सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लोढ़ा पहाड़ बना आस्था का दिव्य धाम, स्वामी बाल संत जू महाराज की तपस्या और महंत सीतारामशरण जी महाराज की सेवा से गूंज रही सनातन संस्कृति की गूंज,जहां गुफाओं में गूंजी राम नाम की धुन, संतों की साधना से सिद्धन धाम बना श्रद्धा का केंद्र

 लोढ़ा पहाड़ बना आस्था का दिव्य धाम, स्वामी बाल संत जू महाराज की तपस्या और महंत सीतारामशरण जी महाराज की सेवा से गूंज रही सनातन संस्कृति की गूंज,जहां गुफाओं में गूंजी राम नाम की धुन, संतों की साधना से सिद्धन धाम बना श्रद्धा का केंद्र



ढीमरखेड़ा |  भारत की धरा सनातन काल से ही ऋषि-मुनियों, तपस्वियों और सिद्ध संतों की क्रीड़ास्थली रही है। मध्य प्रदेश का महाकौशल क्षेत्र अपने आप में अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा को समेटे हुए है। इसी क्षेत्र के अंतर्गत जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में स्थित कुर्रो पिपरिया के समीप बसा "श्री सिद्धन धाम लोढ़ा पहाड़" आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। समुद्र तल से लगभग ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत सिर्फ एक भौगोलिक रचना नहीं है, बल्कि यह सदियों की तपस्या, त्याग और ईश्वरीय साक्षात का जीवंत प्रतीक है। इस पवित्र स्थान को वैश्विक पटल पर लाने और जन-कल्याण का केंद्र बनाने का श्रेय यहाँ के महान संतों को जाता है, जिन्होंने घने जंगलों के बीच हिंसक पशुओं की परवाह किए बिना नारायण की आराधना की। 

*लोढ़ा पहाड़ का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व*

स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोढ़ा पहाड़ की कंदराओं (गुफाओं) में प्राचीन काल से ही उच्च कोटि के अदृश्य संत-महात्मा गुप्त रूप से तपस्या करते आ रहे हैं। यह पर्वत चारों ओर से अत्यंत सघन वनों, दुर्गम रास्तों और अद्भुत प्राकृतिक छटा से आच्छादित है। यहाँ का शांत वातावरण किसी भी व्याकुल मन को पल भर में शांत कर ईश्वर की भक्ति में लीन कर देता है। इस स्थान को 'सिद्धन धाम' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सिद्ध पुरुषों की भूमि है। कई दशक पहले तक यहाँ आम इंसानों का जाना अत्यंत कठिन था। चारों ओर वन्य जीवों का बसेरा था, परंतु ईश्वरीय प्रेरणा से संतों ने इस स्थान को अपनी तपोभूमि के रूप में चुना। समय बदला, और संतों की दिव्य ऊर्जा के प्रभाव से यह बीहड़ जंगल एक परम पावन तीर्थ में परिवर्तित हो गया, जहाँ आज चौबीसों घंटे प्रभु नाम का संकीर्तन गूंजता रहता है। 

 *अनंत श्री विभूषित परम पूज्य स्वामी श्री बाल संत जू महाराज साधना का शिखर*

श्री सिद्धन धाम की नींव और इसकी आध्यात्मिक चेतना के मूल स्रोत परम पूज्य स्वामी श्री बाल संत जू महाराज जी (जिन्हें सीता शरण जू महाराज के नाम से भी जाना जाता है) हैं। महाराज जी का संपूर्ण जीवन वैराग्य और कठिन साधना की एक जीती-जागती मिसाल है। महाराज जी को 'बाल संत' इसलिए कहा जाता है क्योंकि अल्पायु में ही, जब संसार के बच्चे खेल-कूद और सांसारिक माया-मोह में लिप्त होते हैं, तब उनके भीतर वैराग्य का अंकुर फूट चुका था। सांसारिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर उन्होंने ईश्वर की खोज में गृह-त्याग कर दिया।

