शब्द जब निकलते हैं तो बढ़-चढ़कर व्यक्ति तक पहुँचते हैं, इसलिए किसी की बुराई करने से पहले हमें एक बार अपने भीतर झाँकना चाहिए। दूसरों की गलतियाँ गिनाने के बजाय अपने ऊपर और अपनी गलतियों पर काम करना ही सच्ची समझदारी है क्योंकि दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को सुधारना ही सबसे बड़ी जीत है, आत्मसुधार ही सबसे बड़ी जीत, दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को सुधारें बुराई से पहले आत्ममंथन खुद को बदलना ही असली सफलता
शब्द जब निकलते हैं तो बढ़-चढ़कर व्यक्ति तक पहुँचते हैं, इसलिए किसी की बुराई करने से पहले हमें एक बार अपने भीतर झाँकना चाहिए। दूसरों की गलतियाँ गिनाने के बजाय अपने ऊपर और अपनी गलतियों पर काम करना ही सच्ची समझदारी है क्योंकि दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को सुधारना ही सबसे बड़ी जीत है, आत्मसुधार ही सबसे बड़ी जीत, दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को सुधारें बुराई से पहले आत्ममंथन खुद को बदलना ही असली सफलता कटनी | मानव समाज का आधार संवाद और विचार-विमर्श पर टिका है। लेकिन आज के दौर में संवाद का एक बड़ा हिस्सा सकारात्मक चर्चाओं के बजाय दूसरों की आलोचना, कमियों को उजागर करने और बुराई करने पर केंद्रित होता जा रहा है। जब शब्द किसी के मुख से निकलते हैं, तो वे केवल आवाज़ बनकर हवा में नहीं विलीन होते; वे हवा की गति से फैलते हैं और अक्सर अपने मूल स्वरूप से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर संबंधित व्यक्ति या समाज तक पहुँचते हैं। किसी के बारे में कही गई एक छोटी सी नकारात्मक बात जब कई जुबानों से होकर गुज़रती है, तो वह एक विशाल गप्प या विवाद का रूप ले लेती है। यही कारण है कि भारतीय दर्शन और सामाजिक मूल्य...