सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बरहटा सचिव चिंतामणि पटैल निलंबित जिला पंचायत के सीईओ श्री गेमावत ने जारी किया आदेश पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पड़ी भारी

 बरहटा सचिव चिंतामणि पटैल निलंबित जिला पंचायत के सीईओ श्री गेमावत ने जारी किया आदेश पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पड़ी भारी 



ढीमरखेड़ा | बरहटा ग्राम पंचायत के सचिव चिंतामणि पटैल का निलंबन हाल ही में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शिशिर गेमावत द्वारा जारी किया गया एक महत्वपूर्ण आदेश है। यह निर्णय मध्यप्रदेश पंचायत सेवा अनुशासन तथा अपील नियम 1999 के नियम 4 के अंतर्गत लिया गया है। इस निलंबन के पीछे सचिव पटैल की कार्यशैली में पाई गई गंभीर लापरवाहियों का बड़ा योगदान है, जो राज्य और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही थीं।चिंतामणि पटैल, जो जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अधीन ग्राम पंचायत बरहटा में सचिव के पद पर कार्यरत थे, के कार्यकाल में उनके द्वारा पदीय दायित्वों का सही से निर्वहन नहीं किया जा रहा था। ग्राम पंचायत में सचिव का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वह ग्राम स्तर पर विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का प्रमुख संचालक होता है। सचिव की लापरवाही का सीधा प्रभाव ग्राम पंचायत के नागरिकों पर पड़ता है, विशेषकर उन हितग्राहियों पर जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी होते हैं।

*हर घर तिरंगा अभियान और स्वतंत्रता दिवस की उपेक्षा*

चिंतामणि पटैल के निलंबन का एक प्रमुख कारण "हर घर तिरंगा अभियान" के दौरान उनकी लापरवाही और स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व पर उनकी अनुपस्थिति है। हर घर तिरंगा अभियान भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य हर नागरिक के घर पर तिरंगा फहराना और देशभक्ति की भावना को जागृत करना है। ऐसे में सचिव का इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग न लेना उनकी जिम्मेदारियों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। 15 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिव पटैल का मुख्यालय पर अनुपस्थित रहना और राष्ट्रीय पर्व में शामिल न होना गंभीर अनुशासनहीनता का संकेत है। यह न केवल उनके कर्तव्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि ग्राम पंचायत के अन्य कर्मचारियों और जनता के लिए भी एक गलत संदेश भेजता है।

*मुख्यालय से अनुपस्थिति और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा*

श्री पटैल के निलंबन के लिए उनकी लगातार 15-15 दिनों तक ग्राम पंचायत मुख्यालय बरहटा से अनुपस्थित रहना भी एक प्रमुख कारण था। ग्राम पंचायत सचिव का मुख्यालय पर उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वह योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्री पटैल की अनुपस्थिति से राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। मुख्यालय पर निवास न करना और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने से योजनाओं के लक्षित उद्देश्य को पूरा करने में असफलता प्राप्त हुई। इससे स्पष्ट होता है कि सचिव पटैल ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया, जिससे जनता को असुविधा हुई और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल सका।

*शिकायत और जांच का परिणाम*

चिंतामणि पटैल के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच कराई गई, जिसमें उनके मुख्यालय में यदा-कदा उपस्थिति पाई गई। उनकी उपस्थिति की अनियमितता ने पंचायत के कार्यों को प्रभावित किया और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न की। जांच के पश्चात प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जिला पंचायत के सीईओ श्री गेमावत ने श्री पटैल के निलंबन का आदेश जारी किया।

*निलंबन की कार्रवाई से ढीमरखेड़ा के अन्य सचिवों में हड़कंप*

जिला पंचायत के सीईओ श्री शिशिर गेमावत ने चिंतामणि पटैल को निलंबित कर उनके मुख्यालय को जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा निर्धारित किया है। निलंबन के दौरान श्री पटैल को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। यह निर्णय प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने और सरकारी कार्यों में लापरवाही को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।निलंबन का मुख्य उद्देश्य न केवल लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति कड़ा संदेश देना है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है। इस कार्रवाई से अन्य पंचायत सचिवों और सरकारी अधिकारियों को यह संदेश मिलेगा कि अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से न करना गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है।

