शासकीय माध्यमिक शाला सगौना में अतिथि शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति पर उठे गंभीर सवाल, प्रभारी प्राचार्य पर मौखिक सूचना देने का आरोप, झिन्नापिपरिया संकुल प्राचार्य के ऊपर भी निलंबन की होना चाहिए कार्यवाही, उग्र प्रदर्शन की तैयारी
शासकीय माध्यमिक शाला सगौना में अतिथि शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति पर उठे गंभीर सवाल, प्रभारी प्राचार्य पर मौखिक सूचना देने का आरोप, झिन्नापिपरिया संकुल प्राचार्य के ऊपर भी निलंबन की होना चाहिए कार्यवाही, उग्र प्रदर्शन की तैयारी
ढीमरखेड़ा । शासकीय माध्यमिक शाला सगौना से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय में पदस्थ अतिथि शिक्षक मंजू भालाधरे के कथित रूप से लंबे समय से अनुपस्थित रहने के कारण विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।इस पूरे घटनाक्रम में विद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि प्रभारी प्राचार्य द्वारा अतिथि शिक्षक की अनुपस्थिति के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित जानकारी देने के बजाय केवल मौखिक सूचना दी गई है। इस लापरवाही के बाद स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षाविदों द्वारा संकुल प्राचार्य से नियमानुसार जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शासकीय माध्यमिक शाला सगौना में अतिथि शिक्षक के रूप में मंजू भालाधरे की नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि वे विगत कई दिनों से बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृति के विद्यालय से अनुपस्थित चल रही हैं। किसी भी शासकीय विद्यालय में शिक्षकों या अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति और अनुपस्थिति का सीधे तौर पर असर विद्यार्थियों के अध्यापन पर पड़ता है।अतिथि शिक्षक की निरंतर अनुपस्थिति के कारण विद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। इसके बावजूद, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य द्वारा इस विषय में जिम्मेदार प्रशासनिक रुख अपनाने के बजाय लापरवाही बरती गई। नियमानुसार किसी भी कर्मचारी या अतिथि शिक्षक की अनुपस्थिति की लिखित रिपोर्ट संकुल केंद्र को भेजी जानी चाहिए, किंतु प्रभारी प्राचार्य ने संकुल प्राचार्य को केवल मौखिक रूप से ही अवगत कराया।
*प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी*
शिक्षा विभाग के स्थापित नियमों के अनुसार, यदि कोई अतिथि शिक्षक विद्यालय में अनुपस्थित रहता है, तो उपस्थिति रजिस्टर में अंकन दैनिक उपस्थिति रजिस्टर में संबंधित अतिथि शिक्षक की अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज करे। पोर्टल पर प्रविष्टि मध्य प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग द्वारा संचालित पोर्टल पर उपस्थिति का सही और अद्यतन विवरण दर्ज करे।लिखित पत्राचार अनुपस्थिति की अवधि लंबी होने पर तुरंत संकुल प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को लिखित पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराए। प्रभारी प्राचार्य द्वारा लिखित सूचना न दिए जाने के कारण यह मामला अब संदेह के घेरे में है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या उपस्थिति रजिस्टर और विभागीय पोर्टल पर अतिथि शिक्षक को अनुपस्थित दर्शाया जा रहा है या कागजों में उपस्थिति दर्ज की जा रही है? यदि जानकारी लिखित में संकुल तक नहीं पहुंची, तो पोर्टल पर री-ज्वाइनिंग या उपस्थिति का अद्यतन विवरण किस आधार पर दर्ज किया गया है? अतिथि शिक्षकों के अवकाश और उपस्थिति संबंधी नियम
विधानसभा सत्र के दौरान भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया जा चुका है कि अतिथि शिक्षकों के लिए सामान्य या आकस्मिक अवकाश का कोई औपचारिक प्रावधान नहीं होता है। वे केवल कार्यदिवसों के आधार पर मानदेय प्राप्त करने के हकदार होते हैं।
*विकल्प व्यवस्था का नियम*
यदि कोई अतिथि शिक्षक अनुपस्थित रहता है, तो विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए विकासखंड स्तर पर तैयार की गई मेधा सूची से अगले क्रम के पात्र अभ्यर्थी को तुरंत आमंत्रित करने की व्यवस्था है।
*फरवरी 2026 के निर्देश एवं वर्तमान स्थिति*
उल्लेखनीय है कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा फरवरी 2026 में एक आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत लगातार 7 दिनों तक बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले अतिथि शिक्षकों को सेवामुक्त/रिलीव करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, बाद में इस कड़े आदेश को विभाग द्वारा वापस ले लिया गया था। इसलिए केवल फरवरी के पुराने निरस्त आदेश के आधार पर सीधे सेवा समाप्ति का दावा करना नियमानुकूल नहीं होगा। सत्र 2026-27 के नवीन दिशा-निर्देश वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अतिथि शिक्षकों का प्रबंधन, उपस्थिति और री-ज्वाइनिंग की पूरी प्रक्रिया GFMS (Guest Faculty Management System) एवं Education Portal 3.0 के माध्यम से संचालित की जा रही है। जुलाई और अगस्त 2026 में विभाग द्वारा उपस्थिति दर्ज करने और री-ज्वाइनिंग से संबंधित नए तकनीकी और प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। अतः इस मामले का निस्तारण वर्तमान में लागू नियमों और नवीनतम विभागीय सर्कुलर के आलोक में ही किया जाना वैधानिक होगा।
*स्थानीय निवासियों और अभिभावकों में आक्रोश*
शासकीय माध्यमिक शाला सगौना में लंबे समय से एक शिक्षक की गैरमौजूदगी के कारण बच्चों का पाठ्यक्रम पिछड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय विद्यालय ही निर्धन और सामान्य परिवारों के बच्चों की शिक्षा का एकमात्र साधन होते हैं। ऐसे में अतिथि शिक्षक की अनुपस्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से अभिभावकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रभारी प्राचार्य समय रहते लिखित सूचना संकुल केंद्र को देते, तो पोर्टल के माध्यम से पैनल में मौजूद किसी अन्य योग्य अभ्यर्थी को पदस्थ किया जा सकता था, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न होता।

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