उचित मूल्य दुकान पहरुआ में कार्रवाई को लेकर उठे सवाल कलेक्टर के आदेश के बावजूद सेल्समैन पर एफआईआर नहीं होने का आरोप, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
उचित मूल्य दुकान पहरुआ में कार्रवाई को लेकर उठे सवाल कलेक्टर के आदेश के बावजूद सेल्समैन पर एफआईआर नहीं होने का आरोप, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
ढीमरखेड़ा । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र की उचित मूल्य दुकान पहरुआ को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि दुकान से जुड़े मामले में कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद संबंधित सेल्समैन मुकेश तिवारी के खिलाफ अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इसे लेकर शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरण व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर प्रशासन द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कलेक्टर के आदेश पर अमल कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
*कलेक्टर के आदेश पर अमल क्यों नहीं*
पहरुआ उचित मूल्य दुकान से जुड़े मामले में कार्रवाई के निर्देश होने की बात सामने आने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता सामने आई है और सक्षम अधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है? ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर छोटे स्तर पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई को लेकर अलग रवैया अपनाया जा रहा है। इससे राशन व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर संदेह की स्थिति बन रही है।
*‘लक्ष्मी की सांठगांठ’ के आरोप, जांच की मांग*
मामले को लेकर ग्रामीणों की ओर से लक्ष्मी के साथ कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई में देरी की वजह क्या है और किन स्तरों पर फाइल लंबित है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
*किसी पर कृपा तो किसी पर कार्रवाई*
राशन दुकानों से जुड़े मामलों में कथित तौर पर अलग-अलग कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि “किसी के ऊपर कृपा और किसी के ऊपर कार्रवाई” जैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और जांच के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पहरुआ उचित मूल्य दुकान के पूरे रिकॉर्ड, राशन वितरण, स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही कलेक्टर के निर्देशों के पालन की स्थिति भी सार्वजनिक की जाए।
*प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग*
अब देखना यह है कि पहरुआ उचित मूल्य दुकान के मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं तो उसे समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। वहीं यदि आरोप तथ्यहीन हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।फिलहाल पहरुआ उचित मूल्य दुकान का मामला प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही के सवालों के बीच चर्चा में है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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