ढीमरखेड़ा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की नई उम्मीद, ग्रामीणों की समस्याओं को आवाज दे रहे युवा समाजसेवी सोनू गौतम
ढीमरखेड़ा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की नई उम्मीद, ग्रामीणों की समस्याओं को आवाज दे रहे युवा समाजसेवी सोनू गौतम
ढीमरखेड़ा | किसी भी क्षेत्र का वास्तविक विकास केवल कागजी योजनाओं या प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी सच्ची नींव तब पड़ती है जब धरातल पर कोई ऐसा व्यक्ति खड़ा हो जो आम जनता के दर्द को समझ सके और प्रशासन के सामने उनकी आवाज पूरी मजबूती से उठा सके। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम मुरवारी के निवासी और सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी सोनू गौतम आज ढीमरखेड़ा क्षेत्र के लिए एक ऐसी ही सशक्त आवाज बनकर उभरे हैं। क्षेत्र के चहुंमुखी विकास, जन-जन की समस्याओं के स्थायी निराकरण और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सोनू गौतम ने एक व्यापक अभियान छेड़ा है। वे गांव-गांव जाकर चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं, उनकी समस्याओं की सूची तैयार कर रहे हैं और उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत कर निराकरण का ठोस प्रयास कर रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ और निरंतर प्रयास ने पूरे क्षेत्र में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।
*जन-संवाद अभियान समस्याओं को समझने और सुलझाने का नया मॉडल*
सोनू गौतम का मानना है कि जब तक समस्याओं के मूल कारण तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक उनका स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसी सोच के तहत उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों का सघन दौरा शुरू किया है। वे रोजाना किसानों, युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में केवल समस्याएं सुनी ही नहीं जातीं, बल्कि उनका वर्गीकरण भी किया जाता है जैसे कि कौन सी समस्या स्थानीय स्तर की है, कौन सी पंचायत स्तर पर सुलझ सकती है और किन मामलों के लिए जिला प्रशासन या राज्य सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।सोनू गौतम ने कहा हमारा ढीमरखेड़ा क्षेत्र प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आज भी कई गांव पिछड़ेपन का शिकार हैं।मेरा उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज कराना नहीं है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच एक मजबूत पुल बनकर समस्याओं का समयबद्ध निराकरण कराना है। जब तक हर घर तक सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा की बेहतर पहुंच नहीं होगी, हमारा प्रयास जारी रहेगा।
*क्षेत्र की प्रमुख मूलभूत समस्याएं और सोनू गौतम की पहल*
ग्रामीण अंचलों में आज भी कई ऐसी मूलभूत आवश्यकताएं हैं, जिनके लिए ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष करना पड़ता है।
*जर्जर सड़कें और सुगम आवागमन*
ढीमरखेड़ा जनपद के कई अंदरूनी गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग और पहुंच मार्ग अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं।बारिश के दिनों में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है, जिससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों को स्कूल जाने में भारी कठिनाई होती है। सोनू गौतम ने लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों से संपर्क साधकर इन जर्जर मार्गों के डामरीकरण और मरम्मत की मांग उठाई है।
*शुद्ध पेयजल संकट हर घर जल योजना का धरातल पर क्रियान्वयन*
गर्मी का मौसम आते ही क्षेत्र के अनेक गांवों में जलस्तर नीचे चला जाता है और हैंडपंप दम तोड़ने लगते हैं। यद्यपि सरकार की 'नल-जल योजना' के तहत कार्य जारी हैं, लेकिन कई स्थानों पर कार्य अधूरा है या गुणवत्ताहीन है। सोनू गौतम ने पीएचई (PHE) विभाग के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि अधूरी पड़ी नल-जल योजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए और हर ग्रामीण तक स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
*बिजली की अनियमित आपूर्ति और वोल्टेज की समस्या*
कृषि आधारित इस क्षेत्र में किसानों के लिए बिजली जीवनरेखा के समान है। लेकिन आए दिन लो-वोल्टेज, बार-बार कटौतियां और ट्रांसफॉर्मर जलने की शिकायतें बनी रहती हैं। सोनू गौतम ने विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों से मिलकर जर्जर तारों को बदलने, नए ट्रांसफॉर्मर स्थापित करने और कृषि कार्यों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग पुरजोर तरीके से रखी है।
*स्वच्छता और नालियों की बेहतर व्यवस्था*
गांवों में जल निकासी (ड्रेनेज) की उचित व्यवस्था न होने से सड़कों पर गंदा पानी फैलता है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। सोनू गौतम ने ग्राम पंचायतों के माध्यम से नाली निर्माण और नियमित साफ-सफाई अभियानों को गति देने पर जोर दिया है।
*स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण*
क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा जीवनरक्षक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना सोनू गौतम की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा, शासकीय स्कूलों में योग्य शिक्षकों की पदस्थापना और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं।
*सामूहिक सहभागिता और संगठित प्रयास पर बल*
सोनू गौतम की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अकेले श्रेय लेने के बजाय 'सामूहिक सहभागिता' में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र में जनता की संगठित आवाज में अपार शक्ति होती है। उन्होंने ग्रामीणों से विशेष अपील करते हुए कहा संगठित बनें गांव की समस्याओं को व्यक्तिगत न मानकर पूरे गांव की समस्या समझें और एकजुट होकर ज्ञापन सौंपें। योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता पर नजर रखें और जहां भी गड़बड़ी दिखे, तुरंत जागरूक नागरिक के रूप में आवाज उठाएं।जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ टकराव के बजाय संवाद का मार्ग अपनाएं, ताकि काम शीघ्रता से पूरा हो सके।

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