कछारगांव बड़ा में ऐसा बना मनमोहक गार्डन कि देखते ही गदगद हुए अधिकारी, क्षेत्र के विकास की मिसाल बनी अनोखी पहल
कछारगांव बड़ा में ऐसा बना मनमोहक गार्डन कि देखते ही गदगद हुए अधिकारी, क्षेत्र के विकास की मिसाल बनी अनोखी पहल
कटनी | विकास जब जनभागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संगम बनता है, तो परिणाम अद्भुत होते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा कटनी जिले की जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम कछारगांव बड़ा में देखने को मिला। यहाँ नवनिर्मित उद्यान (गार्डन) की भव्यता और सुंदरता को देखकर न केवल ग्रामीण, बल्कि निरीक्षण करने पहुँचे जिले के आला अधिकारी भी गदगद हो उठे।यह आयोजन और निर्माण कार्य इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब समाज और प्रशासन मिलकर 'स्वयं से पहले सेवा' का भाव रखते हैं, तो क्षेत्र का कायकल्प होते देर नहीं लगती।
*कलेक्टर, एस.पी. और डी.एफ.ओ. सहित जिला स्तरीय दल ने किया निरीक्षण*
ग्राम कछारगांव बड़ा में हुए इस अभूतपूर्व विकास कार्य का जायजा लेने जिले की पूरी प्रशासनिक टीम धरातल पर पहुँची। निरीक्षण दल में मुख्य रूप से कलेक्टर (जिला कटनी) पुलिस अधीक्षक (S.P.) मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत, डी.एफ.ओ. (D.F.O.) अधिकारियों की टीम ने सबसे पहले नवनिर्मित उद्यान का बारीकी से निरीक्षण किया। उद्यान की हरियाली, सौंदर्य और बच्चों व बुजुर्गों के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखकर अधिकारियों ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। इसके पश्चात प्रशासनिक दल ने गांव स्थित अस्पताल (हॉस्पिटल) का भी निरीक्षण किया और स्वास्थ्य सुविधाओं व सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
*जनभागीदारी और शासकीय सहयोग की अनूठी मिसाल*
कछारगांव बड़ा में बने इस उद्यान की सबसे खास बात यह है कि इसका निर्माण केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहकर नहीं किया गया, बल्कि इसमें जनभागीदारी और व्यक्तिगत समर्पण की ऐतिहासिक मिसाल पेश की गई है। कछारगांव बड़ा के सरपंच कैलाशचन्द जैन द्वारा पंचायत स्तर से उद्यान की मजबूत बाउंड्री वॉल (चारों तरफ की दीवार) का निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ कराया गया। निजी व्यय से मुख्य निर्माण बाउंड्री के बाद उद्यान के अंदर सौंदर्यीकरण, पौधे, पाथ-वे और शेष प्रमुख अधोसंरचनात्मक कार्य का निर्माण कछारगांव के ही मूल निवासी व हीडलबर्ग सीमेंट कंपनी के पूर्व जी.एम. सुशील तिवारी द्वारा लगभग स्वयं के व्यय (निजी कोष) से कराया गया। सुशील तिवारी का यह प्रयास इस बात को रेखांकित करता है कि "व्यक्ति को अपने क्षेत्र और जन्मभूमि के विकास के लिए आगे आना चाहिए, न कि केवल अपने स्वार्थ के लिए।" उनके इस निस्वार्थ योगदान की प्रशासनिक अधिकारियों और समूचे ढीमरखेड़ा क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
*ढीमरखेड़ा जनपद टीम की दूरदर्शिता और समर्पण*
कछारगांव बड़ा के इस कायाकल्प के पीछे जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की पूरी प्रशासनिक टीम का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग रहा।जनपद पंचायत सीईओ यजुवेन्द्र कोरी के कुशल नेतृत्व में योजना को धरातल पर उतारा गया । सी.ई.ओ. (जनपद ढीमरखेड़ा)यजुवेन्द्र कोरी, सहायक यंत्री (AE)अजय केशरवानी
उपयंत्री भूपेन्द्र मौर्य, पंचायत सचिव निशा साहू, रोजगार सहायक विकाश खरे, देवेन्द्र विश्वकर्मा, संजू बागरी जनपद सीईओ यजुवेन्द्र कोरी और उनकी पूरी टीम ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक अमला यदि निष्ठा से कार्य करे, तो सरकारी और निजी प्रयासों का सही समन्वय बनाकर क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।
*निरीक्षण के दौरान गणमान्य नागरिकों एवं अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति*
इस निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, समाज सेवी, प्रशासनिक अधिकारी एवं भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने नवनिर्मित गार्डन की व्यवस्थाओं को देखकर खुशी जाहिर की। निधि गोहल – उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम, ढीमरखेड़ा)
महिमा रघुवंशी – थाना प्रभारी, ढीमरखेड़ा
अनिल पाण्डेय – चौकी प्रभारी, सिलौड़ी
सुशील तिवारी – पूर्व जी.एम., हीडलबर्ग सीमेंट कंपनी कैलाशचन्द जैन – सरपंच, कछारगांव बड़ा
शैलेश जैन – मंडल उपाध्यक्ष
कन्छेदी बर्मन – पूर्व सरपंच
प्रकाश सिंह बागरी – पूर्व जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय,
अनिल बागरी – सरपंच, खम्हरिया बागरी ओंकार उपाध्याय, गोविन्द सिंह बागरी, प्रवीन बर्मन, विकास जैन, बलराम पटेल, प्रशान्त राय, प्रदीप जैन, प्रदीप बर्मन, एवं लकी जैन।
*क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर*
गार्डन के निर्माण और अस्पताल के निरीक्षण के बाद कछारगांव बड़ा और आसपास के इलाकों के ग्रामीणों में भारी उत्साह है।ग्रामीणों का कहना है कि यह उद्यान अब केवल टहलने या बैठने की जगह नहीं, बल्कि पूरे ढीमरखेड़ा ब्लॉक के लिए एक मिसाल बन चुका है।कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि अन्य पंचायतों को भी कछारगांव बड़ा से प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे शासकीय योजनाओं और व्यक्तिगत जनभागीदारी को मिलाकर ग्राम विकास की एक नई इबारत लिखी जा सकती है।

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