स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन से विरत रहेगा पटवारी संघ कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर पटवारियों को योजना से पृथक रखने की मांग, मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी कलम-बंद आंदोलन की चेतावनी
स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन से विरत रहेगा पटवारी संघ कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर पटवारियों को योजना से पृथक रखने की मांग, मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी कलम-बंद आंदोलन की चेतावनी
कटनी । मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के कार्यों से पटवारी संवर्ग को अलग रखने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने कहा है कि ग्रामीण आबादी की भूमि से संबंधित स्वामित्व अभिलेखों के निष्पादन और पंजीयन में पटवारियों को निष्पादक की भूमिका में रखा जाना उचित नहीं है। संघ के अनुसार, यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है। ज्ञापन में पटवारी संघ ने कहा कि ग्रामीण आबादी की भूमि का स्वरूप राजस्व कृषि भूमि से अलग होता है। संघ के अनुसार आबादी क्षेत्र का सर्वे और मैपिंग पंचायत राज विभाग के मार्गदर्शन में तकनीकी एजेंसियों के माध्यम से किया गया था, जबकि पटवारियों ने इसमें सहयोगी की भूमिका निभाई थी। संघ का दावा है कि इस कार्य के लिए उन्हें मानदेय भी पंचायत विभाग की ओर से दिया गया था। ऐसे में अब तैयार अभिलेखों को अंतिम रूप देने तथा निष्पादन की जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपना उनके लिए अतिरिक्त दायित्व है।
*तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों के सुधार की मांग*
पटवारी संघ ने ज्ञापन में कहा कि स्वामित्व योजना से संबंधित अभिलेखों में यदि किसी प्रकार की तकनीकी, लिपिकीय अथवा अन्य त्रुटियां रह गई हैं तो उन्हें सुधारने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए। संघ का कहना है कि किसी रिकॉर्ड में नाम, सीमा, क्षेत्रफल अथवा अन्य विवरण से संबंधित विवाद उत्पन्न होने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी के सामने अनावश्यक कानूनी जटिलताएं खड़ी हो सकती हैं। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि आबादी क्षेत्र में पट्टा वितरण और उसके प्रबंधन से संबंधित कार्य पहले से ही जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर किए जाते रहे हैं। इसलिए संघ की मांग है कि स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के निष्पादन एवं प्रशासनिक दायित्वों का संचालन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से किया जाए। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में पटवारी आवश्यक सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
*व्यक्तिगत कानूनी दायित्व को लेकर जताई चिंता*
ज्ञापन में पटवारी संघ ने स्वामित्व दस्तावेजों के निष्पादन में व्यक्तिगत कानूनी दायित्व को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। संघ के अनुसार, पंजीयन दस्तावेज पर निष्पादक के रूप में पटवारी का नाम, पद, आईडी और ई-सिग्नेचर दर्ज होने की स्थिति में भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान अथवा हिस्सेदारी से जुड़े विवादों में पटवारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
संघ का कहना है कि पटवारी संबंधित भूमि का भू-स्वामी अथवा हस्तांतरणकर्ता नहीं है। इसके बावजूद यदि अभिलेखों के आधार पर भविष्य में विवाद उत्पन्न होते हैं तो व्यक्तिगत स्तर पर जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करने की आशंका बनी रहती है। संघ ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की मांग की है।
*फार्मर आईडी के कार्य को लेकर भी नाराजगी*
पटवारी संघ ने फार्मर आईडी निर्माण के संबंध में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के अनुसार, कम समय में बड़ी संख्या में फार्मर आईडी तैयार करने में पटवारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में शेष कार्य मुख्य रूप से तकनीकी सुधार और निरंतर अद्यतन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। संघ का आरोप है कि इसके बावजूद कार्य को लेकर कर्मचारियों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है।
संघ ने मांग की है कि फार्मर आईडी से संबंधित कार्य में कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी अथवा दबाव की स्थिति को समाप्त करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
*JIO Tag गिरदावरी को लेकर भी विरोध*
ज्ञापन में JIO Tag के माध्यम से गिरदावरी किए जाने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया है। संघ ने इसे व्यावहारिक कठिनाइयों वाला कार्य बताते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ज्ञापन में कार्य के दबाव से जुड़े एक पटवारी की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए संघ की ओर से शोक व्यक्त किया गया है। संघ ने कहा है कि जब तक JIO Tag की अनिवार्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक पटवारी इस प्रक्रिया से संबंधित कार्य नहीं करेंगे। संघ ने यह भी कहा कि यदि इस संबंध में कार्रवाई की जाती है तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है।
*वेतन विसंगति सहित कई मांगें लंबित*
पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मांगों का भी उल्लेख किया है। इनमें वेतन विसंगति दूर करने, ग्रेड-पे में सुधार, कैडर रिव्यू, पदोन्नति, नियमितीकरण, मोबाइल एवं लैपटॉप उपलब्ध कराने तथा अतिरिक्त कार्य के बदले एक माह के वेतन के बराबर भत्ता देने जैसी मांगें शामिल हैं। संघ का कहना है कि कर्मचारियों से लगातार नए तकनीकी एवं विभागीय कार्य लिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी पुरानी सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। संघ ने अन्य राज्यों में पटवारियों को मिलने वाले वेतन एवं कार्य व्यवस्था का भी उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश में सेवा शर्तों में सुधार की मांग की है।
*15 सितंबर से निष्पादन दायित्व से विरत रहने का निर्णय*
ज्ञापन में पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर 2026 से प्रदेश के पटवारी स्वामित्व आबादी अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निष्पादक के दायित्व से विरत रहेंगे। संघ के अनुसार, पटवारी अपने मूल राजस्व कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे, लेकिन अतिरिक्त योजनाओं का दायित्व तब तक नहीं लिया जाएगा, जब तक पुरानी सेवा संबंधी मांगों का स्थायी निराकरण नहीं किया जाता। संघ ने प्रशासन से मांग की है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाए। साथ ही संघ ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव बनाया गया या कार्रवाई की गई तो प्रदेश स्तर पर कलम-बंद आंदोलन किया जा सकता है। अब देखना होगा कि पटवारी संघ की मांगों और स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल संघ के इस रुख से स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन और पटवारी संवर्ग के बीच समन्वय की आवश्यकता बढ़ गई है।

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