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आदतन अपराधी को संरक्षण बाकल पिपरिया के सरपंच पर उठे सवाल, कांग्रेस पर लगे गंभीर आरोप

 आदतन अपराधी को संरक्षण बाकल पिपरिया के सरपंच पर उठे सवाल, कांग्रेस पर लगे गंभीर आरोप



कटनी |  कटनी जिले के बाकल पिपरिया ग्राम में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। गांव के सरपंच राजेश पटेल उर्फ पिल्लू को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों और विरोधी पक्ष का कहना है कि सरपंच पर पहले से ही कई आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, राजेश पटेल उर्फ पिल्लू को “आदतन अपराधी” बताया जा रहा है। आरोप है कि उनके खिलाफ पहले भी कई शिकायतें और मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन हर बार राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई अधूरी रह जाती है। अब जब वे सरपंच पद पर हैं, तो लोगों में यह आशंका और बढ़ गई है कि कहीं सत्ता का दुरुपयोग न हो। सबसे बड़ा आरोप कांग्रेस पार्टी पर लग रहा है। विरोधी गुट का कहना है कि कांग्रेस ऐसे व्यक्ति को संरक्षण दे रही है जिसकी छवि पहले से ही विवादों में रही है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आदतन अपराधों में लिप्त रहा है, तो उसे जनप्रतिनिधि बनाना और फिर उसे राजनीतिक समर्थन देना लोकतंत्र के लिए खतरा हो सकता है। अब जब वही व्यक्ति सरपंच बन गया है, तो हमें डर है कि हमारी आवाज और दब जाएगी। वहीं दूसरी ओर, सरपंच के समर्थकों का कहना है कि यह सब राजनीतिक द्वेष के चलते फैलाया जा रहा है।उनका दावा है कि राजेश पटेल पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनकी लोकप्रियता से घबराकर विरोधी इस तरह की बातें फैला रहे हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अभी तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जांच या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि आरोपों में सच्चाई है, तो निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि किसी जनप्रतिनिधि पर आपराधिक छवि के आरोप लगते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित राजनीतिक दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं क्या आरोपों की जांच होगी या मामला राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा।फिलहाल, बाकल पिपरिया में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है और ग्रामीण सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

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