर्षों में जहां अन्य पंचायतों ने विकास की नई इबारत लिखी, वहीं घुघरी पंचायत केवल समय बर्बादी, आपसी खींचतान और घोटालों का केंद्र बनी रही। आज स्थिति यह है कि गांव की मूल भूत सुविधाएं ध्वस्त हैं और भ्रष्टाचार का आलम यह है कि नियमों को ठेंगा दिखाकर पंचायत का काम सचिव का पुत्र ...