*लोढ़ा पहाड़ पर कठिन तपस्या*

 भक्ति की खोज में भटकते हुए महाराज जी लोढ़ा पहाड़ पहुंचे। उस समय यह स्थान अत्यंत भयावह और निर्जन था। महाराज जी ने पर्वत पर स्थित एक प्राचीन गुफा को अपनी साधना स्थली बनाया। कड़ाके की ठंड, मूसलाधार बारिश और जेठ की तपती दुपहरी में भी उनकी साधना अनवरत चलती रही। वे हफ्तों तक निराहार रहकर प्रभु श्री राम और माता जानकी के ध्यान में मग्न रहते थे। महाराज जी का जीवन पूरी तरह से 'सीता-राम' के नाम में समाया हुआ था। उनकी वाणी में ऐसा ओज और करुणा थी कि जो कोई भी उनके दर्शन करने गुफा तक पहुंचता, वह सब कुछ भूलकर प्रभु भक्ति में लीन हो जाता था। महाराज जी ने समाज में छुआछूत, जाति-पांत के भेदभाव को मिटाकर 'सबके राम, राम सबके' का संदेश फैलाया।

 *परंपरा के संवाहक महंत स्वामी सीतारामशरण जी महाराज*

किसी भी महान संत की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक योग्य शिष्य की आवश्यकता होती है। स्वामी बाल संत जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद के साक्षात पात्र बने महंत स्वामी सीतारामशरण जी महाराज। स्वामी सीतारामशरण जी महाराज ने अपने गुरुदेव के चरणों में सर्वस्व समर्पित कर दिया। गुरु की आज्ञा को सर्वोपरि मानकर उन्होंने न केवल आश्रम की व्यवस्थाओं को संभाला, बल्कि अपनी आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। महंत स्वामी सीतारामशरण जी महाराज वर्तमान में एक ओजस्वी कथाव्यास के रूप में देश-विदेश में सनातन धर्म की अलख जगा रहे हैं। उनके मुखारविंद से प्रवाहित होने वाली श्रीमद्भागवत महापुराण, श्री रामकथा, और शिवपुराण की अमृत वर्षा को सुनने के लिए हजारों की संख्या में भक्त उमड़ते हैं। उनकी कथा शैली अत्यंत सरल, मर्मस्पर्शी और व्यावहारिक जीवन को दिशा देने वाली होती है। वे भजनों और प्रसंगों के माध्यम से भटके हुए युवाओं को सही मार्ग पर लाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

*सिद्धन धाम की वर्तमान व्यवस्थाएँ एवं गतिविधियाँ*

पूज्य संतों के आशीर्वाद से आज लोढ़ा पहाड़ पर एक विशाल और भव्य आश्रम का संचालन हो रहा है। पहाड़ की चोटी पर अब प्रभु श्री राम, माता जानकी, भगवान श्री कृष्ण, पवनपुत्र हनुमान जी, देवाधिदेव महादेव और ज्ञान की देवी माता शारदा के भव्य मंदिर स्थापित हैं। सुबह-शाम होने वाली महाआरती का दृश्य अलौकिक होता है। आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ आने वाले किसी भी श्रद्धालु को भूखा नहीं लौटने दिया जाता। गुरु महाराज की कृपा से यहाँ निरंतर निशुल्क भंडारा चलता रहता है। प्रतिवर्ष नवरात्रि, राम नवमी, हनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा के पावन अवसरों पर धाम में विशाल धार्मिक मेलों और वार्षिक महोत्सवों का आयोजन होता है। इन उत्सवों में लाखों श्रद्धालु पहाड़ की कठिन चढ़ाई पार कर संतों का आशीर्वाद लेने आते हैं। आश्रम के माध्यम से गऊ माता की सेवा की जाती है, और पहाड़ की हरियाली को अक्षुण्ण रखने के लिए निरंतर वृक्षारोपण के कार्य किए जाते हैं।

*श्री सिद्धन धाम लोढ़ा पहाड़ संतों का सामाजिक दृष्टिकोण और संदेश*

लोढ़ा पहाड़ के संतों का जीवन केवल व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने लोक-कल्याण को ही अपना परम धर्म माना । संतों ने हमेशा अपने प्रवचनों में युवाओं को नशे और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा दी है। पहाड़ की रक्षा और जंगलों को न काटने का संदेश देकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता को आध्यात्मिक रूप से समझाया। भूखे को अन्न और भटके को सही राह दिखाना ही उनकी जीवन यात्रा का मूल मंत्र रहा है।

