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पाँच माह से बिना वेतन काम कर रहे रोजगार सहायक व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल

 पाँच माह से बिना वेतन काम कर रहे रोजगार सहायक व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल



कटनी  |  ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले रोजगार सहायकों की स्थिति एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायकों द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ज्ञापन के अनुसार, दिनांक 29 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय रोजगार सहायकों ने मजबूरी में लिया है। कारण स्पष्ट है पिछले लगभग पाँच महीनों से उन्हें वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। विडंबना यह है कि ये वही कर्मचारी हैं जो निरंतर शासन की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करते हैं, लेकिन उनकी अपनी आजीविका ही संकट में है।रोजगार सहायकों का कहना है कि वे लगातार काम करते हुए भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कई बार बैठकों में मुद्दा उठाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सामूहिक अवकाश ही उनका अंतिम विकल्प बचा है, ताकि प्रशासन उनकी पीड़ा को गंभीरता से ले। यह मामला केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का भी परीक्षण है।जब जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को ही समय पर उनका पारिश्रमिक नहीं मिलता, तो योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकाला गया, तो रोजगार सहायकों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह स्थिति न केवल विकास कार्यों को प्रभावित करेगी, बल्कि ग्रामीण जनता को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यह आवश्यक है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान लेते हुए लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित करे और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए ठोस व्यवस्था विकसित करे।अन्यथा, यह असंतोष व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं होगा।

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