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पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर विराजीं माता रानी, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा गांव

 पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर विराजीं माता रानी, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ पूरा गांव ढीमरखेड़ा | नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम पोड़ी कला बी में चारों ओर भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। गांव में पांच अलग-अलग स्थानों पर माता रानी की प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं, जहां श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की आराधना में जुटे हुए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय बना हुआ है। गांव के विभिन्न पंडालों में आकर्षक सजावट की गई है। माता रानी के दर्शन के लिए ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। शाम होते ही पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है और भजनों की मधुर धुन से वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है। *पांच स्थानों पर माता के दरबार, श्रद्धालुओं में उत्साह* पोड़ी कला बी में पांच स्थानों पर माता रानी की स्थापना ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बनी हुई है। प्रत्येक स्थान पर श्रद्...

1500 वर्ष पुराने इतिहास को समेटे है तिगवां का कंकाली देवी मंदिर, गुप्तकालीन वास्तुकला का अद्भुत केंद्र, बहोरीबंद की पावन धरा पर गुप्त साम्राज्य की अमूल्य धरोहर

 1500 वर्ष पुराने इतिहास को समेटे है तिगवां का कंकाली देवी मंदिर, गुप्तकालीन वास्तुकला का अद्भुत केंद्र, बहोरीबंद की पावन धरा पर गुप्त साम्राज्य की अमूल्य धरोहर कटनी |  मध्य प्रदेश का महाकौशल क्षेत्र अपने भीतर न जाने कितने ऐतिहासिक रहस्य और सांस्कृतिक धरोहरें समेटे हुए है. इसी ऐतिहासिक श्रृंखला में कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील से लगभग 4 से 5 किलोमीटर दूर स्थित तिगवां ग्राम का मां कंकाली देवी मंदिर आज भी सैलानियों और इतिहासकारों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है. 5वीं शताब्दी (गुप्त काल) का यह अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर भारत के सबसे शुरुआती पत्थरों से निर्मित मंदिरों में से एक माना जाता है. लगभग 1500 वर्षों की ऋतुओं और मौसम की मार झेलने के बाद भी इस मंदिर की संरचना आज भी शान से खड़ी है, जो तत्कालीन भारत के उत्कृष्ट शिल्पकला और वास्तुकला की कहानी बयां करती है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इस स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर संरक्षित किया गया है. इतिहासकार बताते हैं कि जब भारत में मंदिरों के निर्माण की कला अपने शुरुआती दौर में थी, तब इस अद्भुत मंदिर का न...

मुरवारी में भव्य महाआरती का आयोजन 17 अक्टूबर को बस स्टैंड परिसर में उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब, आशीष सोनू गौतम के नेतृत्व में होगी महाआरती, भंडारा और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करें

 मुरवारी में भव्य महाआरती का आयोजन 17 अक्टूबर को बस स्टैंड परिसर में उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब, आशीष सोनू गौतम के नेतृत्व में होगी महाआरती, भंडारा और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करें   ढीमरखेड़ा | कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम मुरवारी में 17 अक्टूबर 2026 को एक अत्यंत भव्य एवं अलौकिक धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस दिन क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।महाकाली दुर्गा उत्सव समिति, बस स्टैंड मुरवारी के तत्वावधान में माँ महाकाली की विशाल एवं भव्य महाआरती का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान को लेकर संपूर्ण मुरवारी गाँव एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल देखा जा रहा है।   *धार्मिक आयोजन का विवरण और समय सारणी* ग्राम मुरवारी के बस स्टैंड परिसर में होने वाली यह महाआरती न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बल्कि पूरे ढीमरखेड़ा क्षेत्र के वासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। आयोजन समिति की ओर से दी गई जानकारी के अनुसा...

पोड़ी कला बी के लाल ने गाड़ दिए झंडे अनुज त्रिपाठी को मिली उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के परिणाम में सफलता, मेहनत, संस्कार और लोकसेवा खाकी वर्दी में युवाओं का नया विश्वास

