सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मृत्यु के बाद आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है आत्मा, ईश्वर का प्रतिबिंब है और ईश्वर के समान गुण रखती है, ईश्वर ने खुद शरीर रूपी घर दिया हैं मृत्यु के बाद घर (आत्मा) बदल दिया जाता हैं पर रहने वाला वही होता हैं

 मृत्यु के बाद आत्मा दूसरे शरीर में चली जाती है आत्मा, ईश्वर का प्रतिबिंब है और ईश्वर के समान गुण रखती है, ईश्वर ने खुद शरीर रूपी घर दिया हैं मृत्यु के बाद घर (आत्मा) बदल दिया जाता हैं पर रहने वाला वही होता हैं 



ढीमरखेड़ा |  आत्मा को भारतीय ग्रंथों में "अहम् ब्रह्मास्मि" (मैं ब्रह्म हूँ) के सिद्धांत से जोड़ा गया है। इसका अर्थ यह है कि आत्मा और परमात्मा में कोई भिन्नता नहीं है। आत्मा अनंत, अजर-अमर, चेतन और ज्ञानस्वरूप है। इसे नष्ट नहीं किया जा सकता, जैसा कि भगवद्गीता में कहा गया है,

"नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।"

(अध्याय 2, श्लोक 23)

इस श्लोक का अर्थ है कि आत्मा को न तो शस्त्र काट सकते हैं, न आग जला सकती है, न जल गीला कर सकता है और न वायु सुखा सकती है। यह आत्मा ईश्वर का ही प्रतिबिंब है और उसके समान गुण रखती है, जैसे कि शुद्धता, प्रेम, करुणा और शांति।

*आत्मा और शरीर का संबंध*

ईश्वर ने आत्मा के लिए शरीर को एक साधन के रूप में प्रदान किया है। शरीर केवल एक "घर" है, जिसमें आत्मा निवास करती है। शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा शाश्वत। शरीर पंच तत्वों  पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है, और मृत्यु के बाद यह इन्हीं तत्वों में विलीन हो जाता है। लेकिन आत्मा इन भौतिक तत्वों से परे है। मृत्यु के समय आत्मा इस शरीर को छोड़कर एक नए शरीर में चली जाती है। यह प्रक्रिया उसी तरह है जैसे कोई व्यक्ति पुराने कपड़े छोड़कर नए कपड़े पहनता है। गीता में यह कहा गया है,

"वासांसि जीर्णानि यथा विहाय,

नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।"

(अध्याय 2, श्लोक 22)

इस श्लोक में श्रीकृष्ण समझाते हैं कि आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नए शरीर को धारण करती है।

*मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र*

मृत्यु के बाद आत्मा को एक नए शरीर की प्राप्ति होती है। यह चक्र कर्म सिद्धांत पर आधारित है। हर व्यक्ति के कर्म उसके अगले जन्म को निर्धारित करते हैं। यदि किसी ने अच्छे कर्म किए हैं, तो उसे सुखद जीवन का अनुभव होता है, और बुरे कर्मों का फल कष्ट के रूप में मिलता है। पिछले जन्मों के कर्म। वर्तमान जन्म में भोगने योग्य कर्म। वर्तमान में किए जा रहे कर्म। पुनर्जन्म की प्रक्रिया आत्मा के कर्मों के आधार पर होती है। आत्मा का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना है, जो तभी संभव है जब आत्मा इस चक्र से मुक्त हो जाए।

*ईश्वर और आत्मा का संबंध*

ईश्वर और आत्मा का संबंध गहरे आध्यात्मिक स्तर पर समझा जा सकता है। आत्मा को "जीवात्मा" कहा जाता है, जबकि ईश्वर को "परमात्मा"। जीवात्मा परमात्मा का अंश है, जैसा कि भगवद्गीता में कहा गया है:

"ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।"

ईश्वर ने आत्मा को स्वतंत्र इच्छा और विवेक प्रदान किया है, ताकि वह सही और गलत का निर्णय ले सके।

*मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा*

मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का वर्णन कई ग्रंथों में किया गया है। आत्मा मृत्यु के तुरंत बाद शरीर को त्याग देती है और एक विशेष मार्ग से गुजरती है। इसे "पितृ मार्ग" या "देवयान मार्ग" कहा जाता है। आत्मा के कर्मों और जीवन के दौरान किए गए कार्यों के आधार पर उसका अगला जन्म तय होता है। साधारण कर्मों के आधार पर आत्मा इस मार्ग से गुजरती है। उच्च आध्यात्मिक कर्म करने वाले इस मार्ग से जाते हैं। आत्मा का यह परिवर्तन ईश्वर की कृपा और कर्मों के आधार पर होता है।

*आत्मा का उद्देश्य*

आत्मा का अंतिम उद्देश्य "मोक्ष" प्राप्त करना है। मोक्ष का अर्थ है जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होना और परमात्मा में लीन हो जाना। यह तब संभव है जब आत्मा अपने कर्मों से मुक्त हो जाए और ज्ञान, भक्ति और ध्यान के माध्यम से परमात्मा से जुड़ जाए।

*मृत्यु और जीवन का संतुलन*

जीवन और मृत्यु एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मृत्यु के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। यह ब्रह्मांडीय नियम है कि जो जन्मा है, उसे एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना है। लेकिन आत्मा का अस्तित्व शाश्वत है।आत्मा का सिद्धांत हमें यह सिखाता है कि मृत्यु एक अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह हमें अपने जीवन में सही कर्म करने, सत्य का पालन करने और अपने लक्ष्य (मोक्ष) की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। ईश्वर ने हमें शरीर दिया है, लेकिन यह आत्मा का अस्थायी आवास है। आत्मा के गुण ईश्वर के समान हैं, और इसका उद्देश्य परमात्मा से मिलन करना है। मृत्यु के बाद आत्मा का शरीर बदलना एक प्रक्रिया है, लेकिन आत्मा की प्रकृति शाश्वत और अपरिवर्तनीय रहती है।

टिप्पणियाँ

popular post

शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द

 शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द ढीमरखेड़ा |  ग्राम झिन्ना पिपरिया के प्रतिष्ठित कोपारिहा परिवार में जन्मे, जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री अवनीश कांत मिश्रा का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे श्री सीताराम जी मिश्रा के बड़े सुपुत्र थे और अपने सरल स्वभाव, कर्मठता व सेवा भावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। श्री मिश्रा बचपन से ही मेधावी रहे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रिपल एम.ए. तक की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिचय वर्ष 1994-95 में देखने को मिला,...

प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग

 प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग कटनी ।  ढीमरखेड़ा स्थित शासकीय महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर माननीय हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र, अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंच गया है। गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। *सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का विवाद* जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित तौर पर हाई कोर्ट के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वहीं ब्राह्मण समाज को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पोस्ट के सामने आते ही क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और सामाजिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। *जनसुनवाई में पहुंची शिकायत* ...

सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत

 सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत  कटनी  |  कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा के किसानों के सामने इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। खेती-किसानी पर निर्भर हजारों किसान इस समय गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।कारण है सिकमी नामा से जुड़े किसानों का पंजीयन पोर्टल पर फेल हो जाना, जिसके चलते वे समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा के किसानों की पीड़ा से अवगत कराया है।विधायक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सिकमी नामा पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन पोर्टल में अस्वीकार हो रहा है, जिसके कारण वे सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। बड़वारा विधान...