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कटनी जिले की शान संजय पाठक गरीबों के मसीहा और राजनीति के बब्बर शेर

 कटनी जिले की शान संजय पाठक  गरीबों के मसीहा और राजनीति के बब्बर शेर



ढीमरखेड़ा | मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में कुछ नेता ऐसे होते हैं जो केवल चुनाव जीतने या पद पाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने की भावना से काम करते हैं। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में एक ऐसा ही नाम है संजय पाठक। यह नाम केवल एक नेता का नहीं बल्कि एक भाव, एक उम्मीद और एक भरोसे का प्रतीक बन चुका है। जिन्हें लोग 'गरीबों का मसीहा' कहते हैं, जिन्हें राजनीति में 'बब्बर शेर' कहा जाता है, और जिनके बारे में यह कहा जाता है "तेरे दुश्मन तुझे कैसे हराएंगे, जब गरीबों की दुआएं और हजार हाथ वाले की कृपा तेरे साथ है।

*गरीबों के मसीहा जनसेवा की मिसाल*

कटनी जिले के हर गरीब परिवार के लिए संजय पाठक एक मसीहा से कम नहीं हैं। उन्होंने हजारों लोगों के इलाज का खर्च उठाया, बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा, विधवाओं और वृद्धों को पेंशन योजनाओं से लाभान्वित किया। हर त्यौहार, आपदा, या संकट की घड़ी में संजय पाठक सबसे पहले मौजूद रहते हैं।कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी जैसे गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब मरीजों का संजय पाठक ने मुफ्त इलाज कराया। कई बार उन्होंने निजी अस्पतालों के भारी बिल खुद भरे ताकि कोई गरीब अपनी जान न गंवाए। गरीब बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, ड्रेस, साइकिल आदि की व्यवस्था उन्होंने की। कई मेधावी छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियाँ भी दिलवाईं। उन्होंने हजारों गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस योजना और राशन कार्ड जैसी सुविधाओं से जोड़ा। खुद अपने संसाधनों से भी सैकड़ों परिवारों को राशन पहुंचाया।

*राजनीति में बब्बर शेर विरोधियों के लिए चुनौती*

राजनीति में संजय पाठक को उनके समर्थक ‘बब्बर शेर’ कहते हैं। वे अपने मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट विचारधारा और निडर निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। विपक्ष कितनी भी चालें चले, लेकिन जनता का अटूट विश्वास उनके साथ रहा है। वे हर चुनाव में भारी मतों से विजयी होते आए हैं। उनकी सभा में उमड़ती भीड़, उनके नाम के नारों से गूंजती गलियां, और हर उम्र के लोगों में उनके प्रति सम्मान यह दिखाता है कि वे केवल नेता नहीं बल्कि "जनता के दिलों के राजा" हैं।

*भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख*

संजय पाठक ने प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कड़े कदम उठाए। कई बार उन्होंने जिले में व्याप्त अधिकारियों की लापरवाही और रिश्वतखोरी को उजागर किया। उन्होंने हर पंचायत, हर स्कूल, हर अस्पताल का औचक निरीक्षण कर वहां की कमियों को ठीक कराया। संजय पाठक ने युवाओं को रोजगार के अवसर, खेल मैदान, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब आदि देकर एक नई दिशा दी। उन्होंने कटनी में युवाओं के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम, ओपन जिम, और कोचिंग सेंटर की पहल की।उन्होंने युवाओं से हमेशा कहा “राजनीति में आओ, लेकिन ईमानदारी और सेवा की भावना के साथ।” यही कारण है कि आज कटनी के हजारों युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

*समाज में समरसता का प्रतीक*

संजय पाठक जाति, धर्म, वर्ग, पार्टी से ऊपर उठकर काम करते हैं। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी समुदायों के लोगों को साथ लेकर चलने का काम किया है। उनकी छवि एक सर्वधर्म समभाव नेता की है। वे हर वर्ग के साथ संवाद में विश्वास रखते हैं। तेरे दुश्मन तुझे कैसे हराएंगे संजय पाठक के जीवन पर यह पंक्ति बिल्कुल सटीक बैठती है “तेरे दुश्मन तुझे कैसे हराएंगे, जब गरीबों की दुआएं और हजार हाथ वाले की कृपा तेरे साथ है।” संजय पाठक का व्यक्तित्व इतना विशाल है कि नफरत और विरोध उनके सामने टिक नहीं पाते। उनकी सादगी, सहृदयता और जनता से जुड़ाव उन्हें राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में शुमार करता है जो चुनाव नहीं, विश्वास जीतते हैं।कटनी जिले के हर गाँव, हर गली में यदि किसी का नाम श्रद्धा से लिया जाता है, तो वह है संजय पाठक। वे न केवल एक विधायक, मंत्री या नेता हैं, बल्कि एक जननायक हैं। आज जब राजनीति पर स्वार्थ और भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, तब संजय पाठक जैसे नेताओं की उपस्थिति आशा की किरण बनकर चमकती है। नेता वही होता है जो जनता के दुख में साथ हो, और उनके लिए अपनी सुख-सुविधाओं को भी छोड़ दे। कटनी ही नहीं, संपूर्ण मध्यप्रदेश को गर्व है कि उनके पास संजय पाठक जैसा जननायक है  जो सचमुच में गरीबों का मसीहा और राजनीति का बब्बर शेर है।

टिप्पणियाँ

  1. बिल्कुल सही भैया के इसी साहस और शौर्य के कारण लोग उन्हें आदर सम्मान और उनके अतुलनीय प्रेम को हृदय से प्रणाम करते है मेरा भी प्रणाम स्वीकार करें

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