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जनपद सभागार ढीमरखेड़ा में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण रोजगार के द्वारा दिया जा रहा है प्रशिक्षण आजीविका मिशन द्वारा आयोजित स्व- सहायता समूह की महिलाओं को डेयरी एवं केंचुआ खाद निर्माण के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण का कार्य चालू महिलाओं को रोज़गार के मिलेंगे बेहतर अवसर

 जनपद सभागार ढीमरखेड़ा में भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण रोजगार के द्वारा दिया जा रहा है प्रशिक्षण

आजीविका मिशन द्वारा आयोजित स्व- सहायता समूह की महिलाओं को डेयरी एवं केंचुआ खाद निर्माण के लिए 10 दिवसीय प्रशिक्षण का कार्य चालू महिलाओं को रोज़गार के मिलेंगे बेहतर अवसर



ढीमरखेड़ा | भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण रोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कटनी (SBI-RSETI) और आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में ढीमरखेड़ा के जनपद सभागार में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को डेयरी प्रबंधन एवं केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल से न केवल ग्रामीण महिलाएं आय के स्रोत विकसित कर पाएंगी, बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में योगदान होगा।

 *डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण*

डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।

*दूध उत्पादन बढ़ाने की तकनीकें* महिलाओं को गाय-भैंसों के पोषण, स्वास्थ्य और उनकी देखभाल के तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इस प्रशिक्षण में उच्च गुणवत्ता वाला चारा, खनिज मिश्रण, और पशु चिकित्सा संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

*व्यवसाय प्रबंधन*

 महिलाओं को यह सिखाया जा रहा है कि वे डेयरी व्यवसाय को कैसे प्रबंधित कर सकती हैं। इसमें दूध की बिक्री, लागत का प्रबंधन, और लाभ का सही आकलन करने के तरीके भी शामिल हैं।

*दूध से अन्य उत्पाद बनाना*

 डेयरी व्यवसाय को और लाभदायक बनाने के लिए दूध से घी, मक्खन, छाछ, दही आदि बनाने की जानकारी दी जा रही है। इन उत्पादों की मांग ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक होती है, जिससे महिलाओं की आय में वृद्धि हो सकती है।

 *वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) निर्माण का प्रशिक्षण*

केंचुआ खाद निर्माण के प्रशिक्षण से महिलाओं को जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। केंचुआ खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

*केंचुआ खाद निर्माण प्रक्रिया*

 केंचुआ खाद बनाने की विधि में गोबर, सूखी पत्तियां, और अन्य जैविक कचरे का उपयोग होता है। महिलाओं को इस प्रक्रिया को व्यावसायिक स्तर पर कैसे किया जा सकता है, इसका भी प्रशिक्षण दिया गया है।

*खाद की गुणवत्ता का परीक्षण*

 यह सुनिश्चित करने के लिए कि खाद में सभी पोषक तत्व सही मात्रा में हैं, इसका परीक्षण कैसे किया जाता है, इसकी जानकारी भी दी गई है।

*उत्पादन से विपणन तक*

 खाद निर्माण के बाद, उसके विपणन के तरीकों पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि महिलाएं अपने उत्पाद को सही तरीके से बेचकर लाभ कमा सकें।

*आजीविका मिशन का सहयोग और उद्देश्य*

आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों में संगठित कर विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न किया जाता है। इसके तहत महिलाओं को न केवल प्रशिक्षित किया जाता है बल्कि उन्हें बैंकिंग सुविधाएं, लघु ऋण, और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाता है ताकि वे अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चला सकें।

*आर्थिक सशक्तिकरण*

 महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें आय सृजन के अवसर दिए जा रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे आत्मनिर्भर बनेंगी।

*सामाजिक सशक्तिकरण*

 जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो समाज में उनकी प्रतिष्ठा और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। इस प्रकार के कार्यक्रम महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाने में सहायक होते हैं।

*पर्यावरण संरक्षण*

केंचुआ खाद के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम होता है।

*संपूर्ण ग्रामीण विकास*

 इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं बल्कि पूरे ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

 *प्रशिक्षण के बाद का समर्थन*

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी SBI-RSETI और आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को व्यवसायिक मार्गदर्शन, सहायता, और बैंक ऋण जैसी सुविधाएं दी जाएंगी ताकि वे अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित कर सकें।

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