उल्टी-दस्त की रोकथाम को लेकर बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद की पहल सराहनीय स्वास्थ्य केंद्र से लेकर गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को कर रहे जागरूक, स्वच्छता और सावधानी अपनाने की दे रहे सलाह
उल्टी-दस्त की रोकथाम को लेकर बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद की पहल सराहनीय स्वास्थ्य केंद्र से लेकर गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों को कर रहे जागरूक, स्वच्छता और सावधानी अपनाने की दे रहे सलाह
ढीमरखेड़ा । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान में पदस्थ डॉक्टर बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद द्वारा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।विशेष रूप से इन दिनों उल्टी-दस्त जैसी जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर उनके द्वारा लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है।स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ वे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं और आम लोगों तक बचाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। मौसम में बदलाव और दूषित पानी तथा अस्वच्छ खान-पान के कारण उल्टी-दस्त की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे समय में लोगों को बीमारी के लक्षणों, कारणों और बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद द्वारा लोगों को साफ-सफाई रखने, शुद्ध पानी पीने और भोजन को ढककर रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
*स्वास्थ्य को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे बीएमओ*
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर डॉ. बी.के. प्रसाद की सक्रियता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र में बीमारी की रोकथाम को प्राथमिकता दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से समन्वय बनाकर लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और गंभीर स्थिति में मरीजों को उचित उपचार के लिए मार्गदर्शन देने पर जोर दिया जा रहा है। बीएमओ का मानना है कि किसी भी बीमारी का उपचार करने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी रोकथाम है। यदि लोग बीमारी के कारणों और शुरुआती लक्षणों को समझ लें तथा समय रहते सावधानी बरतें, तो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। इसी सोच के साथ लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है।
*उल्टी-दस्त से बचाव के लिए स्वच्छ पानी जरूरी*
जागरूकता के दौरान लोगों को विशेष रूप से शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि पीने के पानी को ढककर रखें और संदिग्ध या दूषित पानी का उपयोग न करें। यदि पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर अथवा उपलब्ध सुरक्षित तरीके से शुद्ध करके ही पीने की सलाह दी जा रही है।इसके अलावा भोजन बनाने से पहले और खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने पर भी जोर दिया जा रहा है। शौचालय के उपयोग के बाद हाथ धोना भी बेहद जरूरी बताया जा रहा है। बच्चों को भी स्वच्छता की आदत डालने और खुले में बिकने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से बचाने की सलाह दी जा रही है।
*शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें*
बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद द्वारा लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि उल्टी-दस्त की समस्या होने पर इसे सामान्य मानकर लंबे समय तक घर पर ही उपचार करते रहना उचित नहीं है। बार-बार दस्त या उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में मरीज को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित तरल पदार्थ देने तथा चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता होती है।विशेषकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर मरीजों में पानी की कमी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर समय रहते स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।
*ओआरएस के उपयोग की दी जा रही जानकारी*
स्वास्थ्य जागरूकता के दौरान लोगों को ओआरएस घोल के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। दस्त की स्थिति में शरीर से निकलने वाले पानी और लवणों की कमी को पूरा करने में ओआरएस उपयोगी होता है। लोगों को बताया जा रहा है कि ओआरएस का घोल पैकेट पर दिए निर्देश के अनुसार तैयार किया जाए और स्वच्छ पानी का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि गंभीर लक्षण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें।लगातार उल्टी, अत्यधिक दस्त, कमजोरी, चक्कर, बहुत कम पेशाब आना, आंखों का धंसना या बच्चे का असामान्य रूप से सुस्त होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
*गांवों तक पहुंच रही स्वास्थ्य जागरूकता*
क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता केवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक सीमित न रहे, इसके लिए स्वास्थ्य अमले के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बीएमओ डॉ. बी.के. प्रसाद की सक्रियता का उद्देश्य यही है कि बीमारी फैलने के बाद मरीजों का उपचार करने के साथ-साथ बीमारी फैलने की संभावनाओं को पहले ही कम किया जाए। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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