बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब सरपंच पुत्र चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग
बाकल पिपरिया में सरपंच पति नहीं, अब सरपंच पुत्र चला रहा पंचायत नियमों की खुली अनदेखी, कार्रवाई की उठी मांग
कटनी । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकल पिपरिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहां की निर्वाचित सरपंच पान बाई के नाम पर पंचायत का संचालन होने के बजाय उनके पुत्र राजेश पटेल उर्फ पिल्लू द्वारा कथित रूप से सभी निर्णय लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के कामकाज में नियमों को दरकिनार कर प्रॉक्सी सिस्टम चलाया जा रहा है, जो न केवल पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है बल्कि कानून का भी उल्लंघन है।
*सरपंच के अधिकारों का कथित दुरुपयोग*
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत बैठकों से लेकर निर्माण कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और योजनाओं के क्रियान्वयन तक अधिकांश फैसले सरपंच के बजाय उनके पुत्र द्वारा किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति “सरपंच पति” मॉडल से भी आगे बढ़कर अब “सरपंच पुत्र” मॉडल में बदल गई है, जहां वास्तविक जनप्रतिनिधि की भूमिका सीमित कर दी गई है।
*कानून क्या कहता है*
पंचायती राज व्यवस्था में स्पष्ट प्रावधान हैं कि निर्वाचित सरपंच ही पंचायत के प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेने के लिए अधिकृत होता है। किसी भी गैर-निर्वाचित व्यक्ति द्वारा इन अधिकारों का उपयोग करना अवैध माना जाता है।
*इस मामले में निम्न कानूनी धाराएं लागू हो सकती हैं*
मध्यप्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993
धारा 40: कर्तव्यों के उल्लंघन या पद के दुरुपयोग पर सरपंच के विरुद्ध कार्रवाई (निलंबन/पद से हटाने तक)।
धारा 92: वित्तीय अनियमितताओं एवं गबन के मामलों में वसूली और दंडात्मक कार्रवाई।
भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 409: लोकसेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग (Criminal Breach of Trust)
धारा 420: धोखाधड़ी
धारा 467/468/471: फर्जी दस्तावेज बनाना एवं उपयोग करना
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
यदि वित्तीय लाभ या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो इस अधिनियम के तहत भी कार्रवाई संभव है।
*ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग तेज*
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि पंचायत का संचालन इसी तरह गैर-निर्वाचित व्यक्ति के हाथों में रहा तो पारदर्शिता और जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उन्होंने जनपद पंचायत, जिला पंचायत और कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे संबंधित लोगों के हौसले बुलंद हैं।
*प्रशासन की भूमिका पर सवाल*
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। यदि वास्तव में पंचायत का संचालन नियमों के विपरीत हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया?
*क्या हो सकती है कार्रवाई*
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सरपंच को निलंबित या पद से हटाया जा सकता है
वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर राशि की वसूली संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज भविष्य में ।
*चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी संभव*
बाकल पिपरिया का मामला पंचायती राज व्यवस्था की साख पर सीधा सवाल खड़ा करता है। यदि “सरपंच पुत्र” या कोई भी गैर-निर्वाचित व्यक्ति सत्ता का संचालन करता है, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें