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ढीमरखेड़ा में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, सनकुई का परमिट और बंद कर दिया पूरा फीडर, लाइट की समस्या से आम नागरिक परेशान

 ढीमरखेड़ा में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, सनकुई का परमिट और बंद कर दिया पूरा फीडर, लाइट की समस्या से आम नागरिक परेशान 



ढीमरखेड़ा ।  बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सनकुई गांव में विद्युत लाइन पर काम करने के लिए परमिट लिया गया, लेकिन इसके साथ ही पूरे फीडर की बिजली बंद कर दी गई, जिसके कारण फीडर से जुड़े अन्य गांवों के उपभोक्ताओं को भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि कार्य केवल सनकुई गांव के सीमित हिस्से में किया जा रहा था, तो क्या उस हिस्से को अलग कर बाकी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति चालू नहीं रखी जा सकती थी? यदि तकनीकी रूप से ऐसा संभव था, तो पूरे फीडर की बिजली बंद रखने का कारण क्या है वहीं ग्रामीणों का एक और महत्वपूर्ण सवाल है कि यदि वास्तव में पूरे फीडर की बिजली बंद की गई थी, तो इससे प्रभावित उपभोक्ताओं को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? अचानक बिजली बंद होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से सूचना दी जाती तो उपभोक्ता अपने आवश्यक कार्यों की व्यवस्था कर सकते थे। विद्युत सुरक्षा व्यवस्था के तहत लाइन पर काम करने से पहले संबंधित लाइन अथवा फीडर को सुरक्षित रूप से बंद करना, परमिट लेना तथा सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि सनकुई के लिए जारी परमिट में किस लाइन या सेक्शन का उल्लेख था और उसके आधार पर कितने क्षेत्र की बिजली बंद की जानी थी, इसकी जानकारी विभाग द्वारा स्पष्ट की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक गांव के सीमित कार्य के लिए पूरे फीडर की बिजली बंद की गई, तो इसकी तकनीकी आवश्यकता क्या थी और क्या बाकी क्षेत्र की बिजली चालू रखी जा सकती थी, यह जांच का विषय है।साथ ही ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पूरे फीडर का शटडाउन सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता के चलते लिया गया था या विद्युत व्यवस्था के संचालन में लापरवाही हुई। यदि पूरे फीडर की बिजली बंद करना आवश्यक था तो उपभोक्ताओं को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई, इसकी भी जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की जिम्मेदारी है कि सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए। एक स्थान पर काम के कारण यदि कई गांवों की बिजली बंद होती है, तो उपभोक्ताओं को उचित सूचना देना और शटडाउन की स्पष्ट जानकारी देना आवश्यक है। ग्रामीणों ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की मांग की है।

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