ढीमरखेड़ा में नेता नहीं, नौकरशाहों के दलाल सक्रिय हैं ढीमरखेड़ा को नेता चाहिए, नौकरशाहों के दलाल नहीं
ढीमरखेड़ा में नेता नहीं, नौकरशाहों के दलाल सक्रिय हैं ढीमरखेड़ा को नेता चाहिए, नौकरशाहों के दलाल नहीं कटनी | ढीमरखेड़ा क्षेत्र आज एक अजीब विडंबना का शिकार है। यहां जनता है, समस्याएं हैं, योजनाएं हैं, बजट है लेकिन अगर कुछ नहीं है तो वो है सच्चा नेतृत्व। और जब नेतृत्व गायब हो जाता है, तो भ्रष्टाचार अपने आप राजा बन जाता है।आज हालत यह है कि क्षेत्र में कोई भी ऐसा नेता नजर नहीं आता जो जनता की आवाज बन सके। जो नेता हैं, वे जनता के नहीं, बल्कि अधिकारियों के दरबार में हाजिरी लगाने वाले स्थायी मेहमान बन चुके हैं। सुबह से शाम तक जनता की समस्याएं सुनने की बजाय, ये जनप्रतिनिधि बाबुओं के चैंबर में जी सर, बिल्कुल सर का रियाज़ करते नजर आते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर यह कैसी समाजसेवा है? क्या समाजसेवा का मतलब सिर्फ अधिकारियों की चापलूसी करना रह गया है क्या जनता ने इन्हें इसलिए चुना था कि ये उनके हक की लड़ाई लड़ने के बजाय अपनी “फाइलें पास” कराने में व्यस्त रहें ढीमरखेड़ा में भ्रष्टाचार अब कोई मुद्दा नहीं, बल्कि “सिस्टम” बन चुका है। राशन से लेकर सड़क तक, हर योजना में गड़बड़ी की चर्चा आ...