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आदेश के बाद भी ढीमरखेड़ा में क्यों नहीं खुल रही आईटीआई? युवाओं के भविष्य से कौन कर रहा खिलवाड़, पोड़ी खुर्द में पूर्व से भूमि आवंटित, अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटन की तैयारी पर उठे सवाल

 आदेश के बाद भी ढीमरखेड़ा में क्यों नहीं खुल रही आईटीआई? युवाओं के भविष्य से कौन कर रहा खिलवाड़, पोड़ी खुर्द में पूर्व से भूमि आवंटित, अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटन की तैयारी पर उठे सवाल


ढीमरखेड़ा । शासन द्वारा स्वीकृत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के संचालन को लेकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि शासन स्तर पर आईटीआई की स्वीकृति और आवश्यक निर्देश जारी होने के बावजूद आज तक संस्थान का संचालन ढीमरखेड़ा मुख्यालय में शुरू नहीं किया गया। वहीं, यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पोड़ी खुर्द में पहले से भूमि आवंटित होने के बावजूद अब उमरियापान में पुनः भवन हेतु भूमि आवंटित कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पूर्व में भूमि उपलब्ध और शासन के निर्देश स्पष्ट हैं, तो दोबारा भूमि आवंटन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? क्या यह प्रक्रिया नियमानुसार है या फिर किसी अन्य उद्देश्य से अपनाई जा रही है? इन सवालों के बीच युवाओं में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

*आदेश के बाद भी क्यों नहीं खुल रही आईटीआई*

स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन द्वारा आईटीआई को ढीमरखेड़ा में संचालित करने की स्वीकृति दी जा चुकी है।शासकीय भवन भी उपलब्ध बताया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद संचालन शुरू नहीं हो सका। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस स्तर पर फाइलें अटकी हुई हैं और किस कारण आदेशों का पालन नहीं हो रहा।

*सिलौड़ी, खमतरा से 30 किलोमीटर दूर उमरियापान भेजने पर छात्रों में आक्रोश*

यदि आईटीआई का संचालन उमरियापान में किया जाता है, तो सिलौड़ी, खमतरा, सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रतिदिन लगभग 30 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी।ग्रामीण परिवहन की सीमित व्यवस्था, आर्थिक कठिनाइयाँ और छात्राओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अभिभावकों ने भी चिंता जताई है।

*ढीमरखेड़ा क्षेत्र के लिए अधिक उपयुक्त स्थान*

स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि ढीमरखेड़ा भौगोलिक दृष्टि से पूरे विकासखंड का केंद्र है। यहां आईटीआई संचालित होने से ढीमरखेड़ा, खमतरा, सिलौड़ी, पोड़ी, देवरी, बिछिया तथा क्षेत्र के अनेक गांवों के छात्र आसानी से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी लाभ मिलेगा।

*सिर्फ भवन नहीं, आधुनिक ट्रेड भी शुरू हों*

क्षेत्रीय नागरिकों और युवाओं ने मांग की है कि आईटीआई शुरू होने पर केवल भवन खोलने तक सीमित न रहा जाए, बल्कि रोजगारपरक और आधुनिक ट्रेड जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, कंप्यूटर ऑपरेटर, डीजल मैकेनिक, सोलर टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लंबर एवं अन्य उद्योग आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएँ, ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

*जनता के प्रमुख सवाल*

जब शासन स्तर से स्वीकृति और निर्देश जारी हो चुके हैं, तो आईटीआई का संचालन अब तक क्यों शुरू नहीं हुआ? पोड़ी खुर्द में पूर्व से भूमि आवंटित होने के बावजूद उमरियापान में पुनः भूमि आवंटन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है,क्या इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया जा रहा है? आदेशों के पालन में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या क्षेत्र के हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है? क्षेत्रवासियों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए तथा यदि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण हैं तो आईटीआई का संचालन शीघ्र पोड़ी कॉलेज में प्रारंभ किया जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा का लाभ समय पर मिल सके।

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