सफलता मांगने से नहीं प्रयास करने से मिलती हैं, धन तो संसार में बहुत से लोग छोड़ जाते हैं लेकिन नाम बिरले ही छोड़ते हैं, एक समय मे एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उस काम मे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ तभी सफलता मिलेगी, कर्मयोग और संकल्प से रचित अमूर्त धरोहर, सफलता के उन सिद्धांतों की कहानी जो केवल इतिहास नहीं, भविष्य गढ़ते हैं
सफलता मांगने से नहीं प्रयास करने से मिलती हैं, धन तो संसार में बहुत से लोग छोड़ जाते हैं लेकिन नाम बिरले ही छोड़ते हैं, एक समय मे एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उस काम मे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ तभी सफलता मिलेगी, कर्मयोग और संकल्प से रचित अमूर्त धरोहर, सफलता के उन सिद्धांतों की कहानी जो केवल इतिहास नहीं, भविष्य गढ़ते हैं कटनी | आज के इस तीव्रगामी दौर में जहाँ सफलता को तात्कालिक प्रसिद्धि, संपत्ति या सोशल मीडिया के आंकड़ों से मापा जाता है, वहाँ एक मूलभूत सत्य अक्सर ओझल हो जाता है सफलता किसी याचना, संयोग या मांगने का परिणाम नहीं, बल्कि निरंतर और निस्वार्थ प्रयास की निष्पत्ति है। इतिहास गवाह है कि इस संसार में करोड़ों लोग आए, उन्होंने अकूत धन-संपदा अर्जित की, और अंततः शांत होकर चले गए। किंतु काल के कपाल पर अपना नाम केवल वही ‘बिरले’ अंकित कर पाते हैं, जो धन से परे विचार, मूल्य और निष्ठा की विरासत छोड़ जाते हैं। स्वामी विवेकानंद का वह अमर संदेश एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो, बाकी सब भूल जाओ आज भी हर उस व्यक्ति के लिए एकमात...