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स्थानांतरण का आदेश बेअसर ढीमरखेड़ा में 'अंगद' बने सब-इंजीनियर प्रदीप यादव, ट्रांसफर के बाद भी खमतरा सेक्टर में डटे प्रदीप यादव, फाइलों पर 'कुंडली' मारकर विकास का गला घोंटा, रीठी का रास्ता कर रहा इंतजार, ईओडब्ल्यू और विजलेंस में शिकायत की तैयारी

 स्थानांतरण का आदेश बेअसर ढीमरखेड़ा में 'अंगद' बने सब-इंजीनियर प्रदीप यादव, ट्रांसफर के बाद भी खमतरा सेक्टर में डटे प्रदीप यादव, फाइलों पर 'कुंडली' मारकर विकास का गला घोंटा, रीठी का रास्ता कर रहा इंतजार, ईओडब्ल्यू और विजलेंस में शिकायत की तैयारी  ढीमरखेड़ा |  जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के खमतरा सेक्टर में प्रशासनिक नियमों और निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का एक संगीन मामला सामने आया है। सेक्टर में पदस्थ उपयंत्री (सब-इंजीनियर) प्रदीप यादव का प्रशासनिक स्थानांतरण होने के महीनों बीत जाने के बाद भी वे अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद उनका मोह समाप्त नहीं हो रहा है और वे अंगद के पैर की तरह उसी पद पर जमे हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि उच्च अधिकारियों के स्पष्ट आदेशों के बाद भी आखिर उपयंत्री को किस राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का बल मिला हुआ है, जिससे वे नियमों की खुलकर अवहेलना कर रहे हैं। *सरपंचों ने लगाया आरोप एमबी रोककर किया जा रहा हैं कार्य* खमतरा सेक्टर की विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की स्थिति...

सफेद कपड़े, काले सवाल क्या नेताओं के लिए जनता सिर्फ वोट रह गई है नेताओं के सफेद कपड़ों पर काला सवाल क्या जनता उनके लिए मर गई है

 सफेद कपड़े, काले सवाल क्या नेताओं के लिए जनता सिर्फ वोट रह गई है नेताओं के सफेद कपड़ों पर काला सवाल क्या जनता उनके लिए मर गई है कटनी ।  राजनीति में सफेद कपड़े लंबे समय से सादगी, शुचिता और जनसेवा की पहचान माने जाते रहे हैं।लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में यही सफेद लिबास कई बार जनता के बीच तीखे सवाल भी खड़े कर देता है।चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने वाले नेता जब जीत के बाद उन्हीं लोगों की समस्याओं से दूरी बनाने लगते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर राजनीति में जनता की भूमिका क्या केवल वोट देने तक सीमित रह गई है गांवों और कस्बों में सड़क, पानी, बिजली, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दल जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, आश्वासन देते हैं और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद कई बार वही समस्याएं वर्षों तक जस की तस बनी रहती हैं। *सफेद कपड़ों के पीछे छिपे सवाल* नेताओं का सफेद पहनावा अपने आप में कोई गलत बात नहीं है। सव...

सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत

 सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत    कटनी ।  मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बहोरीबंद विकासखंड में संचालित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम स्लीमनाबाद स्थित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते क्रमांक 3790886493 से विभिन्न व्यक्तियों/अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन की जांच की मांग की है और तौफिक अहमद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आजीविका गतिविधियों के लिए उछऋ को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में लगभग 18.24 लाख के कथित ट्रांसफर का उल्लेख है। इसके अलावा एक अन्य बिंदु में उछऋ खाते से लगभग 1.15 करोड़ से अधिक राशि ट्...

राशन दुकानों में खाद्यान्न घोटाला, छतरपुर कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कटनी के ढीमरखेड़ा में सुलग रहे सवाल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन की जवाबदेही पर जनता ने उठाए सवाल, सही तरीके से नहीं की गई निगरानी इसलिए हुआ घोटाला

 राशन दुकानों में खाद्यान्न घोटाला, छतरपुर कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कटनी के ढीमरखेड़ा में सुलग रहे सवाल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन की जवाबदेही पर जनता ने उठाए सवाल, सही तरीके से नहीं की गई निगरानी इसलिए हुआ घोटाला  कटनी  |  मध्य प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) से गरीबों के हक का खाद्यान्न गायब होना एक बेहद गंभीर समस्या बन चुका है। हाल ही में छतरपुर कलेक्टर द्वारा राशन वितरण और उचित मूल्य दुकानों के संचालन में लापरवाही बरतने वाले कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों (JSO - Junior Supplies Officer) के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। छतरपुर कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी राशन दुकान पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र का JSO जिम्मेदार होगा। इस सख्त आदेश के बाद अब पड़ोसी जिलों में भी राशन निगरानी व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेष रूप से कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड में शासकीय उचित मूल्य दुकानों में लगातार सामने आ रहे खाद्यान्न घपलों ने प्रशासन...

