भ्रष्टाचार उस लेवल पर पहुंच चुका है कि बंदा रिश्वत लेकर भी अगर टाइम से काम कर दे तो उसे ईमानदारो की कैटेगरी में गिना जाता है, जब रिश्वत लेकर समय पर काम करना भी ‘ईमानदारी’ कहलाने लगे
भ्रष्टाचार उस लेवल पर पहुंच चुका है कि बंदा रिश्वत लेकर भी अगर टाइम से काम कर दे तो उसे ईमानदारो की कैटेगरी में गिना जाता है, जब रिश्वत लेकर समय पर काम करना भी ‘ईमानदारी’ कहलाने लगे कटनी | देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा धब्बा यदि किसी एक शब्द में समेटा जाए, तो वह है—भ्रष्टाचार। यह अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि खुलेआम स्वीकार कर ली गई व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। हालत इतनी विकृत हो चुकी है कि यदि कोई अधिकारी रिश्वत लेने के बाद भी समय पर काम कर दे, तो उसे “ईमानदार” की श्रेणी में रख दिया जाता है। यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो हमारे तंत्र में गहराई तक जड़ें जमा चुकी है। एक समय था जब ईमानदारी का अर्थ था निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा।लेकिन आज यह परिभाषा बदल चुकी है। अब ईमानदारी का पैमाना गिरकर इतना नीचे आ गया है कि रिश्वत लेना भी “सामान्य” और “व्यवहारिक” माना जाने लगा है। आम नागरिक यह मानकर चल रहा है कि बिना “चाय-पानी” के कोई काम नहीं होगा। यह स्वीकृति ही भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी दफ्तरों की तस्वीर किसी से छिपी नह...