संयुक्त संचालक जबलपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी को किया तलब 8 माह बाद भी पुलिस कार्रवाई की जानकारी गायब, अतिथि शिक्षकों का वेतन डकारने वाले बाबू संदीप कोरी पर नहीं हुई एफआईआर, ऊपर से नीचे तक चल रहा लक्ष्मी का खेल, बाईओ के ऊपर भी गिरनी चाहिए गांज
संयुक्त संचालक जबलपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी को किया तलब 8 माह बाद भी पुलिस कार्रवाई की जानकारी गायब, अतिथि शिक्षकों का वेतन डकारने वाले बाबू संदीप कोरी पर नहीं हुई एफआईआर, ऊपर से नीचे तक चल रहा लक्ष्मी का खेल, बाईओ के ऊपर भी गिरनी चाहिए गांज
ढीमरखेड़ा । अतिथि शिक्षकों के मानदेय में कथित हेराफेरी का मामला अब गरमा गया है। जिस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ढीमरखेड़ा ने करीब आठ माह पहले पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था, उसमें अब तक क्या हुआ इसका जवाब शिक्षा विभाग को ही नहीं मिल पाया है।मामला सामने आने के बाद संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, जबलपुर संभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी कटनी को तलब करते हुए प्रकरण की अद्यतन स्थिति तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।विदित हो कि मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झिन्ना पिपरिया में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 संदीप कुमार कोरी से जुड़ा है।विकासखंड शिक्षा अधिकारी ढीमरखेड़ा के पत्र में आरोप लगाया गया था कि विद्यालय में नियुक्त अतिथि शिक्षकों के मानदेय का संदिग्ध कपटपूर्ण तरीके से भुगतान अपने एवं संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों में किया गया। अब सवाल यह है कि जब विभाग ने मामला पुलिस तक पहुंचा दिया था, तो आज तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है?
*बीईओ ने थाने को लिखा था आवश्यक कार्रवाई करें*
प्रकरण में विकासखंड शिक्षा अधिकारी ढीमरखेड़ा द्वारा 23 दिसंबर 2025 को थाना प्रभारी, थाना ढीमरखेड़ा को पत्र भेजा गया था। पत्र में संदीप कुमार कोरी द्वारा अतिथि शिक्षकों के मानदेय के भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता का उल्लेख करते हुए पुलिस से आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। लेकिन इसके बाद मामला जैसे फाइलों में दब गया।
*संयुक्त संचालक की चिट्ठी ने खोली कार्रवाई की पोल*
अब जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण कार्यालय ने 19 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कटनी को पत्र जारी किया है। पत्र क्रमांक /सर्तकता/कटनी/2026/4637 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि थाना प्रभारी ढीमरखेड़ा द्वारा प्रकरण में की गई कार्रवाई संबंधी जानकारी आज दिनांक तक अप्राप्त है। संयुक्त संचालक ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे तत्काल प्रकरण की अद्यतन स्थिति प्राप्त कर कार्यालय में प्रस्तुत करें। यानी विभागीय स्तर पर अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर दिसंबर 2025 में पुलिस को भेजे गए पत्र का हुआ क्या?
*आठ महीने बाद वरिष्ठ अधिकारी की एंट्री*
दिसंबर 2025 में थाने को पत्र भेजे जाने के बाद अगस्त 2026 में संयुक्त संचालक द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट तलब किए जाने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब देखना होगा कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा संयुक्त संचालक को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई की क्या स्थिति सामने आती है और कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में अगला कदम क्या होता है।एक ओर विभागीय पत्र में गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोपों का उल्लेख है, दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई की जानकारी अब तक शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंची। ऐसे में अतिथि शिक्षकों के मानदेय से जुड़े इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है। अब निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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