पहले पैसा, फिर इलाज' की जिद पर सख्त कानून, इमरजेंसी में मना करने पर डॉक्टर को हो सकती है जेल कटनी | अक्सर देखने में आता है कि अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड में मरीजों से पहले पैसे जमा करने या एडवांस फॉर्म भरने को कहा जाता है। कई बार पैसे न होने के कारण गरीब मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता और वे दम तोड़ देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय कानून के तहत ऐसा करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है? सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने इस संबंध में बेहद कड़े और स्पष्ट नियम बनाए हैं। *सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 'जान बचाना पहला धर्म'* सर्वोच्च न्यायालय ने पंडित परमानंद कटारा बनाम भारत संघ और हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2026) मामलों की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रॉमा (गंभीर चोट) और आपातकालीन चिकित्सा देखभाल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जो अनुच्छेद 21 के तहत आता है। कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल किसी भी गंभीर मरीज (जैसे- सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, या गंभीर बीमारी) को सिर्फ इसलिए लौटा नहीं सकता कि उसके पास उस वक्त पैसे नहीं हैं। अस्पताल का...