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जहां हर मिनट उफनता था 25 हजार लीटर पानी, जानें कैसे बनी वो टनल, सीएम डॉ. यादव ने करीब से देखा ड्रीम प्रोजेक्ट, सीएम डॉ. मोहन ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार, जानें कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना कर बनी स्लीमनाबाद टनल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण, 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई, इंजीनियरिंग के चमत्कार से बदल जाएगी विंध्य - महाकौशल की तकदीर, 100 साल तक जैसी बनी है वैसी रहेगी टनल, भूकंप का नहीं होगा असर

 जहां हर मिनट उफनता था 25 हजार लीटर पानी, जानें कैसे बनी वो टनल, सीएम डॉ. यादव ने करीब से देखा ड्रीम प्रोजेक्ट, सीएम डॉ. मोहन ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार, जानें कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना कर बनी स्लीमनाबाद टनल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण, 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई, इंजीनियरिंग के चमत्कार से बदल जाएगी विंध्य - महाकौशल की तकदीर, 100 साल तक जैसी बनी है वैसी रहेगी टनल, भूकंप का नहीं होगा असर कटनी ।  मध्यप्रदेश का इंजीनियरिंग मार्वल यानी चमत्कार 'स्लीमनाबाद टनल' करीब-करीब तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को कटनी जिले में इसका निरीक्षण किया। यह टनल सीएम डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस तरह पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की खेती की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाएगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया। वर्ष 201...

मुरवारी में शासकीय भूमि और तालाब पर अतिक्रमण का गहराता विवाद, समाजसेवी अशोक पाण्डेय की आंदोलन की चेतावनी और ग्रामीण विकास के समक्ष चुनौतियाँ

 मुरवारी में शासकीय भूमि और तालाब पर अतिक्रमण का गहराता विवाद, समाजसेवी अशोक पाण्डेय की आंदोलन की चेतावनी और ग्रामीण विकास के समक्ष चुनौतियाँ कटनी  |  मध्यप्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मुरवारी से एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय समाजसेवी अशोक पाण्डेय ने ग्राम पंचायत मुरवारी में सरकारी तालाब, मुक्तिधाम परिसर और पंचायत की बेशकीमती भूमि पर रसूखदारों द्वारा किए गए कथित अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, क्षेत्रीय सांसद, स्थानीय विधायक, एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस प्रशासन सहित पंचायत के जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में लिखित शिकायत भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। अशोक पाण्डेय का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस अतिक्रमण को नहीं हटाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करने को विवश होंगे। यह मामला न केवल एक गांव के पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाने का है, बल्कि यह प्रशासनिक शिथिलता और सरकारी आदेशों की अवहेलना...

क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह की मौजूदगी में उमरियापान मंडी में मूंग-उड़द की शासकीय खरीदी शुरू, किसानों के खिले चेहरे

 क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह की मौजूदगी में उमरियापान मंडी में मूंग-उड़द की शासकीय खरीदी शुरू, किसानों के खिले चेहरे ढीमरखेड़ा ।  क्षेत्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उमरियापान स्थित शासकीय खरीदी केंद्र में ग्रीष्मकालीन फसल मूंग एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर शासकीय खरीदी का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह की उपस्थिति में किया गया। खरीदी प्रारंभ होते ही किसानों में उत्साह का माहौल देखने को मिला और उन्होंने सरकार की इस पहल का स्वागत किया । शुभारंभ कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनीता दुबे, जिला पंचायत सदस्य प्रिया सिंह, विजय दुबे सहित जनप्रतिनिधि, संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने खरीदी केंद्र का निरीक्षण कर किसानों से चर्चा की तथा उन्हें खरीदी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था के साथ संचालित की जाएगी, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने ...

आदेश के बाद भी ढीमरखेड़ा में क्यों नहीं खुल रही आईटीआई? युवाओं के भविष्य से कौन कर रहा खिलवाड़, पोड़ी खुर्द में पूर्व से भूमि आवंटित, अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटन की तैयारी पर उठे सवाल

 आदेश के बाद भी ढीमरखेड़ा में क्यों नहीं खुल रही आईटीआई? युवाओं के भविष्य से कौन कर रहा खिलवाड़, पोड़ी खुर्द में पूर्व से भूमि आवंटित, अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटन की तैयारी पर उठे सवाल ढीमरखेड़ा । शासन द्वारा स्वीकृत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के संचालन को लेकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि शासन स्तर पर आईटीआई की स्वीकृति और आवश्यक निर्देश जारी होने के बावजूद आज तक संस्थान का संचालन ढीमरखेड़ा मुख्यालय में शुरू नहीं किया गया। वहीं, यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पोड़ी खुर्द में पहले से भूमि आवंटित होने के बावजूद अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटित कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पूर्व में भूमि उपलब्ध और शासन के निर्देश स्पष्ट हैं, तो दोबारा भूमि आवंटन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? क्या यह प्रक्रिया नियमानुसार है या फिर किसी अन्य उद्देश्य से अपनाई जा रही है? इन सवालों के बीच युवाओं में नाराजगी लगातार बढ़ र...

