एक ही बंदर काफी है बाग को उजाड़ने के लिए उस देश का क्या होगा जहां हर राजनीतिक पद पर बंदर बैठे हों कटनी | एक ही बंदर पूरे बाग को उजाड़ने के लिए काफी होता है। वह अपनी शरारत, लालच और अविवेक से पेड़ों को नुकसान पहुंचा देता है, फलों को तोड़ देता है और पूरे वातावरण को अस्त-व्यस्त कर देता है। लेकिन जरा कल्पना कीजिए उस स्थिति की, जब बाग की रखवाली करने के लिए ही बंदरों को बैठा दिया जाए।जब बाग का माली ही अपनी जिम्मेदारी भूलकर उसे उजाड़ने में लग जाए, तब उस बाग का भविष्य क्या होगा? आज की राजनीति को देखकर यह प्रश्न बार-बार मन में उठता है कि देश की बागडोर जिन लोगों के हाथों में है, क्या वे सच में देश को संवारने आए हैं या उसे अपने स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने आए हैं? जब नेतृत्व में समझदारी, ईमानदारी और दूरदर्शिता की कमी हो जाती है, तब राष्ट्र की स्थिति भी उसी बाग की तरह हो जाती है जिसे बंदरों की टोली ने घेर लिया हो।राजनीति का मूल उद्देश्य समाज की सेवा करना होता है। लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को इस उम्मीद से चुनती है कि वे उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे, देश को विकास ...