ग्राम पंचायत सगौना के ग्राम सिवनी में एक साल से बंद है वाटर सप्लाई, शोपीस बनी पानी की टंकी, हर घर नल, हर घर जल योजना पर उठे सवाल, आदिवासी बस्ती के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान, छह माह तक वाटर सप्लाई चलाने वाले का मानदेय भी बकाया
ग्राम पंचायत सगौना के ग्राम सिवनी में एक साल से बंद है वाटर सप्लाई, शोपीस बनी पानी की टंकी, हर घर नल, हर घर जल योजना पर उठे सवाल, आदिवासी बस्ती के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान, छह माह तक वाटर सप्लाई चलाने वाले का मानदेय भी बकाया
ढीमरखेड़ा । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सगौना के ग्राम सिवनी में ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में हर घर नल, हर घर जल योजना के तहत बनाई गई पानी की टंकी करीब एक साल से बंद पड़ी है। वाटर सप्लाई बंद होने के कारण ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई पानी की टंकी अब महज शोपीस बनकर रह गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव की आदिवासी बस्ती में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों तक नल कनेक्शन होने के बावजूद नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था दूसरे साधनों से करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के तहत गांव-गांव में पानी पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया है, लेकिन ग्राम पंचायत सगौना के ग्राम सिवनी में करीब एक साल से वाटर सप्लाई बंद होने के कारण योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्रामीणों में जिम्मेदारों के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है।
*छह माह तक वाटर सप्लाई चलाने वाले का मानदेय भी बकाया*
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में करीब छह माह तक वाटर सप्लाई का संचालन करने वाले व्यक्ति को उसके कार्य का मानदेय भी अब तक नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पानी की सप्लाई शुरू की गई थी, तब कुछ समय तक व्यवस्था संचालित हुई, लेकिन बाद में सप्लाई बंद हो गई। अब लंबे समय से टंकी और वाटर सप्लाई व्यवस्था बंद पड़ी है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों और पंचायत के जिम्मेदारों से मामले की जांच कराने, बंद पड़ी वाटर सप्लाई को जल्द शुरू कराने तथा वाटर सप्लाई संचालित करने वाले व्यक्ति के बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन की व्यवस्था मौजूद है तो उसका लाभ ग्रामीणों को मिलना चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेते हुए जल्द से जल्द पेयजल व्यवस्था बहाल करनी चाहिए, ताकि आदिवासी बस्ती सहित पूरे गांव के लोगों को राहत मिल सके।

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