सेवा संकल्प यात्रा' पर विपक्ष का तीखा वार कहा जनता की गाढ़ी कमाई पर हो रहा सियासी तमाशा चुनावी स्टंट या समाज सेवा सेवा संकल्प यात्रा' पर विपक्ष ने घेरा, कहा खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' जैसी है सत्तापक्ष की हालत विपक्ष का बड़ा दावा, वाराणसी से वड़नगर तक 'सेवा' नहीं, आगामी चुनावों के लिए बिछाई जा रही है सियासी बिसात दिखावे की राजनीति' पर विपक्ष का कड़ा ऐतराज, बोले जमीनी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए निकाला जा रहा 'संकल्प मार्च' मुद्दों से 'नौ दो ग्यारह' होने के लिए हो रही यात्राएं विपक्ष ने 'सेवा संकल्प' को बताया छलावा

 सेवा संकल्प यात्रा' पर विपक्ष का तीखा वार कहा जनता की गाढ़ी कमाई पर हो रहा सियासी तमाशा चुनावी स्टंट या समाज सेवा सेवा संकल्प यात्रा' पर विपक्ष ने घेरा, कहा खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' जैसी है सत्तापक्ष की हालत विपक्ष का बड़ा दावा, वाराणसी से वड़नगर तक 'सेवा' नहीं, आगामी चुनावों के लिए बिछाई जा रही है सियासी बिसात दिखावे की राजनीति' पर विपक्ष का कड़ा ऐतराज, बोले जमीनी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए निकाला जा रहा 'संकल्प मार्च' मुद्दों से 'नौ दो ग्यारह' होने के लिए हो रही यात्राएं विपक्ष ने 'सेवा संकल्प' को बताया छलावा कटनी |  देश के राजनीतिक पटल पर चल रही 'सेवा संकल्प यात्रा' इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के गौरवमयी 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में और उनके 76वें जन्मवर्ष के अवसर पर शुरू की गई इस यात्रा ने राजनीति की पारंपरिक परिभाषा को बदलकर रख दिया है। वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक युवाओं की यह टोली केवल दूरी नहीं नाप रही, बल्कि समाज में 'सेवा परमो धर्म:' के सं...

बिचुआ में बीएसएनएल नहर जैसी खुदाई से बढ़ा हादसों का खतरा, ग्रामीणों में नाराजगी, जिम्मेदारों से सुरक्षा इंतजाम और सुधार की मांग

 बिचुआ में बीएसएनएल नहर जैसी खुदाई से बढ़ा हादसों का खतरा, ग्रामीणों में नाराजगी, जिम्मेदारों से सुरक्षा इंतजाम और सुधार की मांग ढीमरखेड़ा ।  ग्राम पंचायत बिचुआ क्षेत्र में बीएसएनएल के कार्य के दौरान सड़क किनारे नहर जैसी गहरी खुदाई किए जाने से ग्रामीणों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि खुदाई के बाद मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिसके कारण आए दिन हादसे होने की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार बीएसएनएल केबल आदि कार्य के लिए सड़क किनारे लंबी और गहरी खुदाई की गई है। कई स्थानों पर खुदाई खुली पड़ी होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हो रही है। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि खुदाई वाले स्थानों पर पर्याप्त संकेतक, बैरिकेडिंग या प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को खतरे का अंदेशा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आने-जाने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी इन गड्ढों के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामी...

बात अगर आत्मसम्मान की हो तो में कुछ इस तरह का हूं बहुत कुछ छोड़ आया हूं और बहुत कुछ छोड़ भी सकता हूं, इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं , अपनों के अपनों पर यहां इल्ज़ाम बहुत हैं, शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं लगता हैं उम्र कम हैं और इम्तिहान बहुत हैं, आत्मसम्मान सर्वोपरि ज़िंदगी की धूप-छांव और रिश्तों की पेचीदगियों के बीच स्वाभिमान की अनोखी मिसाल

 बात अगर आत्मसम्मान की हो तो में कुछ इस तरह का हूं बहुत कुछ छोड़ आया हूं और बहुत कुछ छोड़ भी सकता हूं, इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं , अपनों के अपनों पर यहां इल्ज़ाम बहुत हैं, शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं लगता हैं उम्र कम हैं और इम्तिहान बहुत हैं, आत्मसम्मान सर्वोपरि ज़िंदगी की धूप-छांव और रिश्तों की पेचीदगियों के बीच स्वाभिमान की अनोखी मिसाल ढीमरखेड़ा |  अनदेखी डगर आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं' इस एक जीवन-मूल्य को अपना ध्येय बनाकर चलने वाले लोगों के लिए ज़िंदगी का सफर आसान नहीं होता। हाल ही में रिश्तों, सामाजिक सरोकारों और व्यक्तिगत सिद्धांतों के मोड़ पर एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई है कि जब बात स्वाभिमान की आती है, तो कुछ लोग अपनी बनी-बनाई राहें और सहूलियतें भी पल भर में छोड़ने में संकोच नहीं करते। *इल्ज़ामों और शिकायतों का दौर* ज़िंदगी की इस आपाधापी में थकान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक भी है। सबसे गहरा दुख तब देखने को मिलता है जब 'अपनों पर अपनों के ही इल्ज़ाम' लगने लगते हैं। रिश्तों में बढ़ती दूरियां और हर मोड़ पर एक-दूसरे से होत...