कर्म के प्रति समर्पित रहिए, अनावश्यक नमस्ते नहीं करना पड़ेगा, श्रेष्ठ कार्य ही दिलाते हैं वास्तविक सम्मान
कर्म के प्रति समर्पित रहिए, अनावश्यक नमस्ते नहीं करना पड़ेगा, श्रेष्ठ कार्य ही दिलाते हैं वास्तविक सम्मान कटनी | समाज में सम्मान प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति को बार-बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराने या अनावश्यक रूप से लोगों के सामने झुकने की आवश्यकता नहीं होती। यदि व्यक्ति अपने कर्म, कर्तव्य और जिम्मेदारियों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण से कार्य करता है, तो उसका काम ही उसकी पहचान बन जाता है। प्रसिद्ध विचार है कि कर्म के प्रति समर्पित रहिए, अनावश्यक नमस्ते नहीं करना पड़ेगा। इसका आशय यह है कि जब व्यक्ति ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता है, तो समाज स्वयं उसका सम्मान करता है। ऐसे लोगों को पहचान दिलाने के लिए प्रचार या दिखावे की आवश्यकता नहीं पड़ती । वर्तमान समय में कई लोग सम्मान पाने की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन सम्मान का वास्तविक आधार पद, प्रतिष्ठा या बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यक्ति के उत्कृष्ट कर्म होते हैं।इतिहास और समाज में जिन लोगों को आदर और सम्मान मिला है, उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से लोगों के दिलों में स्थान बनाया है। कर्मठ व्यक्...