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सचिव की पेंट का बेल्ट बना पुत्र अधिकारी के जैसे कर रहा कार्य, ग्राम पंचायत घुघरी,विकास की राह में गुटबाजी का रोड़ा, 4 साल गंवाकर भी बदहाली की मार झेल रही जनता 15 लाख रुपये के फर्जी आहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया सरपंच ने लगाया गंभीर आरोप, बिना जानकारी और फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई सरकारी राशि नियमों को ताक पर रखकर सचिव का पुत्र संभाल रहा पंचायत का कामकाज,ग्रामीणों में भारी रोष, एफआईआर (FIR) की उठी मांग

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15 लाख रुपये के फर्जी आहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया

सरपंच ने लगाया गंभीर आरोप, बिना जानकारी और फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई सरकारी राशि नियमों को ताक पर रखकर सचिव का पुत्र संभाल रहा पंचायत का कामकाज,ग्रामीणों में भारी रोष, एफआईआर (FIR) की उठी मांग



ढीमरखेड़ा | ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और लोकतंत्र की बुनियादी इकाई को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई पंचायती राज व्यवस्था ग्राम पंचायत घुघरी में दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थानीय पंचायती राजनीति में जारी गुटबाजी, प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्टाचार के मकड़जाल ने गांव के विकास को पूरी तरह से थाम दिया है। बीते 4 वर्षों में जहां अन्य पंचायतों ने विकास की नई इबारत लिखी, वहीं घुघरी पंचायत केवल समय बर्बादी, आपसी खींचतान और घोटालों का केंद्र बनी रही। आज स्थिति यह है कि गांव की मूल भूत सुविधाएं ध्वस्त हैं और भ्रष्टाचार का आलम यह है कि नियमों को ठेंगा दिखाकर पंचायत का काम सचिव का पुत्र संभाल रहा है।

*4 साल का लंबा इंतजार, लेकिन हाथ लगी केवल नाकामी*

ग्राम पंचायत घुघरी के पुनर्गठन और नए जनप्रतिनिधियों के चुनाव को बीते 4 वर्ष का समय हो चुका है। जब नए प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभाला था, तब ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब गांव की तस्वीर बदलेगी। मुख्य सड़कों से जोड़ने वाले रास्ते, पानी की समुचित व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पक्की नालियां और प्रधानमंत्री आवास योजना का पारदर्शी क्रियान्वयन जैसी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी होंगी।

लेकिन 4 वर्षों का यह लंबा कार्यकाल केवल वादों, कागजी दावों और राजनीतिक गुटबाजी की भेंट चढ़ गया। गांव के बुज़ुर्ग और युवा सभी इस बात से आहत हैं कि इन चार सालों में कोई भी बुनियादी विकास कार्य धरातल पर नहीं उतरा।गुटबाजी के चलते पंचायत बैठकों में केवल हंगामे हुए, जबकि विकास योजनाएं फाइलों में ही धूल फांकती रहीं।

*नियमों की धज्जियां सचिव की जगह पुत्र संभाल रहा सरकारी कामकाज*

ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा और चिंताजनक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि सरकारी पद पर आसीन सचिव की जगह उनका पुत्र पंचायत के तमाम शासकीय कार्यों का संचालन कर रहा है। शासकीय नियमों और पंचायती राज अधिनियम के अनुसार, पंचायत सचिव एक जिम्मेदारी से भरा प्रशासनिक पद है। पंचायत के दस्तावेजों का रखरखाव, वित्तीय लेन-देन की कागजी कार्रवाई और बैठकों का ब्यौरा तैयार करना केवल अधिकृत सचिव का ही दायित्व है। परंतु घुघरी ग्राम पंचायत में कानून और नियमों को दरकिनार कर सचिव के पुत्र द्वारा पंचायत के दैनिक कामकाज, कागजी प्रक्रियाओं और योजना क्रियान्वयन में सीधा हस्तक्षेप किया जा रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पंचायत कार्यालय में सचिव की उपस्थिति नाममात्र की रहती है, जबकि उनका पुत्र ही सारे सरकारी निर्णय ले रहा है और फाइलों का संचालन कर रहा है। इस अनधिकृत व्यवस्था ने न केवल प्रशासनिक शुचिता को समाप्त किया है, बल्कि वित्तीय गड़बड़ियों का रास्ता भी खोला है।

*15 लाख रुपये का गबन सरपंच को खबर तक नहीं, फर्जी हस्ताक्षर से हुआ आहरण*

पंचायत में जारी धांधली का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब उजागर हुआ जब 15 लाख रुपये की सरकारी राशि के आहरण का मामला सामने आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के लिए जारी किए गए 15 लाख रुपये की राशि बैंक खाते से निकाल ली गई, लेकिन इस विशाल राशि के निष्पादन की जानकारी पंचायत की प्रथम नागरिक यानी सरपंच को दी ही नहीं गई। सरपंच का आरोप है कि इस राशि के आहरण के लिए उनके फर्जी हस्ताक्षरों (जाली दस्तखत) का इस्तेमाल किया गया है।

*ग्रामीणों का अल्टीमेटम कार्रवाई न हुई तो होगा उग्र आंदोलन*

ग्राम पंचायत घुघरी के निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द भ्रष्ट अधिकारियों और उनके परिजनों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शांत नहीं बैठेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

4 साल की लंबी बर्बादी के बाद अब घुघरी की जनता न्याय और पारदर्शिता चाहती है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कब तक दोषियों पर नकेल कसता है और घुघरी को भ्रष्टाचार व गुटबाजी के इस अंधेरे से बाहर निकालता है।

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