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आस्था की शक्ति चैनल और सुनील दुबे , गांव से निकला वह दीपक जो अंधेरों को मिटा रहा है

 आस्था की शक्ति चैनल और सुनील दुबे , गांव से निकला वह दीपक जो अंधेरों को मिटा रहा है



ढीमरखेड़ा |  ढीमरखेड़ा  की पत्रकारिता परंपरा हमेशा से सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों पर आधारित रही है। समय के साथ पत्रकारिता की शैली बदली है, माध्यम बदले हैं, लेकिन पत्रकार का मूल दायित्व “सत्य को सामने लाना और जनता की आवाज़ बनना” कभी नहीं बदला। कटनी जिले की ग्राम पंचायत पिड़रई से निकलकर एक नए पत्रकार सुनील दुबे ने इसी दायित्व को अपना जीवन-धर्म मान लिया है। अपने चैनल “आस्था की शक्ति” के माध्यम से वह न सिर्फ क्षेत्र की समस्याओं को सामने ला रहे हैं, बल्कि उन समस्याओं को हल कराने के लिए प्रशासनिक हलकों तक पहुँचाने का कार्य भी कर रहे हैं। सुनील दुबे जी का यह प्रयास एक ऐसे दौर में और भी सराहनीय बन जाता है, जब पत्रकारिता पर व्यावसायिक दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रामक खबरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकला यह युवा पत्रकार अपने साहस, ईमानदारी और निडर रिपोर्टिंग के कारण लोगों की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है। ग्राम पंचायत पिड़रई के निवासी सुनील दुबे का जीवन किसी साधारण ग्रामीण युवक की तरह शुरू हुआ। लेकिन बचपन से ही उनमें समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता और सच के प्रति निष्ठा थी। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने तय किया कि क्षेत्र की आवाज़ बनने के लिए उन्हें पत्रकारिता का रास्ता अपनाना होगा। यही सोचकर उन्होंने “आस्था की शक्ति” चैनल की नींव रखी। यह चैनल धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय होता गया, क्योंकि इसमें सिर्फ चमक-धमक नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई और जनता के दुख-दर्द की कहानियाँ थीं।

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