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सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत

 सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत 



कटनी  |  कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा के किसानों के सामने इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। खेती-किसानी पर निर्भर हजारों किसान इस समय गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।कारण है सिकमी नामा से जुड़े किसानों का पंजीयन पोर्टल पर फेल हो जाना, जिसके चलते वे समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा के किसानों की पीड़ा से अवगत कराया है।विधायक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सिकमी नामा पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन पोर्टल में अस्वीकार हो रहा है, जिसके कारण वे सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। बड़वारा विधानसभा सहित कटनी जिले के अनेक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान सिकमी नामा के तहत खेती करते हैं। यह वह व्यवस्था है, जिसमें भूमि मालिक और खेती करने वाला किसान आपसी सहमति से खेती करता है। वर्षों से ऐसे किसान धान, गेहूं सहित अन्य फसलों का उत्पादन करते आ रहे हैं और समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी केंद्रों में अपनी उपज बेचते रहे हैं। लेकिन इस वर्ष जब किसानों ने धान विक्रय के लिए पंजीयन कराया, तो सिकमी नामा से जुड़े आवेदन पोर्टल में फेल हो गए।कई किसानों के आवेदन अमान्य, रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं या भूमि स्वामित्व का मिलान नहीं  जैसे कारणों से निरस्त कर दिए गए।परिणामस्वरूप किसान खरीदी केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

*किसानों की बढ़ती चिंता*

धान की फसल तैयार होकर मंडियों और खरीदी केंद्रों तक पहुंच चुकी है। किसानों ने बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर भारी खर्च किया है।अब जब फसल बेचने का समय आया, तो तकनीकी अड़चन उनके सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर धान का विक्रय नहीं हुआ तो उन्हें मजबूरी में औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को फसल बेचनी पड़ेगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। कई किसानों ने यह भी बताया कि उन्होंने सहकारी समितियों, तहसील कार्यालय और कृषि विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से संतोषजनक समाधान नहीं मिला। यही कारण है कि पूरे क्षेत्र में आक्रोश और निराशा का माहौल बनता जा रहा है।

*योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने कराया संपादक राहुल पाण्डेय का ध्यान आकर्षित*

इस महत्वपूर्ण पत्र और किसानों की समस्या को लेकर योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने इस विषय को लेकर संपादक राहुल पाण्डेय का ध्यान आकर्षित कराया, ताकि यह मुद्दा व्यापक रूप से जनमानस और शासन-प्रशासन तक पहुंचे। योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर का कहना है कि यह केवल कुछ किसानों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के कृषि तंत्र से जुड़ा हुआ विषय है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि किसानों की आवाज को प्रमुखता से उठाया जाए, जिससे शासन तक सही स्थिति पहुंच सके।

टिप्पणियाँ

  1. किसानों की सुनता कोन है शायद, विधायक जी की सुनवाई हो

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