राशन दुकानों में खाद्यान्न घोटाला, छतरपुर कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कटनी के ढीमरखेड़ा में सुलग रहे सवाल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन की जवाबदेही पर जनता ने उठाए सवाल, सही तरीके से नहीं की गई निगरानी इसलिए हुआ घोटाला
राशन दुकानों में खाद्यान्न घोटाला, छतरपुर कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कटनी के ढीमरखेड़ा में सुलग रहे सवाल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन की जवाबदेही पर जनता ने उठाए सवाल, सही तरीके से नहीं की गई निगरानी इसलिए हुआ घोटाला
कटनी | मध्य प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में शासकीय उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) से गरीबों के हक का खाद्यान्न गायब होना एक बेहद गंभीर समस्या बन चुका है। हाल ही में छतरपुर कलेक्टर द्वारा राशन वितरण और उचित मूल्य दुकानों के संचालन में लापरवाही बरतने वाले कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों (JSO - Junior Supplies Officer) के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। छतरपुर कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी राशन दुकान पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र का JSO जिम्मेदार होगा। इस सख्त आदेश के बाद अब पड़ोसी जिलों में भी राशन निगरानी व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेष रूप से कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड में शासकीय उचित मूल्य दुकानों में लगातार सामने आ रहे खाद्यान्न घपलों ने प्रशासन की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र के कार्डधारकों और स्थानीय जनता का सीधा सवाल है कि यदि राशन दुकानों में दो-दो महीने का राशन कम पाया जा रहा है, तो इसकी असली जिम्मेदारी किसकी है? शासन के नियमानुसार कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी का यह मुख्य कर्तव्य है कि वे लगातार क्षेत्रों का भ्रमण कर दुकानों की सघन निगरानी करें। ऐसे में जनता द्वारा यह मांग उठाई जा रही है कि कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए ढीमरखेड़ा की कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) वंदना जैन के ऊपर भी एफआईआर (FIR) दर्ज करवानी चाहिए।
*ढीमरखेड़ा की राशन दुकानों में लाखों की हेराफेरी, पर निगरानी अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं*
कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शासकीय उचित मूल्य दुकानों से लगातार राशन गायब होने और गबन के बड़े मामले सामने आए हैं। आधिकारिक तौर पर प्राप्त जानकारी के अनुसार, ढीमरखेड़ा के देवरी-बिछिया स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में लगभग 6 लाख रुपये से अधिक के खाद्यान्न की हेराफेरी और गबन का बड़ा पर्दाफाश हुआ था। इसके अलावा पहरूआ उचित मूल्य दुकान में भी 5.32 लाख रुपये के सरकारी राशन की हेराफेरी का मामला उजाकर हुआ। इन सभी मामलों में कलेक्टर के निर्देश पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन ने स्वयं दुकानों की जांच की और उनकी शिकायतों या आवेदनों के आधार पर पुलिस ने संबंधित सेल्समैनों, संस्था अध्यक्षों और पूर्व विक्रेताओं जैसे जयंती बाई बर्मन, धर्मेंद्र पटेल और अभिलाष रंजन बर्मन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिए। परंतु, यहां सबसे बड़ा और बुनियादी यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि यह भारी-भरकम घोटाला एक या दो दिन में नहीं हुआ। दुकानों में दो-दो महीने का राशन कम होता रहा, स्टॉक में हेराफेरी चलती रही, लेकिन क्षेत्रीय जेएसओ को इसकी भनक तक नहीं लगी। जनता का कहना है कि क्या यह केवल सेल्समैनों की चालाकी है या फिर विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही और मूक सहमति का परिणाम है?
*शासन के नियम क्या कहते हैं क्या है जेएसओ की मूल जिम्मेदारी*
मध्य प्रदेश खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के नियमों के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड में तैनात कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) का यह दायित्व है कि वे अपने प्रभार वाले क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली हर एक शासकीय उचित मूल्य दुकान का नियमित अंतराल पर भौतिक सत्यापन करें।जेएसओ का काम दुकान के ऑनलाइन रिकॉर्ड (पीओएस मशीन डेटा) और भौतिक रूप से गोदाम में उपलब्ध राशन के बोरे का मिलान करना है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि अधिकारी केवल दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार न करें, बल्कि फील्ड में घूमकर नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें। उपभोक्ताओं को राशन मिल रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना सीधे तौर पर आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय अमले का काम है। जब ढीमरखेड़ा की दुकानों में दो महीने का राशन पूरी तरह से गायब हो गया और लाखों का गबन हो गया, तो यह साफ साबित होता है कि नियम पुस्तिका में दर्ज इन दायित्वों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं किया गया। यदि जेएसओ वंदना जैन ने नियमों के तहत समय रहते दुकानों का औचक निरीक्षण किया होता और स्टॉक की जांच की होती, तो गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले इन सेल्समैनों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।
*छतरपुर और कटनी के प्रशासनिक रवैये में अंतर पर जनता में आक्रोश*
छतरपुर जिले में जहां कलेक्टर ने शासकीय उचित मूल्य दुकानों के संचालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता मिलने पर जेएसओ को सीधे तौर पर कानूनी और प्रशासनिक रूप से जवाबदेह बनाने का आदेश दिया है, वहीं कटनी में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिल रही है। कटनी के ढीमरखेड़ा में जेएसओ स्वयं जांचकर्ता बनकर केवल सेल्समैनों पर एफआईआर करवा रही हैं, जबकि स्वयं उनकी निगरानी में हुई इस भारी चूक पर जिला प्रशासन मौन साधे हुए है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए केवल छोटे कर्मचारियों या सेल्समैनों को मोहरा बनाकर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। जब तक उस क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च विभागीय अधिकारी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक राशन व्यवस्था की इस सड़ांध को दूर नहीं किया जा सकता।
*कटनी कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की उम्मीद*
क्षेत्र की आम जनता और राशन कार्डधारकों ने इस मामले को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का स्पष्ट मत है कि जब तक निगरानी अमले पर गाज नहीं गिरेगी, तब तक सरकारी राशन की यह चोरी कभी नहीं रुक सकती। जनसुनवाई में लगातार पहुंच रही इन शिकायतों के बाद अब मांग की जा रही है कि कटनी कलेक्टर इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लें। शासन के नियमों की अवहेलना करने, क्षेत्र का नियमित भ्रमण न करने और अपनी आंखों के सामने लाखों रुपये का खाद्यान्न खुर्द-बुर्द हो जाने देने के आरोप में ढीमरखेड़ा जेएसओ वंदना जैन के खिलाफ भी सह-आरोपी के रूप में या पद के प्रति घोर लापरवाही बरतने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। केवल इस प्रकार की कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई से ही पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में एक कड़ा संदेश जाएगा और छतरपुर कलेक्टर के आदेशों की तरह कटनी में भी वास्तविक प्रशासनिक जवाबदेही स्थापित हो सकेगी।

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