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शराब की दुकानें खोल दी जाएं तो सबसे पहले वही लोग दिखेंगे जिनके पास खाने के पैसे तक नहीं हैं

 शराब की दुकानें खोल दी जाएं तो सबसे पहले वही लोग दिखेंगे जिनके पास खाने के पैसे तक नहीं हैं कटनी  |  समाज का यह विडंबनापूर्ण दृश्य किसी फ़िल्मी कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे आसपास रोज़ दिखाई देने वाली कड़वी हकीकत है। सरकार जब भी शराब की दुकानें खोलने का निर्णय लेती है, तो सुबह - सुबह दुकानों के बाहर जो भीड़ सबसे पहले नज़र आती है, उसमें बड़ी संख्या उन्हीं लोगों की होती है जो रोज़ के खाने के लिए भी संघर्ष करते हैं। गरीब मजदूर, दिहाड़ी पर काम करने वाले, आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के सदस्य ये सभी सबसे पहले लाइन में दिखाई देते हैं। *गरीबी का दंश और नशे का आकर्षण* कुछ लोग इसे केवल ‘व्यक्तिगत कमजोरी’ कहकर टाल देते हैं, पर वास्तविकता कहीं अधिक जटिल होती है। गरीबी केवल पैसे की कमी नहीं है; यह सामाजिक तनाव, मानसिक दबाव, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और हर दिन की जद्दोजहद से उपजने वाली हताशा का नाम भी है। ऐसे में कई लोग शराब में ‘क्षणिक राहत’ ढूँढते हैं। उन्हें लगता है कि कुछ देर के नशे में रहने से दुख कम हो जाएँगे, समस्याएँ हल्की पड़ जाएँगी। यही सोच धीरे-धीरे उन्हें इस दुष्चक...

थाना ढीमरखेड़ा में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण हेतु विशेष शिविर का आयोजन

 थाना ढीमरखेड़ा में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण हेतु विशेष शिविर का आयोजन ढीमरखेड़ा ।  पुलिस प्रशासन द्वारा जनसुनवाई की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुचारू बनाने के उद्देश्य से थाना ढीमरखेड़ा में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण हेतु विशेष शिविर का आयोजन किया गया । यह विशेष शिविर पुलिस अधीक्षक कटनी अभिनय विश्वकर्मा के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अधिक से अधिक लंबित शिकायतों का त्वरित एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए ।  निर्देशों के आधार पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटनी डॉ. संतोष डेहरिया तथा एसडीओपी स्लीमनाबाद आकांक्षा चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।  शिविर में थाना क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों एवं वार्डों से आए शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक शिकायत की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कई शिकायतों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि कुछ मामलों में आवश्यक जाँच कर त्वरित समाधान प्रदान करने का आश्वासन दिया गय...

सबको जीवन दान देने वाला डॉक्टर आज अपने जीवन को छोड़कर चला गया, क्षेत्र की आस आज मिट गई, कई बच्चों को यमराज के मुख से बचाया उमरियापान क्षेत्र शोक में डूबा, ख्यातिलब्ध वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.सी. मिश्रा का निधन

 सबको जीवन दान देने वाला डॉक्टर आज अपने जीवन को छोड़कर चला गया, क्षेत्र की आस आज मिट गई, कई बच्चों को यमराज के मुख से बचाया उमरियापान क्षेत्र शोक में डूबा, ख्यातिलब्ध वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.सी. मिश्रा का निधन ढीमरखेड़ा ।  क्षेत्र के ख्यातिलब्ध एवं जनप्रिय वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.सी. मिश्रा का आज सुबह 89 वर्ष की आयु में दुखद निधन हो गया ।  पिछले कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे, जिसके बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई और आज प्रातः उन्होंने अंतिम सांस ली ।  उनके निधन की खबर से पूरे उमरियापान क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है । डॉ. मिश्रा ने अपने लंबे चिकित्सा-सेवा काल में न केवल उमरियापान, बल्कि आस-पास के ग्रामीण अंचलों में भी असंख्य मरीजों को सेवा एवं जीवनदान दिया ।  सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण वे क्षेत्र में जन चिकित्सक के रूप में पहचाने जाते थे ।  कम संसाधनों में भी वर्षों तक वे मरीजों का इलाज करते रहे और कई परिवारों के लिए वे एक संरक्षक की भूमिका निभाते थे।स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने उनके निधन को क्षेत्र के...

धान खरीदी केंद्र सिहुड़ी अव्यवस्थाओं और मनमानी का गढ़, किसानों को मिल रहा ठेंगा , खरीदी प्रभारी नारायण पटेल के हौसले बुलंद, नहीं हैं हड़प्पा की सुविधा

 धान खरीदी केंद्र सिहुड़ी अव्यवस्थाओं और मनमानी का गढ़, किसानों को मिल रहा ठेंगा , खरीदी प्रभारी नारायण पटेल के हौसले बुलंद, नहीं हैं हड़प्पा की सुविधा  कटनी  |  धान खरीदी केंद्रों की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित तरीके से धान बेचने की सुविधा मिले। सरकारें दावा करती हैं कि किसानों के हित ही उनकी प्राथमिकता हैं, परंतु जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों को कटघरे में खड़ा कर देती है। सिहुड़ी धान खरीदी केंद्र की वास्तविक स्थिति इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां अव्यवस्थाओं, मनमानी और नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। केंद्र प्रभारी नारायण पटेल के संचालन में चल रहे इस केंद्र की हालत ऐसी है कि यहाँ अन्नदाताओं को सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी और अपमान ही हासिल हो रहा है। *सुविधाओं के नाम पर जीरो व्यवस्था किसानों की मजबूरी का मज़ाक* धान बेचने पहुंचे किसान बताते हैं कि केंद्र में बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। सुबह से शाम तक लंबी कतारों में खड़े रहना उनकी मजबूरी बन गई है। खेतों से धान लाकर घंटों इंतजार...

