स्थानांतरण का आदेश बेअसर ढीमरखेड़ा में 'अंगद' बने सब-इंजीनियर प्रदीप यादव, ट्रांसफर के बाद भी खमतरा सेक्टर में डटे प्रदीप यादव, फाइलों पर 'कुंडली' मारकर विकास का गला घोंटा, रीठी का रास्ता कर रहा इंतजार, ईओडब्ल्यू और विजलेंस में शिकायत की तैयारी
स्थानांतरण का आदेश बेअसर ढीमरखेड़ा में 'अंगद' बने सब-इंजीनियर प्रदीप यादव, ट्रांसफर के बाद भी खमतरा सेक्टर में डटे प्रदीप यादव, फाइलों पर 'कुंडली' मारकर विकास का गला घोंटा, रीठी का रास्ता कर रहा इंतजार, ईओडब्ल्यू और विजलेंस में शिकायत की तैयारी
ढीमरखेड़ा | जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के खमतरा सेक्टर में प्रशासनिक नियमों और निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का एक संगीन मामला सामने आया है। सेक्टर में पदस्थ उपयंत्री (सब-इंजीनियर) प्रदीप यादव का प्रशासनिक स्थानांतरण होने के महीनों बीत जाने के बाद भी वे अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद उनका मोह समाप्त नहीं हो रहा है और वे अंगद के पैर की तरह उसी पद पर जमे हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि उच्च अधिकारियों के स्पष्ट आदेशों के बाद भी आखिर उपयंत्री को किस राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का बल मिला हुआ है, जिससे वे नियमों की खुलकर अवहेलना कर रहे हैं।
*सरपंचों ने लगाया आरोप एमबी रोककर किया जा रहा हैं कार्य*
खमतरा सेक्टर की विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। पंचायतों में निर्माण कार्य कराने वाले सरपंचों, सचिवों और निर्माण एजेंसियों का आरोप है कि उपयंत्री प्रदीप यादव पंचायतों की मूल मूल्यांकन पुस्तिका को अपने पास दबाकर बैठे हैं। नियमतः विकास कार्य पूरा होने या उसकी किश्तों के मूल्यांकन के लिए एमबी समय पर दर्ज कर वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जानी चाहिए, ताकि पंचायतों को राशि का भुगतान हो सके।
हालांकि, आरोप है कि उपयंत्री द्वारा एमबी दर्ज करने और आगे बढ़ाने के नाम पर पंचायत प्रतिनिधियों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है। पंचायतों की एमबी रोककर सीधे तौर पर "ब्लैकमेलिंग" का काम चालू है। जो प्रतिनिधि उपयंत्री की अनुचित मांगों को पूरा नहीं करते, उनके निर्माण कार्यों की फाइलें अटका दी जाती हैं और मूल्यांकन रिपोर्ट में जानबूझकर तकनीकी खामियां निकालकर काम रोक दिया जाता है।
*प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना*
मध्य प्रदेश शासन के नियमों के अनुसार, जब किसी शासकीय कर्मचारी या अधिकारी का स्थानांतरण आदेश जारी हो जाता है, तो उसे नियत समय के भीतर अपना पदभार सौंपकर नवीन पदस्थापना स्थल पर उपस्थिति देनी होती है। यदि उपयंत्री प्रदीप यादव को कार्यमुक्त कर दिया गया है, तो वे किस अधिकार से खमतरा सेक्टर की शासकीय फाइलों और एमबी को अपने पास रखे हुए हैं? यदि उन्हें जनपद स्तर से कार्यमुक्त नहीं किया गया है, तो यह जनपद पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्या वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
*जन-प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मांग*
खमतरा सेक्टर के पीड़ित सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कटनी कलेक्टर से मामले की त्वरित जांच की मांग की है। उपयंत्री प्रदीप यादव को खमतरा सेक्टर से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए और उनका प्रभार नए उपयंत्री को सौंपा जाए। उपयंत्री के कब्जे से पंचायतों की सभी रुकी हुई एमबी (मेज़रमेंट बुक) को जब्त कर लंबित भुगतानों को तुरंत स्वीकृत कराया जाए। पिछले वित्तीय वर्षों में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मूल्यांकनों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित उपयंत्री के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ सुसंगत धाराओं के तहत कदम उठाए जाएं।
*कब जागेगा जिला प्रशासन*
ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत का खमतरा सेक्टर आज भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी का अखाड़ा बन चुका है। एक तरफ जहां राज्य सरकार पारदर्शी प्रशासन और त्वरित विकास का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी स्तर पर उपयंत्री जैसे कर्मचारी नियमों को ठेंगा दिखाकर अपने पदों पर जमे हुए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि कटनी जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और अंगद के पैर की तरह जमे उपयंत्री पर कब तक गाज गिरती है।

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