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जिले में हादसों का कहर सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से 6 की मौत

 जिले में हादसों का कहर सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से 6 की मौत कटनी ।  जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों के भीतर दर्दनाक हादसों की खबर सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अलग-अलग घटनाओं में कुल 6 लोगों की जान चली गई है। पुलिस ने सभी मामलों में धारा 194 बीएनएसएस के तहत मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। *सड़क हादसों में उजड़ गए परिवार* बड़वारा में पिता-पुत्र की मौत: बड़वारा थाना अंतर्गत ग्राम सुड्डी के पास 'अंधा मोड़' पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में भनपुरा निवासी शिव सिंह गोंड़ (65 वर्ष) और उनके पुत्र मनोज सिंह (38 वर्ष) की मौत हो गई। दोनों एक ही दुर्घटना का शिकार हुए, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। *कुठला में युवक ने तोड़ा दम:* ग्राम कन्हवारा निवासी 26 वर्षीय युवक श्रीकांत काछी की सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। *स्लीमनाबाद एनएच-30 पर हादसा:* नेशनल हाईवे 30 पर गुड्डा ढाबा के पास हुए एक्सीडेंट में लखनपुर (सिहोरा) निवासी राजेश रजक (45 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। *संदिग्ध परिस्थिति...

आदिवासी जमीन स्कैम': राज्य प्रशासनिक सेवा के 3 अफसरों का 'महापाप', रसूखदार डोडानी के लिए सरकारी फाइलों का हुआ 'कत्ल'

 आदिवासी जमीन स्कैम': राज्य प्रशासनिक सेवा के 3 अफसरों का 'महापाप', रसूखदार डोडानी के लिए सरकारी फाइलों का हुआ 'कत्ल'  कटनी ।  पिपरौध की बेशकीमती आदिवासी जमीन को निगलने के लिए बुना गया जाल इतना गहरा है कि इसमें तीन राज्य प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों ने खेल किया।एसडीएम स्तर के अधिकारी, तहसीलदार, बाबू और पटवारी तक एक 'सिंडिकेट' की तरह काम कर रहे थे।  दैनिक ताजा खबर के प्रधान संपादक राहुल पाण्डेय के पास मौजूद पुख्ता दस्तावेज और जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल में रसूखदारों डोडानी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी दफ्तरों को 'सेल डीड' के दफ्तर में बदल दिया गया। जिससे रसूखदार डोडानी भी मालामाल हुआ और बाबू और अफसर की जेब भी गर्म हुई। *एसडीएम ने 'गायब' की फाइलें, तहसीलदार ने 'मूंदी' आंखें* इस घोटाले की पटकथा राज्य प्रशासनिक सेवा के उन तीन अधिकारियों ने लिखी, जिन पर कानून की रक्षा का जिम्मा था एसडीएम का 'कांड जब इस जमीन को लेकर शिकायतें प्रशासन तक पहुँचीं, तो एसडीएम स्तर के एक अधिकारी ने बड़ी चतुराई से शिकायतों की मूल फाइलों को ही रिकॉर्ड से ग...

एकता के रंग में रंगी होली, क्षेत्रीय पत्रकारों और समाजसेवियों की मित्रता बनी मिसाल

 एकता के रंग में रंगी होली, क्षेत्रीय पत्रकारों और समाजसेवियों की मित्रता बनी मिसाल कटनी । होली का पर्व जहां रंग, उमंग और भाईचारे का संदेश देता है, वहीं इस बार क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल देखने को मिली।सामाजिक, पत्रकारिता और जनप्रतिनिधि क्षेत्र से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों ने एक साथ होली मनाकर एकता और सद्भाव का परिचय दिया । राकेश यादव (संपादक, कलयुग की कलम), राहुल पाण्डेय (प्रधान संपादक, दैनिक ताजा खबर), अंकित झारिया (पत्रिका), प्रमोद असाटी (समाजसेवी), सोनू त्रिपाठी (संचालक, कलयुग की कलम) एवं जनपद उपाध्यक्ष पति पारस पटेल ने एक साथ रंग-गुलाल लगाकर होली का पर्व मनाया और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र के विकास, सामाजिक समरसता एवं सकारात्मक पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। *पत्रकारिता और समाजसेवा का संगम* इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने का भी माध्यम है। जब ...

मंदिर नहीं, भारत बने महान विरासत बचाने और राष्ट्र गढ़ने की पुकार, कुपुत्र बेचता है विरासत, सुपुत्र बनाता है भारत मंदिर नहीं, देश बने महान ईंट-पत्थर के मंदिर नहीं, भारत को मंदिर बनाने की जरूरत संपत्ति लुटाने वाले नहीं, राष्ट्र सजाने वाले सुपुत्र चाहिए मंदिर बनाना आसान, भारत को महान बनाना असली तपस्या जो बेच दे विरासत वो कुपुत्र, जो गढ़ दे भारत वो सच्चा सुपुत्र धर्मस्थल से पहले राष्ट्रस्थल भारत ही बने सबसे बड़ा मंदिर विरासत बचाओ, भारत सजाओ यही है असली राष्ट्रभक्ति सुपुत्र वही जो देश को ऊँचा उठाए, केवल पत्थर नहीं भविष्य गढ़ जाए

