एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप
एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप
ढीमरखेड़ा । तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि सहकारिता एवं खाद्य विभाग से जुड़े जिम्मेदारों द्वारा एक ही विक्रेता पर दो, तीन यहां तक कि चार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण का कार्य संभालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक विक्रेता से कई दुकानों का संचालन किस नियम और किस आदेश के तहत कराया जा रहा है।बताया जा रहा है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में विक्रेताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति को एक से अधिक दुकानों का वितरण कार्य सौंपा जा रहा है तो इसके पीछे सक्षम अधिकारी का आदेश, निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन होना आवश्यक है। क्षेत्र में इसी बिंदु को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
*नियमों को लेकर स्पष्टता की मांग*
स्थानीय लोगों और संबंधित हितधारकों का कहना है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में एक विक्रेता को अतिरिक्त दुकानों का प्रभार अथवा वितरण की जिम्मेदारी दी गई है तो विभाग को उसका स्पष्ट आदेश सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसी व्यवस्था कितने समय के लिए और किन परिस्थितियों में लागू की गई है। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में विक्रेताओं पर अतिरिक्त दुकानों में खाद्यान्न वितरण करने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि व्यवस्था विभागीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चल रही है या नहीं।
*अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल*
मामले में खाद्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों से जुड़ी व्यवस्था है। ऐसे में दुकानों के संचालन, विक्रेताओं की नियुक्ति, प्रभार और खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
*रिकॉर्ड सामने आए तो साफ होगी तस्वीर*
मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित उचित मूल्य दुकानों के आवंटन आदेश, विक्रेताओं की नियुक्ति/प्रभार संबंधी दस्तावेज, खाद्यान्न वितरण के रिकॉर्ड और विभागीय निर्देशों की जांच की जानी चाहिए। यदि नियम के अनुसार एक विक्रेता को केवल निर्धारित दुकान का दायित्व दिया गया है, तो अतिरिक्त दुकानों का कार्य सौंपे जाने का आधार भी सामने आना चाहिए। वहीं यदि विभाग के पास ऐसी व्यवस्था के लिए कोई वैध प्रावधान अथवा सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि नियमों के विपरीत किसी विक्रेता पर अतिरिक्त दुकानों का वितरण कार्य करने का दबाव बनाया गया है तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही पीडीएस व्यवस्था को नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित कराने की मांग की गई है।

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