बात अगर आत्मसम्मान की हो तो में कुछ इस तरह का हूं बहुत कुछ छोड़ आया हूं और बहुत कुछ छोड़ भी सकता हूं, इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं , अपनों के अपनों पर यहां इल्ज़ाम बहुत हैं, शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं लगता हैं उम्र कम हैं और इम्तिहान बहुत हैं, आत्मसम्मान सर्वोपरि ज़िंदगी की धूप-छांव और रिश्तों की पेचीदगियों के बीच स्वाभिमान की अनोखी मिसाल
बात अगर आत्मसम्मान की हो तो में कुछ इस तरह का हूं बहुत कुछ छोड़ आया हूं और बहुत कुछ छोड़ भी सकता हूं, इस जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं , अपनों के अपनों पर यहां इल्ज़ाम बहुत हैं, शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं लगता हैं उम्र कम हैं और इम्तिहान बहुत हैं, आत्मसम्मान सर्वोपरि ज़िंदगी की धूप-छांव और रिश्तों की पेचीदगियों के बीच स्वाभिमान की अनोखी मिसाल ढीमरखेड़ा | अनदेखी डगर आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं' इस एक जीवन-मूल्य को अपना ध्येय बनाकर चलने वाले लोगों के लिए ज़िंदगी का सफर आसान नहीं होता। हाल ही में रिश्तों, सामाजिक सरोकारों और व्यक्तिगत सिद्धांतों के मोड़ पर एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई है कि जब बात स्वाभिमान की आती है, तो कुछ लोग अपनी बनी-बनाई राहें और सहूलियतें भी पल भर में छोड़ने में संकोच नहीं करते। *इल्ज़ामों और शिकायतों का दौर* ज़िंदगी की इस आपाधापी में थकान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक भी है। सबसे गहरा दुख तब देखने को मिलता है जब 'अपनों पर अपनों के ही इल्ज़ाम' लगने लगते हैं। रिश्तों में बढ़ती दूरियां और हर मोड़ पर एक-दूसरे से होत...