 *एक अमर आध्यात्मिक गाथा*

श्री सिद्धन धाम लोढ़ा पहाड़ और यहाँ के संतों की जीवनी इस बात का साक्षात प्रमाण है कि यदि मनुष्य के भीतर दृढ़ संकल्प, अटूट विश्वास और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण हो, तो वह दुर्गम पत्थरों में भी भगवान को प्रकट कर सकता है। स्वामी बाल संत जी महाराज की तपोभूमि और महंत स्वामी सीतारामशरण जी महाराज के सेवा कार्यों ने इस क्षेत्र को एक नई आध्यात्मिक चेतना प्रदान की है। यह पावन धाम आज भी हर उस व्यक्ति के लिए खुला है जो संसार की भागदौड़ से दूर, मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की तलाश में भटक रहा है। संतों का यह पावन चरित्र युगों-युगों तक सनातन संस्कृति के प्रकाश स्तंभ के रूप में भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

टिप्पणियाँ

popular post

सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत

 सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत    कटनी ।  मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बहोरीबंद विकासखंड में संचालित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम स्लीमनाबाद स्थित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते क्रमांक 3790886493 से विभिन्न व्यक्तियों/अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन की जांच की मांग की है और तौफिक अहमद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आजीविका गतिविधियों के लिए उछऋ को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में लगभग 18.24 लाख के कथित ट्रांसफर का उल्लेख है। इसके अलावा एक अन्य बिंदु में उछऋ खाते से लगभग 1.15 करोड़ से अधिक राशि ट्...

कलम के साधक और संघर्ष के प्रतीक, सिहोरा के वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन के पत्रकारिता के 30 गौरवशाली वर्ष, बचपन के अभावों को हराकर चुनी ईमानदारी की राह, समाज सेवा में समर्पित जीवन, आज बच्चे वकील और इंजीनियर बनकर रोशन कर रहे हैं नाम

 कलम के साधक और संघर्ष के प्रतीक, सिहोरा के वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन के पत्रकारिता के 30 गौरवशाली वर्ष, बचपन के अभावों को हराकर चुनी ईमानदारी की राह, समाज सेवा में समर्पित जीवन, आज बच्चे वकील और इंजीनियर बनकर रोशन कर रहे हैं नाम जबलपुर | कहते हैं कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने और शोषितों की आवाज़ बनने का एक कठिन संकल्प है। इस संकल्प को पिछले तीन दशकों से अपने खून-पसीने से सींचने वाले सिहोरा निवासी अनिल जैन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले अनिल जैन ने अपने जीवन में केवल खबरें नहीं लिखीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद के लिए हमेशा अपने हाथ आगे बढ़ाए। बचपन से लेकर आज तक का उनका सफर संघर्ष, ईमानदारी और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक ऐसी महागाथा है, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। *बचपन का संघर्ष अभावों के बीच तपी शख्सियत* अनिल जैन जी का शुरुआती जीवन बेहद सरल लेकिन चुनौतियों से भरा रहा। बचपन में जब आम बच्चे सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं, तब अनिल जी ने जीवन की कड़वी सच...

एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप

 एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप ढीमरखेड़ा ।  तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि सहकारिता एवं खाद्य विभाग से जुड़े जिम्मेदारों द्वारा एक ही विक्रेता पर दो, तीन यहां तक कि चार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण का कार्य संभालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक विक्रेता से कई दुकानों का संचालन किस नियम और किस आदेश के तहत कराया जा रहा है।बताया जा रहा है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में विक्रेताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति को एक से अधिक दुकानों का वितरण कार्य सौंपा जा रहा है तो इसके पीछे सक्षम अधिकारी का आदेश, निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन होना आवश्यक है। क्षेत्र में इसी बिंदु को लेकर चर्चाएं तेज हैं...