सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पिपरिया सहलावन सचिव के रवैये से त्रस्त हैं सरपंच - उपसरपंच बिना काम लग रहे फर्जी बिल, सरपंच उपसरपंच, पंचों ने कलेक्टर से की शिकायत, काम का पता नहीं और निकल गई 6 लाख की राशि

 पिपरिया सहलावन सचिव के रवैये से त्रस्त हैं सरपंच - उपसरपंच

बिना काम लग रहे फर्जी बिल, सरपंच उपसरपंच, पंचों ने कलेक्टर से की शिकायत, काम का पता नहीं और निकल गई 6 लाख की राशि


 

ढीमरखेड़ा | पंचायत की जो भी राशि हैं उसको निकालकर अपने निजी खर्चे में लगाऊंगा उक्त शीर्षक पढ़कर दंग मत होना यह मामला है जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन का लिहाज़ा ग्राम पंचायत सचिव अनिल दीक्षित ने बिना निर्माण कार्य के राशि को निकालकर आहरित कर लिया। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन में पदस्थ सचिव की कार्यप्रणाली से सरपंच, उपसरपंच, पंच तथा ग्रामवासी बेहद त्रस्त हैं। सचिव के द्वारा मनमाने तरीके से फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित की जा रही हैं और जनता द्वारा निर्वाचित हुये सरपंच को किनारे कर अपने मन से पंचायत का संचालन किया जा रहा हैं।

*आदिवासी होने का उठा रहा फायदा*

सचिव अनिल दीक्षित की कार्यप्रणाली से दुखित सरपंच ने शिकायत में बताया कि में आदिवासी हूं जिस कारण से इनके द्वारा मेरे आदिवासी होने का फायदा उठाया जा रहा हैं और मनमानी पर उतारू हैं। कलेक्टर को शिक़ायत सौपते हुए सरपंच - उपसरपंच और पंचों ने मांग की हैं कि ऐसे भ्रष्टाचारी सचिव को तत्काल हमारी पंचायत से हटाया जावे और किसी अन्य सचिव की यहां पर पदस्थापना की जावे। ग्राम पंचायत के सरपंच मिरखूलाल कोल, उपसरपंच द्रोपती बाई कुम्हार एवं सभी पंचों के द्वारा लिखित में शिकायत दी गई है। तत्संबंध में इनके द्वारा कलेक्टर को बताया गया कि ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन में पदस्थ सचिव अनिल दीक्षित के द्वारा पंचायत में मनमानी की जा रही हैं। फर्जी बिल लगाए जा रहे हैं। सचिव की कार्यप्रणाली से त्रस्त सरपंच ने शिकायत में बताया कि मेरी बिना जानकारी के बिल लगाए जाते हैं और जब मेरे द्वारा सचिव से जानकारी मांगी जाती हैं तो उसके द्वारा यह कहा जाता हैं कि तुम सिर्फ हस्ताक्षर करो, तुम्हारा कोई काम नहीं हैं। इस तरह से पिपरिया सहलावन पंचायत में सरपंच, उपसरपंच और पंचों की जानकारी के बिना ही सचिव के द्वारा शातिर तरीके से 6 लाख रुपए आहरित कर लिए गए हैं जबकि अभी पंचायत में ज्यादा काम हुए ही नहीं हैं। 

*फर्जी दुकानदारों के लग रहे बिल*

इस संबंध में शिक़ायतकर्ताओ ने बताया कि सचिव के द्वारा अपनी जान, पहचान के दुकानदारों के यहां से बिल लगाए जा रहे हैं, कई ऐसे दुकान वाले भी हैं जिनका उक्त व्यवसाय से कोई लेना देना नहीं हैं। दुकानदारों के द्वारा अपने खाते नम्बर लगाकर राशि आहरित कर ली जाती हैं बाद में उक्त राशि का बंदरबांट कर लिया जाता हैं।सचिव अनिल दीक्षित के द्वारा फर्जी बिल वाउचर लगाकर लाखों रुपए का भ्रष्टाचार कर अपनी जेब भर रहे हैं। ग्राम पंचायत में मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान ना देकर, लाखों का वारा न्यारा कर रहे हैं। लेकिन अभी तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन में यह बात देखने को मिल रही है कि गिट्टी, रेत, सीमेंट के भुगतान में लाखों रुपए आहरण कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है।

*बिलों में हो रही लाखों की हेरा फेरी, जिम्मेदार है मौन*

 ग्राम पंचायत पिपरिया सहलावन में लगने वाले बिलों में लाखों रुपए की हेरा - फेरी की जा रही है परंतु जिला पंचायत को इसकी कोई जानकारी नहीं है , जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारी ग्राम पंचायतों में सिर्फ नाम मात्र की जांच का हवाला देकर चुप्पी साध लेते हैं।

*इनका कहना है*

तत्संबंध में शिक़ायत प्राप्त हुई हैं। जांच के लिए जल्द ही टीम का गठन किया जायेगा, जो भी सत्यता आयेगी उसके अनुसार आगामी कार्यवाही की जायेगी।

*शिशिर गेमावत, सीईओ जिला पंचायत कटनी*

टिप्पणियाँ

popular post

सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत

 सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत    कटनी ।  मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बहोरीबंद विकासखंड में संचालित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम स्लीमनाबाद स्थित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते क्रमांक 3790886493 से विभिन्न व्यक्तियों/अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन की जांच की मांग की है और तौफिक अहमद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आजीविका गतिविधियों के लिए उछऋ को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में लगभग 18.24 लाख के कथित ट्रांसफर का उल्लेख है। इसके अलावा एक अन्य बिंदु में उछऋ खाते से लगभग 1.15 करोड़ से अधिक राशि ट्...

पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता

 पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता ढीमरखेड़ा ।  कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। जानकारी के अनुसार, गांव में तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच स्थित ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ नजर आया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के बीच मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलते ही क्षेत्र में सतर्कता का माहौल बन गया।लोगों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्र या घाट के आसपास मौजूद रहता है, तो किसी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से घाट के आसपास आने-जाने वाले ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करे और मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की...

एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप

 एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप ढीमरखेड़ा ।  तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि सहकारिता एवं खाद्य विभाग से जुड़े जिम्मेदारों द्वारा एक ही विक्रेता पर दो, तीन यहां तक कि चार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण का कार्य संभालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक विक्रेता से कई दुकानों का संचालन किस नियम और किस आदेश के तहत कराया जा रहा है।बताया जा रहा है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में विक्रेताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति को एक से अधिक दुकानों का वितरण कार्य सौंपा जा रहा है तो इसके पीछे सक्षम अधिकारी का आदेश, निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन होना आवश्यक है। क्षेत्र में इसी बिंदु को लेकर चर्चाएं तेज हैं...