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देवरी बिछिया के लाल लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने जबलपुर में गाड़े सफलता के झंडे, शिक्षक के बेटे ने कड़े संघर्ष से खड़ा किया करोड़ों का प्रिंटिंग साम्राज्य चुनौतियों को मात देकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र का नाम किया रोशन, सामाजिक सरोकारों और राजनीति में भी हैं बेहद सक्रिय

 देवरी बिछिया के लाल लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने जबलपुर में गाड़े सफलता के झंडे, शिक्षक के बेटे ने कड़े संघर्ष से खड़ा किया करोड़ों का प्रिंटिंग साम्राज्य चुनौतियों को मात देकर ढीमरखेड़ा क्षेत्र का नाम किया रोशन, सामाजिक सरोकारों और राजनीति में भी हैं बेहद सक्रिय



ढीमरखेड़ा |  कहते हैं कि इंसान की पहचान उसकी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके हौसलों और हुनर से होती है। अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो एक छोटे से गांव की गलियों से निकलकर महानगरों के व्यावसायिक क्षितिज पर चमकना नामुमकिन नहीं रह जाता। इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवरी बिछिया के मूल निवासी लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने। एक साधारण शिक्षक के परिवार में जन्मे लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने अपनी लगन, कड़ी मेहनत और अद्भुत व्यावसायिक सूझबूझ के बल पर आज जबलपुर जैसे बड़े शहर में करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनों के साथ एक बहुत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य स्थापित कर लिया है।आज वे बुक, कॉपी-किताबों और अत्याधुनिक बैनर प्रिंटिंग के क्षेत्र में एक बड़ा और जाना-माना नाम बन चुके हैं।

*पिता के संस्कारों और शिक्षा ने दी उड़ान*

लक्ष्मण प्रसाद गर्ग के पिता जी एक सम्मानीय शिक्षक थे। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटे की शिक्षा-दीक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता का हमेशा से यही मानना था कि शिक्षा ही वह चाबी है जो सफलता के बंद कमरों के ताले खोल सकती है।पिता ने लक्ष्मण प्रसाद को पढ़ाया-लिखाया और जीवन में हमेशा ईमानदारी और मेहनत के रास्ते पर चलने के संस्कार दिए। पिता की इसी सीख को आत्मसात कर बेटा भी जीवन में कुछ बड़ा और अलग कर गुजरने के संकल्प के साथ आगे बढ़ा। लक्ष्मण प्रसाद गर्ग ने हमेशा माना कि उनका हुनर और उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कार ही उनकी असली पूंजी हैं, जिसने उन्हें हर मुश्किल दौर में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

*छोटे से गांव से जबलपुर तक का सफर एक बड़ी चुनौती*

एक बेहद छोटे और ग्रामीण अंचल देवरी बिछिया से निकलकर जबलपुर जैसे बड़े व्यावसायिक केंद्र में पैर जमाना लक्ष्मण प्रसाद गर्ग के लिए कोई आसान रास्ता नहीं था। महानगरीय बाजार की गलाकाट प्रतिस्पर्धा, पूंजी का अभाव और नए माहौल में खुद को स्थापित करना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी । शुरुआती दौर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मैंने हार मानना नहीं सीखा। मेरा मानना है कि हुनर और ईमानदारी व्यक्ति को कभी टूटने नहीं देती। हर चुनौती एक नया सबक लेकर आती है। लक्ष्मण प्रसाद गर्ग, लक्ष्मण प्रसाद ने हर विपरीत परिस्थिति का डटकर सामना किया। उन्होंने जबलपुर में कदम रखने के बाद बाजार की नब्ज को पहचाना और प्रिंटिंग व पब्लिशिंग के क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया।आज उनके पास बुक, कॉपियों और बड़े-बड़े विज्ञापनों के बैनर छापने वाली कई करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें हैं।उनका यह व्यवसाय आज न केवल जबलपुर बल्कि आसपास के कई जिलों में अपनी सेवाएं दे रहा है। एक ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवक द्वारा करोड़ों का बिजनेस सेटअप खड़ा करना आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

*ढीमरखेड़ा क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा समर्पित*

भले ही आज लक्ष्मण प्रसाद गर्ग जबलपुर जैसे बड़े शहर में एक सफल उद्योगपति और व्यवसायी के रूप में स्थापित हो चुके हैं, लेकिन उनकी आत्मा आज भी अपनी माटी, अपने गांव देवरी बिछिया और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही बसती है। वे अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के विकास को लेकर वे चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं। क्षेत्र का कोई भी नागरिक जब कभी किसी समस्या को लेकर उनके पास पहुंचता है, वे तत्परता से उसकी मदद के लिए खड़े हो जाते हैं।क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने से लेकर बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए वे लगातार आवाज उठाते रहते हैं।

*हर सामाजिक और धार्मिक आयोजन में अग्रिम उपस्थिति*

लक्ष्मण प्रसाद गर्ग की एक बड़ी विशेषता उनका मिलनसार और सामाजिक स्वभाव है।ढीमरखेड़ा और देवरी बिछिया क्षेत्र में होने वाले हर छोटे-बड़े आयोजन, चाहे वह कोई धार्मिक अनुष्ठान हो, सामाजिक सम्मेलन हो, या खेलकूद प्रतियोगिता, उनकी उपस्थिति अनिवार्य रूप से देखी जाती है।वे न केवल इन आयोजनों में शामिल होते हैं, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक और प्रबंधकीय सहयोग करने में भी कभी पीछे नहीं रहते। क्षेत्र की जनता उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानती है और हर सुख-दुख में उन्हें अपने बीच पाकर गर्व महसूस करती है।

*कांग्रेस पार्टी के सच्चे सिपाही राजनीति में भी सक्रिय भूमिका*

व्यावसायिक व्यस्तताओं के बीच लक्ष्मण प्रसाद गर्ग राजनीतिक रूप से भी बेहद सक्रिय हैं। वे लंबे समय से कांग्रेस पार्टी के एक निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पार्टी के प्रति उनकी वफादारी और जमीनी पकड़ के चलते स्थानीय संगठन में उनका खासा प्रभाव है। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के लिए वे लगातार काम कर रहे हैं। राजनैतिक हलकों में उन्हें एक साफ-सुथरी छवि और प्रखर वक्ता के रूप में जाना जाता है। उनका मानना है कि राजनीति समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम है और वे इसी ध्येय के साथ राजनीति में सक्रिय हैं।

*युवाओं के लिए प्रेरणा हुनर ही बढ़ाता है आगे*

लक्ष्मण प्रसाद गर्ग की यह जीवन यात्रा आज के भटके हुए और निराश युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल है। वे साबित करते हैं कि यदि आपके पास कोई हुनर है और आप कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटते, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। आज देवरी बिछिया और पूरे ढीमरखेड़ा क्षेत्र को अपने इस लाड़ले बेटे पर नाज है, जिसने न केवल व्यापार के क्षेत्र में करोड़ों का मुकाम हासिल किया, बल्कि अपनी माटी का कर्ज चुकाने के लिए हमेशा तत्पर खड़ा रहता है।लक्ष्मण प्रसाद गर्ग का बढ़ता कदम इस बात का प्रतीक है कि 'हुनर और हौसला' जब मिल जाते हैं, तो इतिहास लिख दिया जाता है।

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