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किसानों की समस्याओं को लेकर ढीमरखेड़ा में कांग्रेस आक्रामक, मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मूंग खरीदी केंद्र बदलने, बिजली और खाद की किल्लत दूर करने की मांग

 किसानों की समस्याओं को लेकर ढीमरखेड़ा में कांग्रेस आक्रामक, मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, मूंग खरीदी केंद्र बदलने, बिजली और खाद की किल्लत दूर करने की मांग



 ढीमरखेड़ा  |  मध्य प्रदेश के कटनी जिले के अंतर्गत आने वाले ढीमरखेड़ा विकासखंड में किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। क्षेत्र के अन्नदाताओं को आ रही विभिन्न व्यावहारिक और आर्थिक दिक्कतों के निराकरण की मांग को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ढीमरखेड़ा के बैनर तले एक विशाल विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया गया।कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में उपस्थित क्षेत्र के किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से ढीमरखेड़ा और आसपास के ग्रामीण अंचलों में कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर रही गंभीर विसंगतियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की इन वाजिब मांगों पर समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में पार्टी किसानों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

*मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर किसान*

ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से उपस्थित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ढीमरखेड़ा के अध्यक्ष आनंद कुमार मिश्रा ने क्षेत्र के किसानों की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में क्षेत्र का किसान अपनी ही उपज को बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल तैयार होकर आ चुकी है, लेकिन सरकारी स्तर पर खरीदी की सुस्त रफ्तार और कड़े नियमों के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि क्षेत्र के प्रत्येक पंजीकृत किसान से समर्थन मूल्य पर मूंग की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाए। आनंद कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की शिथिलता के चलते बिचौलिए और व्यापारी सक्रिय हो गए हैं, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई को औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं। यदि सरकार ने तुरंत प्रभाव से पूरी फसल खरीदने के आदेश जारी नहीं किए, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा और वे अगली फसल (खरीफ) की बुआई के लिए कर्ज के जाल में फंस जाएंगे।

*खरीदी केंद्रों की दूरी बनी मुसीबत राधे कृष्णा वेयरहाउस' से केंद्र बदलने की मांग*

इस ज्ञापन पत्र में एक बेहद व्यावहारिक और गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है, जो सीधे तौर पर किसानों की जेब और समय से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राधे कृष्णा वेयरहाउस भूला में मूंग एवं उड़द की सरकारी खरीदी का केंद्र संचालित किया जा रहा है।कांग्रेस नेताओं और स्थानीय किसानों का कहना है कि यह केंद्र भौगोलिक दृष्टि से ढीमरखेड़ा विकासखंड के एक बड़े हिस्से के किसानों के लिए अत्यधिक दूरी पर स्थित है।दूरदराज के गांवों से आने वाले किसानों को अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों में उपज लादकर भूला तक ले जाने में भारी परिवहन व्यय (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) वहन करना पड़ेगा। इसके अलावा, खरीदी केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों के कारण किसानों के कई दिन बर्बाद होंगे। इस समस्या के तार्किक समाधान के रूप में ब्लॉक कांग्रेस ने मांग की है कि इस खरीदी केंद्र को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर तहसील मुख्यालय के समीप ढीमरखेड़ा तथा पान उमरिया क्षेत्र में स्थापित किया जाए। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यदि ढीमरखेड़ा और पान उमरिया में केंद्र बनते हैं, तो यह क्षेत्र के अधिकांश गांवों के लिए केंद्र बिंदु होगा, जिससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन का अतिरिक्त पैसा बचेगा।

*खाद संकट पर सरकार को घेरा यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग*

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही पूरे प्रदेश सहित ढीमरखेड़ा क्षेत्र में भी खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। ज्ञापन में किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया एवं डीएपी खाद उपलब्ध कराने का मुद्दा बेहद आक्रामकता के साथ उठाया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि हर साल की तरह इस साल भी प्रशासन की लापरवाही के कारण क्षेत्र में खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर दी गई है। ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया है कि सोसायटियों और सरकारी गोदामों से खाद गायब है, जबकि निजी विक्रेताओं और ब्लैक मार्केटियर्स के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इस स्थिति का फायदा उठाकर खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी धड़ल्ले से की जा रही है। गरीब और मध्यम वर्गीय किसान लाइनों में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं, जबकि उन्हें मजबूरी में ऊंचे दामों पर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे खेल की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई हो और सोसायटियों के माध्यम से पारदर्शी तरीके से हर किसान तक यूरिया और डीएपी पहुंचाई जाए।

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