कानून का हाथ लंबा बताया गया था पर पहुंचता हमेशा कमजोरों तक ही हैं

 कानून का हाथ लंबा बताया गया था पर पहुंचता हमेशा कमजोरों तक ही हैं कटनी  |  कहा जाता है कि कानून का हाथ लंबा होता है अर्थात अपराधी चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कानून अंततः उसे पकड़ ही लेता है।भारतीय लोकतंत्र में भी यही आदर्श स्थापित किया गया है कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। संविधान में न्याय, स्वतंत्रता और समानता को आधार बनाया गया है। परंतु वास्तविक धरातल पर खड़े होकर देखें तो यह आदर्श कई बार खोखला प्रतीत होता है।कानून का हाथ भले ही लंबा हो, पर उसकी दिशा हमेशा कमजोर और गरीब वर्ग की ओर अधिक मुड़ती दिखाई देती है, जबकि धनवान, प्रभावशाली या सत्ता के करीब खड़े लोग कई बार आसानी से उसके दायरे से बाहर निकल जाते हैं। यह विरोधाभास सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, आर्थिक विषमता और प्रशासनिक ढांचों की खामियों का मिश्रित परिणाम है । *गरीब के लिए न्याय एक कठिन संघर्ष* भारत का एक बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर है। गांवों में बसे लोगों से लेकर शहरों की झुग्गियों में रहने वाले परिवारों तक, जब वे किसी अन्याय का सामना करते हैं और न्याय के लिए अदाल...

कानून का हाथ लंबा बताया गया था पर पहुंचता हमेशा कमजोरों तक ही हैं, गरीब अगर न्याय मांगे तो फ़ाइल खो जाती हैं अमीर इशारा करे तो क़ानून दौड़कर आता हैं

 कानून का हाथ लंबा बताया गया था पर पहुंचता हमेशा कमजोरों तक ही हैं, गरीब अगर न्याय मांगे तो फ़ाइल खो जाती हैं अमीर इशारा करे तो क़ानून दौड़कर आता हैं कटनी  |  कहा जाता है कि कानून का हाथ लंबा होता है अर्थात अपराधी चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कानून अंततः उसे पकड़ ही लेता है।भारतीय लोकतंत्र में भी यही आदर्श स्थापित किया गया है कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं। संविधान में न्याय, स्वतंत्रता और समानता को आधार बनाया गया है। परंतु वास्तविक धरातल पर खड़े होकर देखें तो यह आदर्श कई बार खोखला प्रतीत होता है।कानून का हाथ भले ही लंबा हो, पर उसकी दिशा हमेशा कमजोर और गरीब वर्ग की ओर अधिक मुड़ती दिखाई देती है, जबकि धनवान, प्रभावशाली या सत्ता के करीब खड़े लोग कई बार आसानी से उसके दायरे से बाहर निकल जाते हैं। यह विरोधाभास सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, आर्थिक विषमता और प्रशासनिक ढांचों की खामियों का मिश्रित परिणाम है । *गरीब के लिए न्याय एक कठिन संघर्ष* भारत का एक बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर है। गांवों में बसे लोगों से लेकर शहरों की झुग्गियों ...

मध्यान्ह भोजन एवं शिक्षा की गुणवत्ता को परखने जिला पंचायत की सीईओ सुश्री कौर ने विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण, नमन ने बताया पानी का महत्व और छबि ने सुनाई कविता, सुश्री कौर ने सराहना कर बढ़ाया हौसला, कुपोषण को लेकर जताई चिंता

 मध्यान्ह भोजन एवं शिक्षा की गुणवत्ता को परखने जिला पंचायत की सीईओ सुश्री कौर ने विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण, नमन ने बताया पानी का महत्व और छबि ने सुनाई कविता, सुश्री कौर ने सराहना कर बढ़ाया हौसला, कुपोषण को लेकर जताई चिंता कटनी  |  आपका नाम क्या है, किस कक्षा में पढ़ते हो, आज क्या पढ़ा और क्या खाया... और भविष्य में आप क्या बनना चाहते हैं, कुछ ऐसे प्रश्नों के जवाब सुनकर छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर, डॉक्टर,इंजीनियर और अन्य उच्च पदों पर जाने की इच्छा जताई। ऐसे कुछ उत्तर जिला पंचायत की सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर द्वारा माध्यमिक शाला बड़गांव में निरीक्षण के दौरान पूछे गए सवालों के फलस्वरुप कक्षा सातवीं के छात्र-छात्राओं से मिले। *इसके लिए क्या तैयारी की आपने* छात्र-छात्राओं की हौसला अफजाई करते हुए सुश्री कौर ने कहा कि सपना साकार करने के लिए आप कैसी तैयारी कर रहे हैं। आप पिछले 3 सालों के प्रश्नपत्रों को हल करिए। पढ़ाई के लिए नियमित अध्ययन एवं जिज्ञासा का होना जरूरी है। इस दौरान अधिकारियों ने उपस्थिति पंजी का अवलोकन किया। विद्यालय में सबसे अधिक उपस्थित होने वा...