देवरी बिछिया के लाल लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने जबलपुर में गाड़े सफलता के झंडे, शिक्षक के बेटे ने कड़े संघर्ष से खड़ा किया करोड़ों का प्रिंटिंग साम्राज्य चुनौतियों को मात देकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र का नाम किया रोशन, सामाजिक सरोकारों और राजनीति में भी हैं बेहद सक्रिय

 देवरी बिछिया के लाल लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने जबलपुर में गाड़े सफलता के झंडे, शिक्षक के बेटे ने कड़े संघर्ष से खड़ा किया करोड़ों का प्रिंटिंग साम्राज्य चुनौतियों को मात देकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र का नाम किया रोशन, सामाजिक सरोकारों और राजनीति में भी हैं बेहद सक्रिय ढीमरखेड़ा |  कहते हैं कि इंसान की पहचान उसकी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके हौसलों और हुनर से होती है। अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो एक छोटे से गांव की गलियों से निकलकर महानगरों के व्यावसायिक क्षितिज पर चमकना नामुमकिन नहीं रह जाता। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवरी बिछिया के मूल निवासी लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने। एक साधारण शिक्षक के परिवार में जन्मे लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने अपनी लगन, कड़ी मेहनत और अद्भुत व्यावसायिक सूझबूझ के बल पर आज जबलपुर जैसे बड़े शहर में करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनों के साथ एक बहुत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य स्थापित कर लिया है।आज वे बुक, कॉपी-किताबों और अत्याधुनिक बैनर प्रिंटिंग के क्षेत्र में एक बड़ा और जाना-माना नाम बन चुके हैं। *प...

स्लीमनाबाद में लोकायुक्त का बड़ा ऐक्शन, निजी दफ्तर में 5 हजार की घूस लेते पटवारी रंगे हाथ गिरफ्तार, कार्रवाई के बाद भी प्रशासन की मेहरबानी पर उठे सवाल, अभी भी कर रहा हैं पटवारी नौकरी नहीं हुई निलंबन की कार्यवाही

 स्लीमनाबाद में लोकायुक्त का बड़ा ऐक्शन, निजी दफ्तर में 5 हजार की घूस लेते पटवारी रंगे हाथ गिरफ्तार, कार्रवाई के बाद भी प्रशासन की मेहरबानी पर उठे सवाल, अभी भी कर रहा हैं पटवारी नौकरी नहीं हुई निलंबन की कार्यवाही  कटनी |  भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बातें कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं।ताजा मामला जबलपुर लोकायुक्त टीम की कार्रवाई से सामने आया है, जहां कटनी जिले के बहोरीबंद में पदस्थ एक पटवारी को लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोचा है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जो प्रशासनिक सुस्ती देखने को मिल रही है, उसने सरकार और स्थानीय प्रशासन की नियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक, लोकायुक्त या किसी भी भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी द्वारा रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद शासकीय सेवक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में आरोपी पटवारी पर गाज गिरना तो दूर, प्रशासन उस पर मेहरबान नजर आ रहा है। *सीमांकन के बदले मांगी थी 'उपहार' में घूस* पूरा मामला कटनी जिले के स्लीमनाबाद तहसील का है।आवेदक शिवकुमार जायसवाल ने कुछ समय पहले अपनी पत...

खेत तालाब निर्माण में अनियमितता के आरोप, मजदूरी और सामग्री भुगतान पर उठे सवाल, ग्राम पंचायत बरतरा का मामला मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बिलिंग की आशंका, ग्रामीणों ने की जांच की मांग

 खेत तालाब निर्माण में अनियमितता के आरोप, मजदूरी और सामग्री भुगतान पर उठे सवाल, ग्राम पंचायत बरतरा का मामला मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बिलिंग की आशंका, ग्रामीणों ने की जांच की मांग कटनी । जनपद पंचायत बहोरीबंद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरतरा इन दिनों महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कराए गए कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विवादों में है। ग्राम पंचायत में स्वीकृत खेत तालाब निर्माण कार्यों में हुए भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि धरातल पर मजदूरों को रोजगार देने के बजाय कागजों पर सामग्री मद में भारी-भरकम भुगतान दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग की ओर इशारा करता है। *मजदूरी कम, सामग्री का खर्च ज्यादा* जानकारी के मुताबिक, मनरेगा के नियमों को दरकिनार कर ऐसे कार्यों में सामग्री का खर्च बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है जहां उसकी नाममात्र की आवश्यकता थी। हितग्राही ज्ञान सिंह गोड के नाम पर दर्ज खेत तालाब निर्माण कार्य में मजदूरी मद में 1,04,674 रुपये तथा सामग्री मद में...