जनता की आवाज, किसानों की समस्याओं और अधूरे वादों को लेकर बरसे जनपद सदस्य निरंजन प्रसाद खटीक, आंदोलन की दी चेतावनी, मूंग-उड़द खरीदी केंद्र ढीमरखेड़ा में बनाने और बिजली-डीजल संकट को दूर करने की पुरजोर मांग, लालपुर सगवां पुल निर्माण न होने पर क्षेत्रीय विधायक और सांसद को घेरा
जनता की आवाज, किसानों की समस्याओं और अधूरे वादों को लेकर बरसे जनपद सदस्य निरंजन प्रसाद खटीक, आंदोलन की दी चेतावनी, मूंग-उड़द खरीदी केंद्र ढीमरखेड़ा में बनाने और बिजली-डीजल संकट को दूर करने की पुरजोर मांग, लालपुर सगवां पुल निर्माण न होने पर क्षेत्रीय विधायक और सांसद को घेरा
ढीमरखेड़ा । क्षेत्र के सुप्रसिद्ध समाजसेवी और जनपद सदस्य के दिग्गज नेता निरंजन प्रसाद खटीक एक बार फिर किसानों और आम जनता के हक की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आ रहे हैं। हमेशा किसान हितों के लिए समर्पित रहने वाले निरंजन प्रसाद खटीक ने क्षेत्र की सुलगती समस्याओं को लेकर प्रशासन और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ढीमरखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में किसानों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों, अघोषित बिजली कटौती, डीजल की कमी और वर्षों से लंबित पड़े पुल निर्माण कार्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और सरकार से अविलंब कदम उठाने की मांग की है।
*किसानों की सुध ले सरकार ढीमरखेड़ा में बने अलग मूंग-उड़द खरीदी केंद्र*
जनपद सदस्य निरंजन प्रसाद खटीक ने क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या को उठाते हुए कहा कि इस समय मूंग और उड़द उत्पादक किसान बेहद परेशान हैं। उन्होंने मांग की है कि किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मूंग और उड़द की खरीदी का एक अलग और समर्पित केंद्र ढीमरखेड़ा में बनाया जाए। वर्तमान में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनका परिवहन खर्च बढ़ जाता है और समय की भारी बर्बादी होती है।निरंजन प्रसाद ने पुरजोर शब्दों में कहा ढीमरखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज के केंद्रों पर भटकना पड़ रहा है। यदि ढीमरखेड़ा में ही एक अलग उपार्जन केंद्र स्थापित कर दिया जाए, तो सैकड़ों किसानों को राहत मिलेगी और वे बिचौलियों के शोषण से भी बच सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने एक और महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए कहा कि भूला क्षेत्र में जो मूंग की खरीदी की जानी तय हुई है, उसके लिए उमरियापान में केंद्र बनाया जाए। उमरियापान में केंद्र बनने से भौगोलिक दृष्टि से जुड़े तमाम गांवों के किसानों को अपनी उपज लाने-ले जाने में बेहद आसानी होगी।
*अघोषित बिजली कटौती और डीजल संकट से बेहाल अन्नदाता*
किसान हितैषी नेता निरंजन प्रसाद खटीक ने क्षेत्र में व्याप्त बिजली और ईंधन के संकट पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं किसान अनेकों समस्याओं से परेशान हैं। अनियंत्रित बिजली कटौती क्षेत्र में बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली गुल रहती है। जिससे आम नागरिक परेशान रहता हैं। डीजल की भारी किल्लत बिजली न मिलने पर किसान जब जनरेटर या ट्रैक्टर के माध्यम से सिंचाई का प्रयास करते हैं, तो उन्हें बाजारों में डीजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिलती। डीजल की कमी और इसकी कालाबाजारी ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। निरंजन प्रसाद ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती पर तुरंत रोक लगाई जाए और खेती के समय कम से कम 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर डीजल की पर्याप्त और सुचारू व्यवस्था की जाए ताकि किसानों को कृषि कार्यों में कोई बाधा न आए।
*4 वर्षों से अधूरा लालपुर सगवां पुल विधायक और सांसद के वादे निकले खोखले*
किसानों के मुद्दों के साथ-साथ समाजसेवी निरंजन प्रसाद खटीक ने क्षेत्र की एक बेहद संवेदनशील और गंभीर जनसमस्या को प्रमुखता से उजागर किया है। उन्होंने बताया कि पिछले 4 वर्षों से लालपुर सगवां के पुल का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। इस पुल के न बनने के कारण स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों, राहगीरों और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दिनों में तो स्थिति जानलेवा हो जाती है, जब नाला उफान पर होता है और बच्चों की पढ़ाई हफ्तों के लिए बंद हो जाती है। निरंजन प्रसाद खटीक ने क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह और सांसद हिमाद्री सिंह को क्षेत्र की समस्या नहीं दिख रही हैं। उन्होंने जनता के बीच आकर बड़े-बड़े वादे किए थे और आश्वस्त किया था कि पुल का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा। लेकिन बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि आज तक वह वादा सिर्फ कागजों और बयानों तक ही सीमित रहा। धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों की इस कार्यप्रणाली को जनता के साथ क्रूर मजाक बताते हुए कहा कि चुनाव आते ही नेता वोट मांगने आ जाते हैं, लेकिन संकट के समय बच्चों और नागरिकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
*हमेशा किसान और जनहित के लिए संघर्षरत हैं निरंजन प्रसाद खटीक*
यह कोई पहली बार नहीं है जब निरंजन प्रसाद खटीक ने जनता की आवाज को इस प्रकार मुखर किया है। क्षेत्र के लोग भली-भांति जानते हैं कि वह बीते कई वर्षों से लगातार किसानों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहे हैं। चाहे फसलों का मुआवजा दिलाना हो, खाद-बीज की किल्लत दूर करानी हो, या फिर ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचानी हों निरंजन प्रसाद खटीक ने हमेशा अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी इस बेबाक और संघर्षशील कार्यशैली के कारण ही क्षेत्र के किसान और आम नागरिक उन्हें अपना सच्चा हितैषी मानते हैं।

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