कलम के साधक और संघर्ष के प्रतीक, सिहोरा के वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन के पत्रकारिता के 30 गौरवशाली वर्ष, बचपन के अभावों को हराकर चुनी ईमानदारी की राह, समाज सेवा में समर्पित जीवन, आज बच्चे वकील और इंजीनियर बनकर रोशन कर रहे हैं नाम
कलम के साधक और संघर्ष के प्रतीक, सिहोरा के वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन के पत्रकारिता के 30 गौरवशाली वर्ष, बचपन के अभावों को हराकर चुनी ईमानदारी की राह, समाज सेवा में समर्पित जीवन, आज बच्चे वकील और इंजीनियर बनकर रोशन कर रहे हैं नाम
जबलपुर | कहते हैं कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने और शोषितों की आवाज़ बनने का एक कठिन संकल्प है। इस संकल्प को पिछले तीन दशकों से अपने खून-पसीने से सींचने वाले सिहोरा निवासी अनिल जैन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले अनिल जैन ने अपने जीवन में केवल खबरें नहीं लिखीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद के लिए हमेशा अपने हाथ आगे बढ़ाए। बचपन से लेकर आज तक का उनका सफर संघर्ष, ईमानदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक ऐसी महागाथा है, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है।
*बचपन का संघर्ष अभावों के बीच तपी शख्सियत*
अनिल जैन जी का शुरुआती जीवन बेहद सरल लेकिन चुनौतियों से भरा रहा। बचपन में जब आम बच्चे सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं, तब अनिल जी ने जीवन की कड़वी सच्चाइयों और अभावों का सामना किया। पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन के इसी संघर्ष ने उनके भीतर एक ऐसी संवेदनशीलता को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर उन्हें पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही यह समझ लिया था कि समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा और सही आवाज़ का होना कितना ज़रूरी है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखना और खुद को समाज सेवा के योग्य बनाना, उनकी अडिग मानसिक चेतना को दर्शाता है।
*तीन दशक का पत्रकारिता सफर बेबाक कलम और जन-सरोकार*
विगत 30 वर्षों से सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों में अनिल जैन जी की कलम लगातार समाज की विसंगतियों पर प्रहार कर रही है। पत्रकारिता के इस लंबे सफर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे। प्रिंट मीडिया के पारंपरिक दौर से लेकर आज के डिजिटल युग तक, उन्होंने अपनी प्रासंगिकता को हमेशा बनाए रखा। उनकी रिपोर्टिंग की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने कभी भी सत्ता या प्रभाव के आगे घुटने नहीं टेके। क्षेत्र की जनसमस्याएं हों, प्रशासनिक भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करना हो, या फिर किसी गरीब को न्याय दिलाना हो अनिल जैन हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आए। सिहोरांचल के लोग गवाह हैं कि जब भी किसी आम नागरिक की कहीं सुनवाई नहीं होती, तो वे 'जैन साहब' के पास अपनी गुहार लेकर पहुंचते हैं। उनका 30 वर्षों का यह अनुभव आज हर पीड़ित व्यक्ति के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
*हर क्षेत्र में सराहनीय कार्य पत्रकारिता से परे सामाजिक सरोकार*
अनिल जैन केवल खबरों तक सीमित रहने वाले पत्रकार नहीं हैं। सिहोरा निवासी इस कर्मयोगी का कार्य हर क्षेत्र में सराहनीय रहा है। चाहे धार्मिक आयोजन हों, सामाजिक चेतना के कार्यक्रम हों, या फिर किसी असहाय परिवार की गुप्त रूप से आर्थिक मदद करनी हो, अनिल जी का योगदान हमेशा अग्रगण्य रहता है। कोरोना काल जैसी महाविपत्ति के समय भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल पत्रकारिता के धर्म का पालन किया, बल्कि जरूरतमंदों तक राशन और दवाइयां पहुंचाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। उनकी इसी सहृदयता के कारण आज उन्हें हर वर्ग का अपार स्नेह और सम्मान प्राप्त है।
*संस्कारों की जीत बच्चे कमा रहे हैं नाम, कोई वकील तो कोई इंजीनियर*
एक सफल पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ अनिल जैन जी ने एक पिता के रूप में भी समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों की छाया अपने बच्चों पर नहीं पड़ने दी, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा और बेहतरीन संस्कार दिए। आज उनकी इसी तपस्या का परिणाम है कि उनके बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन होकर परिवार और सिहोरा का नाम देश भर में रोशन कर रहे हैं। उनके बच्चों में कोई कानून की बारीकियों को समझकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए वकील (अधिवक्ता) के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, तो कोई आधुनिक तकनीक के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने वाला इंजीनियर बन चुका है। बच्चों की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि माता-पिता के संस्कार और नीयत साफ हो, तो अभावों के बीच भी देश के सर्वश्रेष्ठ नागरिक तैयार किए जा सकते हैं। आज जब लोग उनके बच्चों की सफलताओं की चर्चा करते हैं, तो सिहोरा के हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
*सादगी और विनम्रता: आज भी बने हैं जन-जन के मददगार*
इतनी प्रतिष्ठा, लंबा अनुभव और बच्चों की शानदार सफलता के बाद भी अनिल जैन जी के व्यवहार में रत्ती भर भी अहंकार नहीं आया है। वे आज भी उतने ही सहज, सुलभ और विनम्र हैं, जितने तीन दशक पहले थे। वे आज भी सिहोरा की गलियों में एक आम डायरी और पेन लेकर जनता की समस्याओं को सुनने निकल पड़ते हैं। उनके पास बैठने वाले नवागंतुक पत्रकारों को हमेशा उनसे कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है। वे नए पत्रकारों के लिए एक चलते-फिरते संस्थान की तरह हैं, जो हमेशा निष्पक्ष पत्रकारिता की सीख देते हैं।
*सिहोरा की जनता का गौरव हैं अनिल जैन*
अनिल जैन जी का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि "बड़प्पन पदों से नहीं, बल्कि आपके द्वारा किए गए कार्यों और दूसरों को दिए गए सम्मान से तय होता है।" बचपन के संघर्षों की भट्टी में तपकर सोना बने अनिल जैन ने सिहोरा को अपनी कर्मभूमि बनाकर जो सेवाएं दी हैं, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी निष्पक्ष लेखनी, हर व्यक्ति की मदद करने का जज्बा और उनके सुशिक्षित बच्चों की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। 'दैनिक ताजा खबर' और समूचा पत्रकार जगत उनके सुखद, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करता है, ताकि उनकी कलम और उनका मार्गदर्शन समाज को लगातार मिलता रहे।

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