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सर्वर डाउन और नए नियमों से किसान परेशान , पंजीयन केंद्रों पर भटकने को मजबूर अन्नदाता, फसल उगाना बंद कर दे किसान तो सरकार को भी समझ में आ जाए और अधिकारी को भी फिर पैसा को ही खा लेंगे

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ढीमरखेड़ा ।  तहसील ढीमरखेड़ा क्षेत्र में इन दिनों किसानों के पंजीयन कराने का काम सर्वर की धीमी गति और तकनीकी कड़ाई की वजह से ठप सा पड़ गया है। पंजीयन केंद्रों पर सुबह से लाइन में लगने वाले अन्नदाता दिनभर इंतजार करने के बाद निराश होकर घर लौटने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि क्षेत्र के आधे से अधिक किसानों का पंजीयन अब तक नहीं हो सका है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

*हंसता हुआ आता है किसान, रोता हुआ लौटता है*

पंजीयन केंद्रों पर स्थिति यह बन गई है कि किसान अपने दस्तावेजों के साथ बड़ी उम्मीद लेकर केंद्रों तक पहुंचते हैं, लेकिन सर्वर की समस्या के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। स्थानीय किसानों का कहना है कि "हम केंद्र पर हंसते हुए आस लेकर आते हैं, लेकिन दिनभर की चकल्लस और पंजीयन न होने के बाद निराश और रोते हुए वापस जाते हैं।"

*नए नियमों ने बढ़ाई मुसीबत*

किसानों ने बताया कि इस बार पोर्टल में किए गए नए तकनीकी बदलावों ने गति को पूरी तरह धीमा कर दिया है पहले एक ही लॉगिन आईडी को कई लैपटॉप या सिस्टम में खोलकर तेजी से काम कर लिया जाता था, जिससे कम समय में अधिक पंजीयन हो जाते थे। नए नियम के तहत अब एक आईडी केवल एक ही लैपटॉप में संचालित हो पा रही है। इसके कारण कतार में खड़े किसानों का नंबर आने में घंटों का समय लग रहा है। सारे कड़े नियम और तकनीकी बंदिशें आखिर किसानों के लिए ही क्यों बनती हैं? जब तकनीक से सहूलियत मिलनी चाहिए, तब हमें सर्वर और नियमों के जाल में उलझाया जा रहा है।

*कलेक्टर और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग*

किसानों और क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाए। सर्वर क्षमता बढ़ाई जाए और एक आईडी से बहु-सिस्टम लॉगिन की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए या वैकल्पिक प्रबंध किए जाएं, ताकि अंतिम तिथि से पूर्व सभी किसानों का पंजीयन सुचारू रूप से पूरा हो सके।

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