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आदिवासियों से छीना जा रहा हैं आदिवासियों की आईटीआई का हक, उमरियापान में आईटीआई भवन बनाने की साजिश, ढीमरखेड़ा में ही बने आईटीआई भवन आदिवासी अंचल के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई, आदिवासी अंचल में उठती अधिकार और स्वाभिमान की आवाज, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बातों को भी ठुकरा रहे हैं कुछ तथाकथित लोग

 आदिवासियों से छीना जा रहा हैं आदिवासियों की आईटीआई का हक, उमरियापान में आईटीआई भवन बनाने की साजिश, ढीमरखेड़ा में ही बने आईटीआई भवन आदिवासी अंचल के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई, आदिवासी अंचल में उठती अधिकार और स्वाभिमान की आवाज, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बातों को भी ठुकरा रहे हैं कुछ तथाकथित लोग 



ढीमरखेड़ा  |  कटनी जिले का ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र एक प्रमुख आदिवासी बाहुल्य अंचल है। वर्षों से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इस क्षेत्र में जब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) की स्वीकृति मिली थी, तब स्थानीय युवाओं और नागरिकों में उम्मीद की एक नई किरण जगी थी। लेकिन वर्तमान में इस संस्थान के भवन निर्माण के स्थान को लेकर उत्पन्न हुए विवाद ने एक बार फिर क्षेत्रीय उपेक्षा और प्रशासनिक अदूरदर्शिता को उजागर कर दिया है। युवा जनकल्याण मोर्चा ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता के साथ उठाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जिस आईटीआई का आवंटन ढीमरखेड़ा के नाम से हुआ है, उसका भवन निर्माण हर हाल में ढीमरखेड़ा की भौगोलिक सीमा के भीतर ही होना चाहिए। मोर्चा ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस स्वीकृत सौगात को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया, तो क्षेत्र का युवा चुप नहीं बैठेगा और इसके खिलाफ उग्र जनआंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

*स्वीकृति की पृष्ठभूमि, तकनीकी शिक्षा और रोजगार की उम्मीद*

ढीमरखेड़ा अंचल में शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।विशेष रूप से उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए स्थानीय छात्र-छात्राओं को कटनी, जबलपुर या अन्य दूरदराज के शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों के बच्चों के लिए बाहर रहकर पढ़ाई करना अत्यंत कठिन और खर्चीला साबित होता है। इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए, शासन द्वारा ढीमरखेड़ा के आदिवासी अंचल के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगारोन्मुखी तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आईटीआई की मंजूरी दी गई थी। इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य था तकनीकी कौशल का विकास क्षेत्र के युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे व्यावहारिक ट्रेड्स में प्रशिक्षित करना। स्थानीय रोजगार के अवसर स्थानीय युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें स्वरोजगार अथवा उद्योगों में रोजगार पाने के योग्य बनाना।आर्थिक आत्मनिर्भरता गरीब और आदिवासी परिवारों के आर्थिक स्तर में सुधार लाना ताकि वे गरीबी के दुचक्र से बाहर निकल सकें। 

*विवाद का कारण स्वीकृत स्थान के स्थान-परिवर्तन की आशंका*

विवाद तब गहराया जब यह खबरें सामने आने लगीं कि ढीमरखेड़ा के नाम से स्वीकृत इस आईटीआई का भवन निर्माण ढीमरखेड़ा मुख्यालय या इसके निकटवर्ती आदिवासी क्षेत्र में न कराकर उमरियापान या किसी अन्य स्थान पर कराने की योजना बनाई जा रही है। इस संभावित स्थानांतरण से क्षेत्रीय युवाओं और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। युवा जनकल्याण मोर्चा का तर्क है कि यदि आईटीआई का भवन ढीमरखेड़ा से दूर बनाया जाता है, तो इस स्वीकृति का मूल उद्देश्य ही निष्प्रभावी हो जाएगा। दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों से आने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन यात्रा करना या अन्यत्र रहना पुन एक बड़ी वित्तीय और व्यावहारिक समस्या बन जाएगा।

*युवा जनकल्याण मोर्चा का रुख और स्पष्ट मांगें*

युवा जनकल्याण मोर्चा ने इस मुद्दे पर अत्यंत स्पष्ट और व्यावहारिक रुख अपनाया है।मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी अन्य क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ढीमरखेड़ा के अधिकारों की बली चढ़ाकर किसी दूसरे क्षेत्र का विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा। युवा जनकल्याण मोर्चा द्वारा शासन-प्रशासन के समक्ष मांगें रखी गई हैं कि स्वीकृत स्थान पर ही निर्माण हो चूंकि आईटीआई का आवंटन ढीमरखेड़ा के नाम से हुआ है, इसलिए इसके भवन का निर्माण ढीमरखेड़ा में ही प्रारंभ कराया जाए।उमरियापान के लिए पृथक मांग की सलाह यदि उमरियापान क्षेत्र में भी तकनीकी शिक्षा संस्थान की आवश्यकता है, तो वहां के जनप्रतिनिधि और नागरिक शासन से अलग से नई आईटीआई की स्वीकृति की मांग करें। ढीमरखेड़ा की स्वीकृत आईटीआई को वहां ले जाना सर्वथा अनुचित है।आदिवासी हितों की सुरक्षा आदिवासी बाहुल्य अंचल के युवाओं के हक पर डाका न डाला जाए और प्रशासनिक निर्णयों में स्थानीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का प्राथमिकता से ध्यान रखा जाए।

*स्थानांतरण से होने वाले संभावित नुकसान*

यदि ढीमरखेड़ा की आईटीआई को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम क्षेत्रीय विकास पर देखने को मिलेंगे शिक्षा से वंचित होंगे निर्धन छात्र ढीमरखेड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्रों के छात्र, जो आर्थिक तंगी के कारण बाहर नहीं जा सकते, वे तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाएंगे। छात्राएं होंगी सर्वाधिक प्रभावित सुरक्षा और आवागमन के साधनों के अभाव के कारण छात्राओं की तकनीकी शिक्षा में भागीदारी अत्यधिक घट जाएगी। क्षेत्रीय असंतुलन ढीमरखेड़ा का पिछड़ापन और गहराएगा, जबकि प्रशासनिक स्तर पर विकास का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।

*आंदोलन की चेतावनी लोकतांत्रिक अधिकार और भावी रणनीति*

युवा जनकल्याण मोर्चा ने शासन एवं कटनी जिला प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी अंचल की इस जायज मांग को अनदेखा किया गया, तो क्षेत्र का युवा चुप नहीं बैठेगा । प्रथम चरण शांतिपूर्ण ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराना।द्वितीय चरण यदि अतिशीघ्र भूमि चिह्नित कर भवन निर्माण कार्य ढीमरखेड़ा में प्रारंभ नहीं कराया गया, तो व्यापक स्तर पर जनआंदोलन, चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। अंतिम लक्ष्य संगठन का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक भवन की नहीं, बल्कि ढीमरखेड़ा के युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

*शासन-प्रशासन से अपेक्षा*

ढीमरखेड़ा में आईटीआई भवन का निर्माण केवल एक शासकीय इमारत खड़ा करना भर नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के हजारों युवाओं के सपनों और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना से जुड़ा हुआ संवेदनशील विषय है। शासन और प्रशासन को चाहिए कि वे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के जनभावनाओं और युवाओं के दूरगामी हितों को समझें।हठधर्मिता या राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने के बजाय, ढीमरखेड़ा के नाम से स्वीकृत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का भवन निर्माण तत्काल ढीमरखेड़ा में ही प्रारंभ कराया जाए, जिससे क्षेत्र में पनप रहे असंतोष को समय रहते समाप्त किया जा सके और युवाओं को उनका वाजिब हक मिल सके।

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