*ग्रामवासी थे परेशान रोजगार सहायक सचिव से हैं अब उम्मीद*

चिंतामणि पटैल के निलंबन का ग्राम पंचायत बरहटा और अन्य ग्राम पंचायतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। निलंबन के बाद ग्राम पंचायतों में कार्य करने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों में अनुशासन और कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ सकती है। इसके अलावा, योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार की संभावना है, क्योंकि प्रशासनिक अनुशासन और निगरानी में वृद्धि होगी। जिला पंचायत के सीईओ द्वारा उठाया गया यह कदम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा, बल्कि पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के कार्य के प्रति जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित होंगे। इस प्रकार, चिंतामणि पटैल का निलंबन पंचायत प्रशासन में अनुशासन लाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक आवश्यक और समयोचित कदम है। यह घटना अन्य ग्राम पंचायत सचिवों और सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक सीख है कि पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

टिप्पणियाँ

popular post

सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत

 सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद हैं भ्रष्टाचार का मास्टर माइंड , बहोरीबंद आजीविका मिशन में करोड़ों रूपये का घोटाला आया सामने, जिपं सीईओ से हुई शिकायत    कटनी ।  मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बहोरीबंद विकासखंड में संचालित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड सहायक प्रबंधक तौफिक अहमद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायत में कहा गया है कि ग्राम स्लीमनाबाद स्थित ममता संकुल स्तरीय संगठन के बैंक खाते क्रमांक 3790886493 से विभिन्न व्यक्तियों/अन्य बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता ने इन लेन-देन की जांच की मांग की है और तौफिक अहमद की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि आजीविका गतिविधियों के लिए उछऋ को उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में लगभग 18.24 लाख के कथित ट्रांसफर का उल्लेख है। इसके अलावा एक अन्य बिंदु में उछऋ खाते से लगभग 1.15 करोड़ से अधिक राशि ट्...

पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता

 पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में दहशत का माहौल, तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना, लोगों में बढ़ी चिंता ढीमरखेड़ा ।  कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पोड़ी खुर्द में मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। जानकारी के अनुसार, गांव में तरियां घाट और स्कूल घाट के बीच स्थित ग्राउंड के पीछे मगरमच्छ नजर आया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के बीच मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलते ही क्षेत्र में सतर्कता का माहौल बन गया।लोगों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्र या घाट के आसपास मौजूद रहता है, तो किसी अप्रिय घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से घाट के आसपास आने-जाने वाले ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करे और मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की...

एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप

 एक विक्रेता, कई दुकानें तहसील ढीमरखेड़ा में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल सहकारिता एवं खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, एक विक्रेता पर दो-तीन नहीं बल्कि चार दुकानों में वितरण का दबाव बनाने के आरोप ढीमरखेड़ा ।  तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के संचालन को लेकर एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि सहकारिता एवं खाद्य विभाग से जुड़े जिम्मेदारों द्वारा एक ही विक्रेता पर दो, तीन यहां तक कि चार अलग-अलग उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण का कार्य संभालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक विक्रेता से कई दुकानों का संचालन किस नियम और किस आदेश के तहत कराया जा रहा है।बताया जा रहा है कि उचित मूल्य दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था में विक्रेताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। ऐसे में यदि एक ही व्यक्ति को एक से अधिक दुकानों का वितरण कार्य सौंपा जा रहा है तो इसके पीछे सक्षम अधिकारी का आदेश, निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन होना आवश्यक है। क्षेत्र में इसी बिंदु को लेकर चर्चाएं तेज हैं...