 पोड़ी कला बी के लाल ने गाड़ दिए झंडे अनुज त्रिपाठी को मिली उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के परिणाम में सफलता, मेहनत, संस्कार और लोकसेवा खाकी वर्दी में युवाओं का नया विश्वास ढीमरखेड़ा |  किसी भी राष्ट्र या राज्य की प्रगति की वास्तविक नींव उसके युवाओं के सामर्थ्य और उनके निष्ठावान प्रयासों पर टिकी होती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ द्वारा घोषित 'आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025' के परिणाम केवल आंकड़ों का संग्रह मात्र नहीं हैं, बल्कि ये लाखों युवाओं के कठिन परिश्रम, उनके परिवारों के त्याग और उम्मीदों की एक सशक्त अभिव्यक्ति हैं।   *इसी सफलता की कड़ी में अनुज कुमार का चयन पुलिस विभाग में, क्षेत्र में उत्साह की लहर* कांस्टेबल Police  के पद पर होना यह दर्शाता है कि जब निरंतर समर्पण और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो सफलता सुनिश्चित होती है। अनुज की लगन और अनुशासन का परिचायक है। *परिवार और संस्कारों की नींव* सफलता कभी भी एकाकी नहीं होती। एक युवा जब प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन राह चुनता है, तो उसके पीछे उसके माता-...

ढीमरखेड़ा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगे नए पंख डॉ. राधेश शर्मा के मेडिकल एवं थोक दवा कारोबार का भव्य शुभारंभ बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को हुआ गरिमामय उद्घाटन कार्यक्रम अब स्थानीय ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयों के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से सीधे संबंधों वाले जनप्रिय चिकित्सक की नई पहल

 ढीमरखेड़ा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगे नए पंख डॉ. राधेश शर्मा के मेडिकल एवं थोक दवा कारोबार का भव्य शुभारंभ बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को हुआ गरिमामय उद्घाटन कार्यक्रम अब स्थानीय ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयों के लिए नहीं जाना पड़ेगा दूर वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से सीधे संबंधों वाले जनप्रिय चिकित्सक की नई पहल ढीमरखेड़ा |  ग्रामीण अंचल में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में आज का दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध चिकित्सक, समाजसेवी और सर्वप्रिय व्यक्तित्व डॉ. राधेश शर्मा जी के नए मेडिकल स्टोर एवं थोक (होलसेल) दवा व्यवसाय का भव्य शुभारंभ आज, बुधवार दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को विधि-विधान एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। उद्घाटन के इस शुभ अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति रही। डॉ. राधेश शर्मा के इस नए प्रतिष्ठान के प्रारंभ होने से ढीमरखेड़ा और आसपास के दर्जनों गांवों के निवासियों को अब सभी प्रकार की अत्यावश्यक और ...

पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता

 पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता ढीमरखेड़ा ।  कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। जानकारी के अनुसार, गांव में तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच स्थित ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ नजर आया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के बीच मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलते ही क्षेत्र में सतर्कता का माहौल बन गया।लोगों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्र या घाट के आसपास मौजूद रहता है, तो किसी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से घाट के आसपास आने-जाने वाले ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करे और मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की...

लोढ़ा पहाड़ बना आस्था का दिव्य धाम, स्वामी बाल संत जू महाराज की तपस्या और महंत सीतारामशरण जी महाराज की सेवा से गूंज रही सनातन संस्कृति की गूंज,जहां गुफाओं में गूंजी राम नाम की धुन, संतों की साधना से सिद्धन धाम बना श्रद्धा का केंद्र

 लोढ़ा पहाड़ बना आस्था का दिव्य धाम, स्वामी बाल संत जू महाराज की तपस्या और महंत सीतारामशरण जी महाराज की सेवा से गूंज रही सनातन संस्कृति की गूंज,जहां गुफाओं में गूंजी राम नाम की धुन, संतों की साधना से सिद्धन धाम बना श्रद्धा का केंद्र ढीमरखेड़ा |  भारत की धरा सनातन काल से ही ऋषि-मुनियों, तपस्वियों और सिद्ध संतों की क्रीड़ास्थली रही है। मध्य प्रदेश का महाकौशल क्षेत्र अपने आप में अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा को समेटे हुए है। इसी क्षेत्र के अंतर्गत जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में स्थित कुर्रो पिपरिया के समीप बसा "श्री सिद्धन धाम लोढ़ा पहाड़" आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। समुद्र तल से लगभग ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत सिर्फ एक भौगोलिक रचना नहीं है, बल्कि यह सदियों की तपस्या, त्याग और ईश्वरीय साक्षात का जीवंत प्रतीक है। इस पवित्र स्थान को वैश्विक पटल पर लाने और जन-कल्याण का केंद्र बनाने का श्रेय यहाँ के महान संतों को जाता है, जिन्होंने घने जंगलों के बीच हिंसक पशुओं की परवाह किए बिना नारायण की आराधना की।  *लोढ़ा पहाड़ का ऐ...