ग्राम कटरिया के बीजापुरी मोड़ के पास जंगल पर अतिक्रमण का आरोप, ट्रैक्टरों से जुताई और सागौन कटाई की शिकायत
ग्राम कटरिया के बीजापुरी मोड़ के पास जंगल पर अतिक्रमण का आरोप, ट्रैक्टरों से जुताई और सागौन कटाई की शिकायत
ढीमरखेड़ा । कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कटरिया के बीजापुरी मोड़ के समीप जंगल क्षेत्र में कथित अवैध अतिक्रमण और जंगल की भूमि पर ट्रैक्टरों से जुताई किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगल साफ कर भूमि पर कब्जा किया जा रहा है तथा बेशकीमती सागौन सहित अन्य पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कटे हुए सागौन के पेड़ों को पड़ोसी उमरिया जिले में ले जाकर बेचा जाता है। उनका यह भी कहना है कि वन संपदा के लगातार दोहन के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे लोगों में नाराजगी है।
*700 एकड़ जंगल प्रभावित होने का दावा*
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 700 एकड़ जंगल धीरे-धीरे समाप्त हो चुका है। उनका दावा है कि कभी घने जंगल के रूप में पहचान रखने वाला इलाका अब वीरान होता जा रहा है। कई स्थानों पर बड़े सागौन के वृक्षों की जगह खेत तैयार किए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
*अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कथित रूप से कुंडम प्रोजेक्ट के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध अतिक्रमण और जंगल की कटाई जारी है। मामले में जब कुंडम प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट रेंज ऑफिसर (PRO) मनीष रोर से संपर्क किया गया तो उन्होंने संबंधित अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच कराने का आश्वासन दिया। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि देर रात तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अधिकारी कभी-कभी क्षेत्र का दौरा करते हैं, लेकिन कथित रूप से संबंधित लोगों से मुलाकात के बाद बिना किसी ठोस कार्रवाई के लौट जाते हैं।
*पर्यावरण पर बढ़ता खतरा*
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार जंगल की कटाई और अतिक्रमण से पर्यावरण पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। जंगल समाप्त होने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जलस्रोत और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो शेष वन क्षेत्र भी नष्ट हो सकता है।
*उच्चस्तरीय जांच की मांग*
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जंगल की भूमि का सीमांकन कराने तथा यदि जांच में अवैध अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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