5.25 करोड़ के जनपद भवन निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग प्लिंथ में काली मिट्टी से भराई और तीन फीट गहरी नींव पर पिलर खड़े करने के आरोप, सीईओ बोले इस्टीमेट से मिलान कर होगी जांच, गड़बड़ी मिली तो होगी कार्रवाई
5.25 करोड़ के जनपद भवन निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग प्लिंथ में काली मिट्टी से भराई और तीन फीट गहरी नींव पर पिलर खड़े करने के आरोप, सीईओ बोले इस्टीमेट से मिलान कर होगी जांच, गड़बड़ी मिली तो होगी कार्रवाई
ढीमरखेड़ा । कटनी जिले के ढीमरखेड़ा में लगभग 5.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन नवीन जनपद पंचायत भवन की गुणवत्ता को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता से समझौता किया गया है, तो भविष्य में भवन की मजबूती और आमजन की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लिंथ बीम बनने के बाद भराई कार्य में लगभग 90 प्रतिशत काली मिट्टी और केवल 10 प्रतिशत मुरम का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परत-दर-परत भराई, पानी का छिड़काव एवं मशीन से कंपेक्शन किया जाना चाहिए, लेकिन मौके पर बिना लेयरवार कंपेक्शन के जेसीबी से सीधे मिट्टी डालकर भराई की जा रही है।
*तीन फीट गहरी नींव पर पिलर खड़े करने का आरोप*
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि भवन के कई पिलरों की फाउंडेशन मात्र करीब तीन फीट गहरी खोदी गई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की इस सार्वजनिक परियोजना में नींव की गहराई, डिजाइन एवं निर्माण गुणवत्ता की विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य स्वीकृत ड्राइंग एवं इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप है या नहीं।
*रेत की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल*
निरीक्षण के दौरान समाजसेवी संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर ऊपर की परत में उच्च गुणवत्ता वाली महानदी की रेत दिखाई जा रही है, जबकि नीचे दतला नदी की भसुआ रेत रखी गई है, जिसका उपयोग निर्माण में किया जा रहा है। उन्होंने प्लिंथ में काली मिट्टी की भराई किए जाने पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।
*सीईओ ने दिए जांच के निर्देश*
जनपद पंचायत के सीईओ यजुवेंद्र कोरी ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान इंजीनियर एवं ठेकेदार मौके पर उपस्थित नहीं थे। अब निर्माण कार्य का स्वीकृत इस्टीमेट एवं तकनीकी प्रावधानों से मिलान कराया जाएगा। यदि जांच में निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
*ग्रामीणों की मांग, होना चाहिए जांच*
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि गुणवत्ता में कमी या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर सार्वजनिक धन की सुरक्षा एवं निर्माण कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

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