कागजों में विकास, धरातल पर ताला,घुघरी पंचायत में लाखों के फर्जीवाड़े पर भड़के ग्रामीण घुघरी पंचायत घोटाला, परिजनों के खातों में भेजी सरकारी राशि, प्रशासनिक काम ठप्प होने पर आंदोलन की चेतावनी
कागजों में विकास, धरातल पर ताला,घुघरी पंचायत में लाखों के फर्जीवाड़े पर भड़के ग्रामीण घुघरी पंचायत घोटाला, परिजनों के खातों में भेजी सरकारी राशि, प्रशासनिक काम ठप्प होने पर आंदोलन की चेतावनी
कटनी | जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुघरी इन दिनों भीषण वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक बदहाली के आरोपों से घिरी हुई है। गांव के दर्जनों आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत सचिव रामदयाल पटेल और वर्तमान सरपंच पर मिलीभगत कर सरकारी खजाने से लाखों रुपये का गबन करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा को एक विस्तृत और बिंदुवार शिकायत पत्र सौंपते हुए उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत घुघरी में विकास के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए गए हैं, जबकि धरातल पर पंचायत मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि घोटाले को अंजाम देने के बाद पंचायत सचिव पिछले लगभग तीन महीनों से लगातार कार्यालय से नदारद (गायब) हैं, जिससे गांव के दैनिक प्रशासनिक कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़ गए हैं।
परिजनों के नाम फर्जी बिल और लाखों का फर्जीवाड़ा
ग्रामीणों द्वारा जनपद सीईओ को सौंपे गए ज्ञापन में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा वित्तीय गबन के तौर-तरीकों को लेकर हुआ है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी राशि का आहरण करने के लिए पंचायत के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही परिवार के सदस्यों को माध्यम बनाया:
सचिव के पुत्र के नाम पर भुगतान: आरोप है कि पंचायत सचिव रामदयाल पटेल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पुत्र के नाम से विभिन्न फर्जी बिल तैयार किए और पंचायत कोष से राशि आहरित कर ली।
सरपंच एवं उनके पति के नाम पर आहरण: शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत की सरपंच ने स्वयं, अपने पति और अन्य नजदीकी रिश्तेदारों के नाम पर पंचायत मद से भुगतान दर्शाया है। कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से पंचायत निधि का आहरण सीधे अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम पर करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी धन के सुनियोजित दुरुपयोग और गबन की श्रेणी में आता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में हुए अधिकांश भुगतानों की सूची यदि निकाली जाए तो स्पष्ट होगा कि वास्तविक ठेकेदारों, श्रमिकों या सेवा प्रदाताओं के स्थान पर केवल रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया है।
*साफ-सफाई और कार्यालय व्यय के नाम पर फर्जी आहरण*
ग्रामीणों का आरोप है कि जब से सचिव रामदयाल पटेल ने घुघरी पंचायत का पदभार ग्रहण किया था, तब से ही साफ-सफाई, स्वच्छता अभियान, कीटनाशक छिड़काव, स्टेशनरी और कार्यालय संचालन व्यय के नाम पर हर महीने लगातार फर्जी बिल लगाए जाते रहे।
पंचायत रिकॉर्ड में इन मदों के अंतर्गत लाखों रुपये का खर्च दर्ज है, लेकिन गांव की भौतिक स्थिति इसके ठीक उलट है। गांव के चौराहों पर कचरे के ढेर लगे हैं, नालियां चोक पड़ी हैं और साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप्प है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन कार्यों का भुगतान कागजों में पूर्ण दिखाकर राशि निकाल ली गई, उनमें से एक भी काम धरातल पर नजर नहीं आता।
डेटा सहायक के नाम पर संदिग्ध भुगतान
वित्तीय हेराफेरी की कड़ियों को जोड़ते हुए ग्रामीणों ने दीपक चौरसिया नामक व्यक्ति के नाम से आहरित की गई राशि पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत में "डेटा सहायक" दर्शाकर पंचायत निधि से नियमित भुगतान किया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस बात की गहनता से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में घुघरी पंचायत कार्यालय में उपस्थित होकर कोई कार्य किया है या फिर केवल कागजों में नाम दर्ज करके सरकारी पैसे का बंदरबांट किया गया है। ग्रामीणों की आशंका है कि यदि पिछले कुछ वर्षों के संपूर्ण वाउचरों और बिलों की तकनीकी जांच कराई जाए तो ऐसे कई और नाम उजागर होंगे जो केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
