65 फुट का शासकीय नाला पाटकर ढीमरखेड़ा में हो रहा अवैध निर्माण, हाथ में हाथ रखे बैठा रहा प्रशासन, हल्का पटवारी की मिलीभगत से तन गई बिल्डिगें , अवैध निर्माण प्रारंभ करवाकर गायब हो गया पटवारी राहुल चौरसिया
65 फुट का शासकीय नाला पाटकर ढीमरखेड़ा में हो रहा अवैध निर्माण, हाथ में हाथ रखे बैठा रहा प्रशासन, हल्का पटवारी की मिलीभगत से तन गई बिल्डिगें , अवैध निर्माण प्रारंभ करवाकर गायब हो गया पटवारी राहुल चौरसिया
ढीमरखेड़ा । जिले के ढीमरखेड़ा मुख्यालय में शासकीय भूमि और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पर कथित अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आया है।ग्राम के खसरा क्रमांक 97, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय नाला दर्ज है, पर अवैध रूप से मिट्टी डालकर लगभग 65 फुट लंबे हिस्से को समतल किए जाने तथा उस पर निर्माण कार्य किए जाने के आरोप लगे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन लोगों द्वारा नाले की भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया है। इनमें से दो लोगों ने कथित रूप से पक्के भवनों का निर्माण कर लिया है, जबकि तीसरे द्वारा पुलिया डालकर नाले को भरने और समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में शासकीय भूमि पर स्थायी कब्जा हो सकता है और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
*राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय नाला, जमीन पर बदलती तस्वीर*
राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा क्रमांक 97 शासकीय नाला है। ऐसे भू-भाग पर निजी निर्माण या कब्जा नियमों के विरुद्ध माना जाता है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर मिट्टी डालकर नाले को समतल किया गया और निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी गईं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जिस स्थान से बरसाती पानी की निकासी होती रही, आज वहां निर्माण सामग्री, मिट्टी और कंक्रीट दिखाई दे रहे हैं। इससे न केवल सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की आशंका बढ़ी है बल्कि वर्षा ऋतु में जलभराव और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
*प्रशासन के सामने ही चलता रहा निर्माण*
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस स्थान पर कथित निर्माण हो रहा है, वहां से राजस्व विभाग के अधिकारियों के कार्यालय अधिक दूर नहीं हैं।इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य लंबे समय तक चलता रहा तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं हुई?ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते मौके पर पहुंचता और प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करता तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। लोगों का आरोप है कि विभाग की निष्क्रियता ने अतिक्रमण करने वालों का मनोबल बढ़ाया है।
*हल्का पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल*
मामले में स्थानीय लोगों ने हल्का पटवारी राहुल चौरसिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान राजस्व अमले ने प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया। जब इस संबंध में पटवारी राहुल चौरसिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है तथा वे एक सप्ताह के अवकाश पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके स्थान पर दूसरे पटवारी को प्रभार सौंपा गया है।हालांकि, जिन पटवारी का नाम प्रभार के लिए बताया गया, उन्होंने प्रभार मिलने से इनकार किया। दोनों बयानों में अंतर होने के कारण स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
*विरोधाभासी दावों ने बढ़ाए सवाल*
एक ओर संबंधित पटवारी स्वयं को अवकाश पर बताते हैं और दूसरे अधिकारी को प्रभार सौंपने की बात कहते हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारी प्रभार मिलने से इनकार करते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि मौके की निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट रूप से निर्धारित होते और नियमित निरीक्षण किया जाता तो कथित अतिक्रमण की स्थिति नहीं बनती। ढीमरखेड़ा में पिछले कुछ वर्षों से शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य मार्गों के किनारे, सार्वजनिक उपयोग की भूमि तथा अन्य सरकारी जमीनों पर भी धीरे-धीरे कब्जे किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, जिसके कारण अतिक्रमण करने वालों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में सरकारी भूमि को बचाना कठिन हो जाएगा।
*तहसीलदार ने दिए जांच के निर्देश*
मामले में तहसीलदार नितिन पटेल ने कहा कि खसरा क्रमांक 97 राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है और वहां किसी भी प्रकार का निर्माण नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद राजस्व निरीक्षक को तत्काल मौके पर भेजकर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार ने कहा कि जांच में यदि शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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