खेत तालाब निर्माण में अनियमितता के आरोप, मजदूरी और सामग्री भुगतान पर उठे सवाल, ग्राम पंचायत बरतरा का मामला मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बिलिंग की आशंका, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
खेत तालाब निर्माण में अनियमितता के आरोप, मजदूरी और सामग्री भुगतान पर उठे सवाल, ग्राम पंचायत बरतरा का मामला मनरेगा नियमों को ताक पर रखकर फर्जी बिलिंग की आशंका, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
कटनी । जनपद पंचायत बहोरीबंद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरतरा इन दिनों महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कराए गए कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विवादों में है। ग्राम पंचायत में स्वीकृत खेत तालाब निर्माण कार्यों में हुए भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि धरातल पर मजदूरों को रोजगार देने के बजाय कागजों पर सामग्री मद में भारी-भरकम भुगतान दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग की ओर इशारा करता है।
*मजदूरी कम, सामग्री का खर्च ज्यादा*
जानकारी के मुताबिक, मनरेगा के नियमों को दरकिनार कर ऐसे कार्यों में सामग्री का खर्च बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है जहां उसकी नाममात्र की आवश्यकता थी। हितग्राही ज्ञान सिंह गोड के नाम पर दर्ज खेत तालाब निर्माण कार्य में मजदूरी मद में 1,04,674 रुपये तथा सामग्री मद में 34,180 रुपये का व्यय दर्शाया गया है। एक अन्य खेत तालाब के कार्य में तो अनियमितता की हदें पार हो गईं, जहाँ मजदूरी मद में महज 429 रुपये और सामग्री खर्च में 28,145 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
*क्या कहता है नियम और प्रावधान*
मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मजदूरों को 100 दिन का गारंटीड रोजगार उपलब्ध कराना है। नियमानुसार इसमें मजदूरी और सामग्री का एक निश्चित अनुपात (60:40) होना अनिवार्य है, ताकि अधिकतम राशि मजदूरों के हाथों में जाए।
*10% मजदूरी और 90% सामग्री का खेल*
ग्रामीणों का आरोप है कि बरतरा पंचायत में कई निर्माण कार्यों में जानबूझकर 10 प्रतिशत मजदूरी और 90 प्रतिशत तक सामग्री भुगतान दिखाया जा रहा है। मिट्टी खुदाई के कार्यों में इतनी भारी-भरकम सामग्री का उपयोग दिखाया जाना पूरी तरह से संदेहास्पद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल सरकारी राशि के बंदरबांट और फर्जी बिल पास कराने का कागजी खेल है।
*निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग*
ग्राम पंचायत बरतरा में चल रहे इस 'कागजी खर्च के खेल' को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि संबंधित सभी खेत तालाब निर्माण कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कर देखा जाए कि वास्तव में वहां कितनी सामग्री का उपयोग हुआ है।
जांच में दोषी पाए जाने वाले पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री (सब-इंजीनियर) के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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