सहकारिता विभाग के 'बब्बर शेर' निरंजन सिंह चौहान, अपनी अनूठी कार्यशैली और मिलनसार व्यवहार से जीत रहे हैं हर दिल
सहकारिता विभाग के 'बब्बर शेर' निरंजन सिंह चौहान, अपनी अनूठी कार्यशैली और मिलनसार व्यवहार से जीत रहे हैं हर दिल
कटनी | सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर आम जनता के मन में एक ढुलमुल और जटिल छवि बनी होती है। फाइलों का अंबार, समय पर काम न होना और अधिकारियों का रूखा व्यवहार ये कुछ ऐसी शिकायतें हैं जो अमूमन हर दफ्तर के बाहर सुनने को मिल जाती हैं। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच कुछ ऐसे व्यक्तित्व भी उभरकर सामने आते हैं, जो अपनी निष्ठा, कड़े फैसलों और बेहद सौम्य व्यवहार से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की परिभाषा बदल देते हैं। सहकारिता विभाग के एक ऐसे ही चमकते सितारे हैं निरंजन सिंह चौहान, जिन्हें विभाग के कर्मचारी और आम जनता प्यार व सम्मान से 'बब्बर शेर' कहकर पुकारते हैं। निरंजन सिंह चौहान का काम करने का तरीका जितना कड़क और सराहनीय है, उनका लोगों से संवाद करने का अंदाज उतना ही मीठा और सुंदर है। यही वजह है कि उनसे मिलकर हर व्यक्ति न केवल संतुष्ट होता है, बल्कि चेहरे पर एक मुस्कान लेकर लौटता है।
*जो व्यक्ति मिला मिलकर हुआ खुश*
सहकारिता विभाग सीधे तौर पर जमीन से जुड़े किसानों, दुग्ध उत्पादकों, स्थानीय समितियों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करता है। इस विभाग में योजनाओं को सही और पारदर्शी तरीके से लागू करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। निरंजन सिंह चौहान ने जब से विभाग में अपनी कमान संभाली है, उन्होंने भ्रष्टाचार, लापरवाही और काम में ढिलाई बरतने वालों के खिलाफ एक सख्त रुख अपनाया है। वे फाइलों को अटकाने के सख्त खिलाफ हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर किसी जरूरतमंद या किसान की फाइल टेबल पर आई है, तो उस पर तुरंत फैसला होना चाहिए। नियमों के पक्के चौहान साहब गलत काम के आगे कभी नहीं झुकते, यही वजह है कि विभाग के भीतर और बाहर उनकी छवि एक निडर 'बब्बर शेर' जैसी बन चुकी है। उनके नेतृत्व में स्थानीय सहकारी समितियों और बैंकों के डिजिटलाइजेशन को काफी बढ़ावा मिला है, जिससे आम लोगों को लोन मिलने और खाद-बीज की सब्सिडी सीधे उनके खातों में पहुंचने में आसानी हुई है। वे केवल वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर आदेश जारी करने वाले अधिकारी नहीं हैं। वे लगातार मैदानी दौरों पर रहते हैं और खुद जाकर देखते हैं कि सरकार की सहकारिता नीतियां आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही हैं या नहीं।
*मिठास ऐसी कि हर कोई हो जाए मुरीद सुंदर और सहज संवाद*
एक तरफ जहां उनका प्रशासनिक रूप बेहद सख्त है, वहीं दूसरी तरफ उनका मानवीय चेहरा हर किसी को अचंभित कर देता है। निरंजन सिंह चौहान से जो कोई भी एक बार मिल लेता है, वह उनके बात करने के सुंदर और शालीन तरीके का प्रशंसक बन जाता है। अक्सर देखा जाता है कि बड़े पदों पर बैठे अधिकारी आम जनता से दूरी बनाकर रखते हैं, लेकिन चौहान साहब के दफ्तर के दरवाजे हर किसी के लिए हमेशा खुले रहते हैं। चाहे कोई बड़ा जन-प्रतिनिधि हो या दूर-दराज के गांव से आया कोई गरीब किसान, वे सभी की बात को पूरी गंभीरता और बेहद धैर्य के साथ सुनते हैं। वे सामने वाले व्यक्ति की उम्र और परिस्थिति के हिसाब से बात करते हैं। बुजुर्गों को पूरा सम्मान देना और युवाओं का मार्गदर्शन करना उनकी आदत में शुमार है। वे केवल आश्वासन नहीं देते, बल्कि पीड़ित व्यक्ति के सामने ही संबंधित कर्मचारी को फोन लगाकर काम पूरा करने के निर्देश देते हैं। उनके चेहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कान और सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण उनके पास आने वाला निराश व्यक्ति भी उत्साह से भर जाता है।
*सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव*
निरंजन सिंह चौहान के विजन के कारण सहकारिता विभाग ने कई मील के पत्थर छुए हैं। उन्होंने सहकारी संस्थाओं को केवल सरकारी मदद पर निर्भर रहने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने सहकारिता के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई विशेष नीतियां लागू करवाईं। आज उनके प्रयासों से हजारों महिलाएं गृह उद्योग, डेयरी और हस्तशिल्प के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ी हैं। सहकारी बैंकों में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं पर उन्होंने पूरी तरह से लगाम कसी है। उनकी इसी कड़ाई के कारण किसानों का सहकारी व्यवस्था पर भरोसा एक बार फिर काफी मजबूत हुआ है।
*आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के रोल मॉडल*
आज के दौर में जब सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट-काटकर जनता थक जाती है, तब निरंजन सिंह चौहान जैसे अधिकारी पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की साख को बचाए रखते हैं। वे इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि कोई अधिकारी नियमों और सिद्धांतों पर बिना कोई समझौता किए (बब्बर शेर की तरह कड़क रहकर) भी जनता के प्रति कितना दयालु, विनम्र और मिलनसार हो सकता है। उनका यह सराहनीय कार्य और बात करने का सुंदर तरीका न केवल सहकारिता विभाग के लिए एक मिसाल है, बल्कि अन्य लोक सेवकों के लिए भी एक बेहतरीन सीख है कि कैसे सत्ता और पद का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण और लोगों के चेहरों पर खुशी लाने के लिए किया जाता है। सचमुच, निरंजन सिंह चौहान जैसे 'बब्बर शेर' पर पूरे विभाग और जनता को नाज है।

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