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क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह कर रहें हैं भव्य कार्यक्रम का आयोजन, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ उत्सव, सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का एक ऐतिहासिक कदम, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने सभी कार्यकर्ताओं से समय पर पहुंचने की अपील की हैं

 क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह कर रहें हैं भव्य कार्यक्रम का आयोजन, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ उत्सव, सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का एक ऐतिहासिक कदम, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने सभी कार्यकर्ताओं से समय पर पहुंचने की अपील की हैं 



ढीमरखेड़ा |  धर्म, संस्कृति और परंपरा को सहेजने के प्रयासों में बड़वारा क्षेत्र के विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके नेतृत्व में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और उसके मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की अनूठी पहल के तहत राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ उत्सव को भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने का कार्य भी करेगा।अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भारतीय संस्कृति और धर्म की एक गौरवशाली उपलब्धि है। यह केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। वर्षों के संघर्ष और प्रयासों के बाद यह सपना साकार हुआ, और 2024 में इसकी प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का बीड़ा उठाया है, जो धार्मिकता और सामाजिक एकता का संदेश देगा।

*कार्यक्रम की विशेषताएं*

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ उत्सव का आयोजन 22 जनवरी को बड़वारा के शारदा मॉडल स्कूल में किया जाएगा। इस अवसर पर सुंदरकांड पाठ, कार्यकर्ता सम्मेलन और प्रीतिभोज का आयोजन होगा। कार्यक्रम का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसमें सभी बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है। सुबह 10 बजे से कार्यक्रम का शुभारंभ सुंदरकांड पाठ से होगा। यह पाठ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मनोबल बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में भी सहायक होगा। सुंदरकांड पाठ के बाद कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें राम मंदिर निर्माण के महत्व, समाज में इसकी भूमिका, और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम का समापन प्रीतिभोज के साथ होगा, जिसमें सभी श्रद्धालु और कार्यकर्ता एक साथ बैठकर भोजन करेंगे, जो सामाजिक एकता का प्रतीक होगा।

*योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर का संदेश*

योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने समस्त कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से इस कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का एक अवसर है। उन्होंने सभी से इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर इसे सफल बनाने की अपील की है। उनका मानना है कि सनातन धर्म को मजबूत करने के लिए इस तरह के आयोजनों की आवश्यकता है, जो समाज को एकजुट करने और आने वाली पीढ़ियों को हमारी परंपराओं से जोड़ने में सहायक हों।

*राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा उत्सव का महत्व*

इस कार्यक्रम का महत्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। राम मंदिर के प्रति श्रद्धा और आस्था को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास। विभिन्न वर्गों और समुदायों को एक साथ लाकर समाज में एकता और भाईचारे का संदेश। धर्म और संस्कृति के मूल्यों को प्रचारित और संरक्षित करना। कार्यकर्ता सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना। रामायण जैसे ग्रंथों के पाठ के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करना।

*कार्यक्रम की तैयारी और जनसंपर्क अभियान*

इस भव्य आयोजन की तैयारी में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की टीम जुटी हुई है। जनसंपर्क अभियान के तहत क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने सभी बूथ अध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों से व्यक्तिगत रूप से पहुंचने का आग्रह किया है। साथ ही, सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार माध्यमों के जरिए भी कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

*समाज पर प्रभाव*

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ का उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज पर गहरा प्रभाव डालने वाला कार्यक्रम है। सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा। युवाओं को सनातन धर्म से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करेगा। धर्म और समाज के बीच के संबंधों को मजबूत करेगा। धीरेन्द्र बहादुर सिंह की यह पहल न केवल सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि समाज में एक नई ऊर्जा का संचार भी करेगी। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वर्षगांठ का यह उत्सव धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बनकर आने वाले समय में एक नई दिशा प्रदान करेगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेना न केवल हमारे धर्म और संस्कृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना है, बल्कि इसे आगे बढ़ाने का एक प्रयास भी है। आइए, इस पावन अवसर पर सम्मिलित होकर धर्म और समाज की इस अनूठी पहल को सफल बनाएं।

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