*नल-जल योजना की वसूली का हिसाब गायब*
केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन एवं नल-जल योजना भी इस कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में नल-जल योजना के सुचारू संचालन के नाम पर घर-घर से पानी का मासिक शुल्क (जल कर) नियमित रूप से वसूला जाता है। हालाँकि, उपभोक्ताओं से एकत्रित की गई इस राजस्व राशि को पंचायत के अधिकृत बैंक खाते में जमा करने के बजाय डकार लिया गया। इसके साथ ही, योजना के रख-रखाव, पाइपलाइन मरम्मत और मोटर सुधार के नाम पर भी अलग से सरकारी बजट से भारी राशि आहरित की गई। इसके बावजूद, गांव के कई मोहल्लों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल है और ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
*14 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य केवल कागजों में*
घुघरी गांव में आधारभूत संरचना की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। सड़कों में गड्ढे हैं, नालियों का निर्माण अधूरा पड़ा है और सार्वजनिक उपयोग के निर्माण कार्य अधर में लटके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव रामदयाल पटेल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न मदों से छोटे-बड़े दर्जनों बिल लगाकर लगभग 10 लाख रुपये की मोटी राशि का आहरण कर लिया गया। यदि किसी निष्पक्ष तकनीकी टीम (जैसे पीडब्ल्यूडी या आरईएस के इंजीनियरों) से गांव में हुए निर्माण कार्यों का भौतिक मूल्यांकन और नाप-जोख कराया जाए, तो फर्जीवाड़े का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।
*तीन माह से गायब हैं सचिव, प्रशासनिक कामकाज ठप्प*
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायत में नामजद पंचायत सचिव रामदयाल पटेल पिछले लगभग तीन महीनों से पंचायत कार्यालय से बिना किसी पूर्व सूचना के नदारद हैं। सचिव की निरंतर अनुपस्थिति के कारण ग्राम पंचायत घुघरी में ताला लटकने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन जैसे अति-आवश्यक दस्तावेज जारी नहीं हो पा रहे हैं। समग्र आईडी पोर्टल सुधार, वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन का सत्यापन, तथा राशन कार्ड से संबंधित कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरों की मस्टर रोल फीडिंग और मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी स्थानीय जनपद अधिकारियों को मौखिक रूप से सचिव की अनुपस्थिति से अवगत कराया था, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि यदि कोई मामूली कर्मचारी इतने दिनों तक बिना बताए अनुपस्थित रहता तो उस पर अब तक निलंबन की कार्रवाई हो चुकी होती, लेकिन लाखों रुपये के गबन के आरोपी सचिव पर प्रशासन मेहरबान बना हुआ है। जिला स्तरीय अधिकारियों की निष्पक्ष समिति गठित कर घुघरी पंचायत के पिछले तीन वर्षों के सभी वित्तीय वाउचरों, कैश बुक और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। फर्जी बिलों के जरिए परिजनों के खातों में राशि स्थानांतरित करने वाले सचिव, सरपंच एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों पर गबन का मामला दर्ज किया जाए। आहरित की गई फर्जी राशि की रिकवरी कर उसे पुनः ग्राम पंचायत कोष में जमा कराया जाए। पंचायत कार्यालय का संचालन सुचारू करने के लिए तत्काल प्रभाव से नए सचिव की नियुक्ति की जाए।
*आंदोलन की चेतावनी*
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी शिकायत को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की या निष्पक्ष जांच में देरी की, तो ग्राम पंचायत घुघरी के निवासी ढीमरखेड़ा जनपद कार्यालय के समक्ष उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के उच्च अधिकारी इस गंभीर शिकायत पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं।

Neeraj kumar
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