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कटनी में भ्रष्टाचार के आरोप, क्या परिवहन विभाग पर उठते सवालों का जवाब मिलेगा,भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखना चाहिए कटनी का यह मामला एक परीक्षा है प्रशासन के लिए भी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए भी

 कटनी में भ्रष्टाचार के आरोप, क्या परिवहन विभाग पर उठते सवालों का जवाब मिलेगा,भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखना चाहिए कटनी का यह मामला एक परीक्षा है प्रशासन के लिए भी और राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए भी



कटनी |  मध्यप्रदेश के कटनी जिले में परिवहन विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के केंद्र में है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जुड़े अधिकारी संतोष पाल पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ रहा है। सबसे गंभीर आरोप आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े हैं।आर्थिक अपराध अन्वेषण संगठन (EOW) द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रकरण दर्ज किया गया, जिसमें छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति उजागर होने की बात सामने आई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने मामले को और गहरा कर दिया। ED के अनुसार लगभग ₹3.38 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई, जबकि वैध आय मात्र ₹73 लाख बताई गई है। कुल संपत्ति लगभग ₹4.80 करोड़ आंकी गई, जिसमें ₹4 करोड़ से अधिक की संपत्ति संदिग्ध मानी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई गई है। आर्थिक मामलों के अलावा जमीनी स्तर पर भी कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि फिटनेस और परमिट के नाम पर अवैध वसूली की जाती है।वहीं, ओवरलोडिंग और चेकिंग के नाम पर दबाव बनाकर पैसे लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कुछ मामलों में ट्रक चालकों के साथ मारपीट तक के आरोप लगाए गए हैं, जो स्थिति को और चिंताजनक बनाते हैं।यह पहला मौका नहीं है जब इस अधिकारी का नाम विवादों में आया हो। वर्ष 2021 में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक ऑटो चालक को कथित तौर पर फंसाने का आरोप लगा था। हालांकि उस मामले की स्थिति क्या रही, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐसे आरोपों की पुनरावृत्ति से विभाग की छवि पर असर पड़ना स्वाभाविक है। सबसे बड़ा सवाल राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का है। जब जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं राव उदय प्रताप सिंह हैं, तो ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी की पदस्थापना पर प्रश्न उठना लाज़िमी है। क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर सिस्टम में कहीं गहरी खामी? आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष एडवोकेट अनिल सिंह सेंगर ने इस पूरे मामले को उठाते हुए संबंधित अधिकारी को तत्काल कटनी से हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता।यह मामला केवल एक जिले या एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है, जहां भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद कार्रवाई की गति धीमी रहती है। जरूरत है पारदर्शी जांच, जवाबदेही तय करने और ऐसे मामलों में त्वरित निर्णय लेने की, ताकि शासन व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे।

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