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कैमरे चालान में तेज हैं, लेकिन सड़क की सच्चाई देखने में कमजोर, कैमरे की नजर सीट बेल्ट पर तेज, लेकिन सड़क के गड्ढों पर अंधी

 कैमरे चालान में तेज हैं, लेकिन सड़क की सच्चाई देखने में कमजोर, कैमरे की नजर सीट बेल्ट पर तेज, लेकिन सड़क के गड्ढों पर अंधी



कटनी  |  शहर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक कैमरों का खौफ साफ दिखाई दे रहा है।सीट बेल्ट न लगाया, हेलमेट नहीं पहना तो सेकंडों में चालान आपके मोबाइल पर हाज़िर।तकनीक की यह तेजी काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही तेजी सड़क के गड्ढों को देखने में भी दिखाई देती है, हकीकत यह है कि जहां कैमरे नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं सड़क पर फैले खतरनाक गड्ढे जैसे सिस्टम की नजर से गायब हैं। इन गड्ढों के कारण रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं, लोग घायल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “सरकार को हमारी सुरक्षा की चिंता होती तो पहले सड़कें दुरुस्त कराती, फिर चालान काटती। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नियम केवल जनता के लिए हैं? सड़क निर्माण और रखरखाव में लापरवाही पर कोई चालान क्यों नहीं, सड़क सुरक्षा केवल हेलमेट और सीट बेल्ट तक सीमित नहीं है। अच्छी सड़कें, सही संकेत और गड्ढामुक्त रास्ते भी उतने ही जरूरी हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा लगता है कि सिस्टम को केवल राजस्व वसूली से मतलब है, सुरक्षा से नहीं।

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