सत्ताधारी दल के विधायक लिखित शिकायत कर रहे हैं कि गली-गली बिक रही अवैध शराब बंद कराई जाए, पर कटनी पुलिस ने अवैध शराब बिकवाने का ठेका ले रखा है, जिले में एक भी ईमानदार पुलिस थाना नहीं है, जहां अवैध शराब की पैकारी ना चल रही हो , सवाल है पर जवाब नहीं, सिस्टम पर भारी अवैध पैकारी जब सत्ताधारी दल के विधायक को भी SP से लगानी पड़े गुहार, तो समझें कितने मजबूत हैं सिंडिकेट के हौसले
सत्ताधारी दल के विधायक लिखित शिकायत कर रहे हैं कि गली-गली बिक रही अवैध शराब बंद कराई जाए, पर कटनी पुलिस ने अवैध शराब बिकवाने का ठेका ले रखा है, जिले में एक भी ईमानदार पुलिस थाना नहीं है, जहां अवैध शराब की पैकारी ना चल रही हो , सवाल है पर जवाब नहीं, सिस्टम पर भारी अवैध पैकारी जब सत्ताधारी दल के विधायक को भी SP से लगानी पड़े गुहार, तो समझें कितने मजबूत हैं सिंडिकेट के हौसले
कटनी । कटनी जिले में अवैध शराब का कारोबार (पैकारी) किस कदर जड़ें जमा चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब आम जनता ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायक को भी पुलिस अधीक्षक (SP) के दरवाजे पर गुहार लगानी पड़ रही है। बड़वारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह द्वारा कटनी SP को लिखा गया हालिया पत्र जिले की कानून-व्यवस्था और आबकारी महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
*सत्ता का पावर भी पड़ा फीका?*
राजनीतिक गलियारों और आम चर्चाओं में अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है यदि एक सत्तारूढ़ दल के विधायक की अनुशंसा या मौखिक निर्देश पर पुलिस और आबकारी विभाग अवैध पैकारियों पर ताला नहीं लगा पा रहे, तो आखिर इन पैकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है?" विधायक का शासकीय लेटरहेड पर पत्र लिखना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर थाना व चौकी पुलिस अवैध शराब नेटवर्क के सामने पंगु बनी हुई है या फिर जानकर आंखें मूंदे बैठी है।
*इन आधा दर्जन से अधिक इलाकों में समानांतर 'सिंडिकेट'*
विधायक द्वारा पत्र में स्लीमनाबाद, तेवरी, एनकेजे, निवार, ढीमरखेड़ा, उमरियापान और सिलौड़ी जैसे वृहद क्षेत्रों का जिक्र किया गया है। ये वे इलाके हैं जहां गांव-गांव तक अवैध पैकारियों का जाल फैला हुआ है। शाम ढलते ही शराब के अवैध ठिकानों पर जमावड़ा और आए दिन होने वाले विवादों ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है।
*सिर्फ पत्राचार या होगा कोई बड़ा एक्शन?*
विधायक ने पत्र की प्रतिलिपि जबलपुर रेंज के आईजी (IG) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के साथ आबकारी विभाग को भी भेजी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस 'पत्र' के बाद पुलिस महकमा जागेगा और अभियान चलाकर शराब सिंडिकेट की कमर तोड़ेगा, या फिर यह पत्र भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा अगर विधायक के पत्र लिखने के बाद भी ज़मीन पर हालात नहीं बदलते, तो यह साबित हो जाएगा कि कटनी में अवैध पैकारी चलाने वाले गिरोह का रसूख और ताकत शासन-प्रशासन के इकबाल से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी है।

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