संसार में बड़ा वो नहीं होता जिसे सामने वाला बड़ा महसूस करे, बड़ा तो वो होता है जो सामने वाले को छोटा महसूस ना होने दे, बड़े पेड़ की छांव में कभी भी छोटे पेड़ बड़े नहीं बन सकते हैं उनकी प्रतिभा का केवल उपयोग करके फायदा उठाया जायेगा
संसार में बड़ा वो नहीं होता जिसे सामने वाला बड़ा महसूस करे, बड़ा तो वो होता है जो सामने वाले को छोटा महसूस ना होने दे, बड़े पेड़ की छांव में कभी भी छोटे पेड़ बड़े नहीं बन सकते हैं उनकी प्रतिभा का केवल उपयोग करके फायदा उठाया जायेगा कटनी | संसार में महानता की परिभाषा क्या है? क्या किसी का बड़ा होना उसके पद, संपत्ति, अधिकार या समाज द्वारा दी गई मान्यता से तय होता है? यह एक ऐसा विचारणीय प्रश्न है जो हर युग में प्रासंगिक रहा है।समाजशास्त्रीय और नैतिक दृष्टिकोण से देखें तो संसार में बड़ा वह व्यक्ति या नेतृत्व नहीं होता जिसे सामने वाला बड़ा महसूस करे या जो अपने अधिकार से दूसरों को दबाए।वास्तविक अर्थों में बड़ा तो वह है, जो अपने संपर्क में आने वाले हर छोटे से छोटे व्यक्ति को कभी भी 'छोटा' होने का अहसास न होने दे।इसी संदर्भ में एक और गहरा प्रतीक इस्तेमाल किया जाता है बड़े पेड़ की छांव का। बरगद या किसी भी विशाल वृक्ष के नीचे उगे छोटे पौधे अक्सर धूप और पोषण के अभाव में पनप नहीं पाते।अगर उनका सही प्रबंधन न हो, तो उनकी प्रतिभा का केवल इस्तेमाल होता है और उनकी अपनी पहचान हमेशा के...