 मंदिर नहीं, भारत बने महान विरासत बचाने और राष्ट्र गढ़ने की पुकार, कुपुत्र बेचता है विरासत, सुपुत्र बनाता है भारत मंदिर नहीं, देश बने महान ईंट-पत्थर के मंदिर नहीं, भारत को मंदिर बनाने की जरूरत संपत्ति लुटाने वाले नहीं, राष्ट्र सजाने वाले सुपुत्र चाहिए मंदिर बनाना आसान, भारत को महान बनाना असली तपस्या जो बेच दे विरासत वो कुपुत्र, जो गढ़ दे भारत वो सच्चा सुपुत्र धर्मस्थल से पहले राष्ट्रस्थल भारत ही बने सबसे बड़ा मंदिर विरासत बचाओ, भारत सजाओ यही है असली राष्ट्रभक्ति सुपुत्र वही जो देश को ऊँचा उठाए, केवल पत्थर नहीं भविष्य गढ़ जाए कटनी |  कुपुत्र बेचता है विरासत, सुपुत्र बनाता है भारत” इन पंक्तियों के साथ क्षेत्र में एक विचारधारा तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का कहना है कि केवल ईंट-पत्थर के मंदिरों का निर्माण ही विकास नहीं है, बल्कि पूरे भारत को एक सशक्त, समृद्ध और संस्कारित राष्ट्र के रूप में गढ़ना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।  *विरासत बचाने की जरूरत* देश की ऐतिहासिक धरोहरें, सांस्कृतिक मूल्य और सामाजिक एकता हमारी असली संपत्ति हैं। ज...

जनता को परेशान करने वाले खुद की चप्पल चोरी से हुए परेशान, छोटी मानसिकता वाले कैसे बने नायब तहसीलदार, नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में अनोखा मामला चप्पल चोरी, नायब तहसीलदार ने एसपी को दिया आवेदन

 जनता को परेशान करने वाले खुद की चप्पल चोरी से हुए परेशान, छोटी मानसिकता वाले कैसे बने नायब तहसीलदार, नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर में अनोखा मामला चप्पल चोरी, नायब तहसीलदार ने एसपी को दिया आवेदन   संपादक राहुल पाण्डेय |नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में चप्पल चोरी का एक अनोखा मामला सामने आया है। खास बात यह है कि चोरी किसी आम श्रद्धालु की नहीं, बल्कि एक नायब तहसीलदार की चप्पल की हुई। घटना के बाद मामला थाने तक पहुंच गया और पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गई है। जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 3:15 बजे नायब तहसीलदार वरुण चंद्रवंशी दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। दर्शन से पूर्व उन्होंने अपनी चप्पल रसीद काउंटर के पास निर्धारित स्थान पर उतारी थी। करीब 10 मिनट बाद जब वे लौटे तो उनकी चप्पल वहां नहीं मिली। सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ संदिग्ध घटना के बाद मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में एक व्यक्ति चप्पल ले जाते हुए दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि संदिग्ध की पहचान कर ली गई है और पूछताछ में उसने चप्पल ले जाने की बात स्वीकार भी...

चलते-चलते राह में, मोड़ अचानक आ गया, हंसता हुआ चेहरा भी पल में ख़ामोश हो गया, ना दस्तक, ना इशारा, ना कोई पैग़ाम आया, मौत ने चुपके से आकर अपना फ़र्ज़ निभाया सड़क दुर्घटना में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा भागीरथ पटेल का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

 चलते-चलते राह में, मोड़ अचानक आ गया, हंसता हुआ चेहरा भी पल में ख़ामोश हो गया, ना दस्तक, ना इशारा, ना कोई पैग़ाम आया, मौत ने चुपके से आकर अपना फ़र्ज़ निभाया सड़क दुर्घटना में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा भागीरथ पटेल का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर कटनी  |  जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में पदस्थ एवं वर्तमान में रीठी में कार्यरत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) भागीरथ पटेल के असामयिक निधन की दुखद खबर से पूरा प्रशासनिक अमला और क्षेत्र स्तब्ध है। कर्तव्यपथ से घर लौटते समय हुए एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया।इस हृदयविदारक घटना ने न केवल उनके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि जनपद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भी शोकाकुल कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भागीरथ पटेल अपने नियमित शासकीय कार्यों का निर्वहन कर कार्यालय से घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान मार्ग में उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि उन्हें गंभीर चोटें आईं । भागीरथ पटेल लंबे समय से मनरेगा योजना के अंतर्गत अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी के रूप ...

सरकारी भर्तियाँ, परीक्षा शुल्क और बेरोजगार युवाओं का सवाल क्या वाकई रिफंड होना चाहिए

 सरकारी भर्तियाँ, परीक्षा शुल्क और बेरोजगार युवाओं का सवाल क्या वाकई रिफंड होना चाहिए कटनी  |  देश में हर साल लाखों-करोड़ों युवा सरकारी नौकरी के सपने के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करते हैं। आवेदन के साथ उनसे परीक्षा शुल्क लिया जाता है। कई बार यह शुल्क सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 500 से 1500 रुपये या उससे अधिक तक होता है। जब करोड़ों आवेदन आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि यदि अंततः कुछ हज़ार या कुछ सौ पद ही भरे जाने हैं, तो शेष अभ्यर्थियों से लिया गया पैसा कहाँ जाता है क्या सरकार बेरोजगार युवाओं से फीस लेकर अपना खर्च चला रही है और यदि नौकरी नहीं मिलती, तो क्या परीक्षा शुल्क वापस किया जाना चाहिए यह प्रश्न भावनात्मक भी है और तार्किक भी। इसे समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि सरकारी परीक्षाओं का संचालन कैसे होता है और परीक्षा शुल्क का उपयोग किन कार्यों में किया जाता है। भारत में केंद्रीय स्तर पर परीक्षाएँ आयोजित करने वाली प्रमुख संस्थाओं में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) शामिल हैं। इसी प्रकार राज्य स्तर पर विभिन्न ...