खरी-अखरी(सवाल उठाते हैं पालकी नहीं) पत्रकारिता दोधारी तलवार है जिस पर चलने के लिए नट जैसा संतुलन चाहिए ऐसा रेजिग्नेशन तो मुख्यमंत्री मोहन यादव का होना चाहिए
खरी-अखरी(सवाल उठाते हैं पालकी नहीं) पत्रकारिता दोधारी तलवार है जिस पर चलने के लिए नट जैसा संतुलन चाहिए ऐसा रेजिग्नेशन तो मुख्यमंत्री मोहन यादव का होना चाहिए एक डायरी-पेन, गले में आईडी और हाथ में माइक लेकर, अधिकारियों के आगे-पीछे घूमने, पुलिस कर्मियों के गले में हाथ डाल कर चलने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता है। पत्रकारिता दोधारी तलवार पर चलने जैसा है जिसमें एक नट जैसा संतुलन जरूरी है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि सामने वाले से कौन सा सवाल पूछना है, महत्वपूर्ण यह है कि कौन सा सवाल नहीं पूछना है। वर्ना ऐसा ही होता है जैसा बालाघाट में हुआ। तथाकथित पत्रकारों ने सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके के मुंह में माइक घुसेड़ सवाल पूछकर उसे मध्य प्रदेश का सीएम बना दिया और दीपके ने प्रदेश के राज्यपाल को सीएम पद से इस्तीफा भेज दिया। To, The Hon'ble Governor of Madhya Pradesh, Raj Bhavan, Bhopal, Respected Sir, I hereby tender my resignation from the office of the Chief Minister of Madhya Pradesh. My conscience does not allow me to continue occupying this chair after the deaths of more than 30 Tribal children...